बिहार की सियासत में परिवारवाद को लेकर एक बार फिर तीखी नोकझोंक शुरू हो गई है. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, और बिहार सरकार में मंत्रियों पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया. तेजस्वी ने नीतीश सरकार पर “जमाई आयोग” गठन का तंज कसते हुए रामविलास पासवान, जीतन राम मांझी, और अशोक चौधरी के दामादों को विभिन्न आयोगों में नियुक्ति देने का मुद्दा उठाया. इसके जवाब में नीतीश के करीबी और बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने तेजस्वी और लालू परिवार पर पलटवार करते हुए करारा हमला बोला.
बिहार की राजनीति में परिवारवाद और भाई-भतीजावाद का मुद्दा बेटी-दामाद तक पहुंच गया है. दरअसल बिहार में एक बार फिर परिवारवाद का मुद्दा चर्चा में है. इस बार केंद्र में बेटी-दामाद हैं. दरअसल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने जनता दल (यूनाइटेड) के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा पर निशाना साधा है. तेजस्वी ने संजय झा की दो बेटियों, अद्या झा और सत्या झा, को सुप्रीम कोर्ट में ग्रुप-ए पैनल काउंसल के रूप में नियुक्त किए जाने पर सवाल उठाए हैं.
तेजस्वी यादव ने परिवारवाद और विशेषाधिकार का “क्लासिकल उदाहरण” करार देते हुए दलित, पिछड़े और अति-पिछड़े वर्गों के अधिकारों को छीने जाने का आरोप लगाया है. तेजस्वी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखते हुए कहा कि संजय झा की दोनों बेटियों को बिना किसी विशेष कार्य अनुभव के सुप्रीम कोर्ट में ग्रुप-ए पैनल काउंसल बनाया गया है. उन्होंने सवाल उठाया, “जदयू के कितने दलित, पिछड़े और अति-पिछड़े नेताओं, सांसदों, मंत्रियों या कार्यकर्ताओं के बेटे-बेटियों को यह विशेषाधिकार प्राप्त है कि वे बिना अनुभव के ऐसी उपलब्धि हासिल कर लें?”
‘जमाई आयोग’ गठित करने की सलाह
तेजस्वी ने इसे मेरिट और प्रतिभा की अनदेखी का मामला बताते हुए कहा कि यह दलितों, पिछड़ों और अति-पिछड़ों के हक को छीनने की साजिश है. यह पहली बार नहीं है जब तेजस्वी ने जदयू और बिहार सरकार पर परिवारवाद को लेकर हमला बोला है. इससे पहले उन्होंने बिहार में “जमाई आयोग” के गठन का तंज कसते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था. तेजस्वी ने आरोप लगाया था कि नीतीश कुमार की कैबिनेट में 50% से अधिक मंत्री परिवारवादी हैं. उन्होंने स्वर्गीय रामविलास पासवान के दामाद, केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी के दामाद और बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी के दामाद को विभिन्न बोर्डों और आयोगों में नियुक्त किए जाने का जिक्र किया था. तेजस्वी ने इसे बिहार की जनता के साथ धोखा करार दिया और नीतीश कुमार से “जमाई आयोग” गठित करने की बात कही थी.
संजय झा की बेटियों की नियुक्ति पर विवाद
संजय झा, जो जदयू के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद हैं, की दोनों बेटियों की सुप्रीम कोर्ट में ग्रुप-ए पैनल काउंसल के रूप में नियुक्ति ने बिहार की सियासत में हलचल मचा दी है. तेजस्वी ने इस नियुक्ति को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बिहार के मिथिला क्षेत्र का भविष्य संवारने के बजाय निजी हितों को साधने का प्रयास है. उन्होंने संजय झा से पूछा, “यह कैसे हुआ? किस बात की डीलिंग हुई?” तेजस्वी का कहना है कि इस तरह की नियुक्तियां मेरिट और पारदर्शिता की अनदेखी करती हैं, जिससे समाज के वंचित वर्गों का हक छिनता है.
अशोक चौधरी का तेजस्वी और लालू परिवार पर पलटवार
नीतीश के करीबी और बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने तेजस्वी और लालू परिवार पर पलटवार करते हुए करारा हमला बोला.
अशोक चौधरी ने तेजस्वी के “जमाई आयोग” वाले बयान को खारिज करते हुए कहा कि लालू परिवार को परिवारवाद पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “लालू यादव ने अपने समय में ‘मामा आयोग’ और ‘साला आयोग’ क्यों नहीं बनाया?” चौधरी ने तेजस्वी पर निशाना साधते हुए कहा कि लालू के बेटे होने के नाते ही वे उपमुख्यमंत्री बने, न कि किसी योग्यता के आधार पर. उन्होंने अपने दामाद सायन बनर्जी की नियुक्ति पर उठे सवालों का जवाब देते हुए कहा, “मेरे दामाद को आयोग में जगह उनकी योग्यता और बीजेपी-आरएसएस के समर्थन के कारण मिली, न कि मेरे प्रभाव की वजह से. वे किशोर कुणाल के बेटे हैं, और उनकी अपनी पहचान है.”
DK बॉस वाले मुद्दे पर क्या कहा?
अशोक चौधरी ने डीके बॉस की पत्नी की शैक्षणिक योग्यता पर उठे सवालों पर भी पहली बार खुलकर जवाब दिया. उन्होंने कहा, ”तेजस्वी जिनकी पत्नी की योग्यता पर सवाल उठा रहे हैं, पहले उनलोगों उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि की जांच कर लेनी चाहिए. उनकी योग्यता लालू परिवार के लोगों से कहीं बेहतर है.”
इसके साथ ही, संजय झा की दोनों बेटियों, अद्या झा और सत्या झा, को सुप्रीम कोर्ट में ग्रुप-ए पैनल काउंसल के रूप में नियुक्त किए जाने पर तेजस्वी के आरोपों का भी जवाब दिया. अशोक चौधरी ने कहा, “संजय झा की बेटियां हार्वर्ड से पढ़ी-लिखी हैं. उनकी योग्यता पर सवाल उठाने से पहले तेजस्वी को अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि देख लेनी चाहिए. ये लोग अनक्वालिफाइड नहीं हैं, बल्कि मेरिट के आधार पर चुनी गई हैं.”
बिहार की सियासत में परिवारवाद को लेकर एक बार फिर तीखी नोकझोंक शुरू हो गई है. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, और बिहार सरकार में मंत्रियों पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया. तेजस्वी ने नीतीश सरकार पर “जमाई आयोग” गठन का तंज कसते हुए रामविलास पासवान, जीतन राम मांझी, और अशोक चौधरी के दामादों को विभिन्न आयोगों में नियुक्ति देने का मुद्दा उठाया. इसके जवाब में नीतीश के करीबी और बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने तेजस्वी और लालू परिवार पर पलटवार करते हुए करारा हमला बोला.
बिहार की राजनीति में परिवारवाद और भाई-भतीजावाद का मुद्दा बेटी-दामाद तक पहुंच गया है. दरअसल बिहार में एक बार फिर परिवारवाद का मुद्दा चर्चा में है. इस बार केंद्र में बेटी-दामाद हैं. दरअसल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने जनता दल (यूनाइटेड) के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा पर निशाना साधा है. तेजस्वी ने संजय झा की दो बेटियों, अद्या झा और सत्या झा, को सुप्रीम कोर्ट में ग्रुप-ए पैनल काउंसल के रूप में नियुक्त किए जाने पर सवाल उठाए हैं.
तेजस्वी यादव ने परिवारवाद और विशेषाधिकार का “क्लासिकल उदाहरण” करार देते हुए दलित, पिछड़े और अति-पिछड़े वर्गों के अधिकारों को छीने जाने का आरोप लगाया है. तेजस्वी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखते हुए कहा कि संजय झा की दोनों बेटियों को बिना किसी विशेष कार्य अनुभव के सुप्रीम कोर्ट में ग्रुप-ए पैनल काउंसल बनाया गया है. उन्होंने सवाल उठाया, “जदयू के कितने दलित, पिछड़े और अति-पिछड़े नेताओं, सांसदों, मंत्रियों या कार्यकर्ताओं के बेटे-बेटियों को यह विशेषाधिकार प्राप्त है कि वे बिना अनुभव के ऐसी उपलब्धि हासिल कर लें?”
‘जमाई आयोग’ गठित करने की सलाह
तेजस्वी ने इसे मेरिट और प्रतिभा की अनदेखी का मामला बताते हुए कहा कि यह दलितों, पिछड़ों और अति-पिछड़ों के हक को छीनने की साजिश है. यह पहली बार नहीं है जब तेजस्वी ने जदयू और बिहार सरकार पर परिवारवाद को लेकर हमला बोला है. इससे पहले उन्होंने बिहार में “जमाई आयोग” के गठन का तंज कसते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था. तेजस्वी ने आरोप लगाया था कि नीतीश कुमार की कैबिनेट में 50% से अधिक मंत्री परिवारवादी हैं. उन्होंने स्वर्गीय रामविलास पासवान के दामाद, केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी के दामाद और बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी के दामाद को विभिन्न बोर्डों और आयोगों में नियुक्त किए जाने का जिक्र किया था. तेजस्वी ने इसे बिहार की जनता के साथ धोखा करार दिया और नीतीश कुमार से “जमाई आयोग” गठित करने की बात कही थी.
संजय झा की बेटियों की नियुक्ति पर विवाद
संजय झा, जो जदयू के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद हैं, की दोनों बेटियों की सुप्रीम कोर्ट में ग्रुप-ए पैनल काउंसल के रूप में नियुक्ति ने बिहार की सियासत में हलचल मचा दी है. तेजस्वी ने इस नियुक्ति को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बिहार के मिथिला क्षेत्र का भविष्य संवारने के बजाय निजी हितों को साधने का प्रयास है. उन्होंने संजय झा से पूछा, “यह कैसे हुआ? किस बात की डीलिंग हुई?” तेजस्वी का कहना है कि इस तरह की नियुक्तियां मेरिट और पारदर्शिता की अनदेखी करती हैं, जिससे समाज के वंचित वर्गों का हक छिनता है.
अशोक चौधरी का तेजस्वी और लालू परिवार पर पलटवार
नीतीश के करीबी और बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने तेजस्वी और लालू परिवार पर पलटवार करते हुए करारा हमला बोला.
अशोक चौधरी ने तेजस्वी के “जमाई आयोग” वाले बयान को खारिज करते हुए कहा कि लालू परिवार को परिवारवाद पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “लालू यादव ने अपने समय में ‘मामा आयोग’ और ‘साला आयोग’ क्यों नहीं बनाया?” चौधरी ने तेजस्वी पर निशाना साधते हुए कहा कि लालू के बेटे होने के नाते ही वे उपमुख्यमंत्री बने, न कि किसी योग्यता के आधार पर. उन्होंने अपने दामाद सायन बनर्जी की नियुक्ति पर उठे सवालों का जवाब देते हुए कहा, “मेरे दामाद को आयोग में जगह उनकी योग्यता और बीजेपी-आरएसएस के समर्थन के कारण मिली, न कि मेरे प्रभाव की वजह से. वे किशोर कुणाल के बेटे हैं, और उनकी अपनी पहचान है.”
DK बॉस वाले मुद्दे पर क्या कहा?
अशोक चौधरी ने डीके बॉस की पत्नी की शैक्षणिक योग्यता पर उठे सवालों पर भी पहली बार खुलकर जवाब दिया. उन्होंने कहा, ”तेजस्वी जिनकी पत्नी की योग्यता पर सवाल उठा रहे हैं, पहले उनलोगों उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि की जांच कर लेनी चाहिए. उनकी योग्यता लालू परिवार के लोगों से कहीं बेहतर है.”
इसके साथ ही, संजय झा की दोनों बेटियों, अद्या झा और सत्या झा, को सुप्रीम कोर्ट में ग्रुप-ए पैनल काउंसल के रूप में नियुक्त किए जाने पर तेजस्वी के आरोपों का भी जवाब दिया. अशोक चौधरी ने कहा, “संजय झा की बेटियां हार्वर्ड से पढ़ी-लिखी हैं. उनकी योग्यता पर सवाल उठाने से पहले तेजस्वी को अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि देख लेनी चाहिए. ये लोग अनक्वालिफाइड नहीं हैं, बल्कि मेरिट के आधार पर चुनी गई हैं.”