बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन और एनडीए ने अपनी-अपनी रणनीतियों को जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है, मगर इन रणनीतियों में एनडीए और गठबंधन के बीच बड़ा अंतर साफ दिखाई पड़ने लगे हैं. ये अंतर गृह मंत्री अमित शाह के बिहार दौरे और लोक सभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के दौरे में भी दिखाई पड़ते हैं. अमित शाह ने जहां अपनी यात्रा में पार्टी नेताओं की बैठक के साथ एनडीए दलों को भी साथ जोड़ने की कोशिश की, वहीं राहुल गांधी कांग्रेस के लिए मेहनत करते तो दिखे पर खुद को महागठबंधन के नेताओं और दलों से दूर ही रखा.
अमित शाह और राहुल गांधी के दौरे में अंतर- चुनावी साल में अमित शाह का बिहार का पहला दौरा था, जब दो दिनों के दौरे में एकसाथ कई मोर्चों पर काम करते हुए दिखाई पड़े. अमित शाह ने बीजेपी कार्यालय कार्यालय पहुंचकर जहां संगठन को मजबूत करने के लिए सभी सांसदों, विधायकों की बैठक की वही अगले छह महीने में पार्टी के गतिविधियों और रणनीतियों का टास्क भी दिया. अगले दिन अमित शाह ने लालू के गढ़ गोपालगंज में जनसभा कर चुनावी शंखनाद किया तो पटना पहुंचकर एनडीए के सभी नेताओं के साथ बैठक कर चुनाव की रणनीतियों पर चर्चा की और एनडीए दलों को मजबूती से एकजुट होकर चुनाव लड़ने का संदेश दिया. अमित शाह ने साफ-साफ कहा कि बीजेपी का हर कार्यकर्ता एनडीए का कार्यकर्ता है. जाहिर है यह बड़ी रणनीति है औरआगामी चुनाव को लेकर स्पष्ट मैसेजिंग भी.
वहीं, अगर राहुल गांधी की यात्रा की बात करें तो कांग्रेस नेता ने 7 अप्रैल को बिहार के बेगूसराय पहुंचकर पदयात्रा के जरिये युवाओं में जोश भरने का काम किया पर उस यात्रा में अन्य सहयोगी दलों का कोई नेता शामिल नहीं रहे. राहुल गांधी की बेगूसराय में हुई पदयात्रा में भी अन्य दलों का कोई चेहरा शामिल नहीं था. सदाकत आश्रम पहुंचकर कांग्रेस नेताओं के साथ मुलाकात की तो सही लेकिन कांग्रेस मुख्यालय में जब पार्टी के ही दो गुटों के नेताओं में भिड़ंत हो गई तो किरकिरी हो गई. जाहिर तौर पर आगामी चुनाव को लेकर कांग्रेस की अपनी चुनौतियां सामने आ गई. वहीं, राहुल गांधी की राजद नेता तेजस्वी यादव से मुलाकात की चर्चा तो हुई, लेकिन वह न तो तेजस्वी यादव से मिले और न ही महागठबंधन में शामिल अन्य दलों के नेताओं से ही मुलाकात की.जाहिर है यहां से जो संदेश निकलकर आना चाहिये था वह सामने नहीं आ पाया.
गठबंधन की अबतक नहीं हुई कोई बैठक
बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों की बात करे तो एनडीए और गठबंधन के बीच का अंतर चर्चे का विषय बना हुआ है. एनडीए की अगर बात करें तो कई महीने पहले से ही नया प्रयोग करते हुए सभी जिलों में एनडीए के बड़े नेताओं की एकसाथ सम्मेलन किया गया. हर जिले में हुए कार्यक्रम में एनडीए दलों के प्रदेश अध्यक्ष शामिल हुए और एकजुटता का परिचय दिया. अमित शाह ने अपने बिहार दौरे में सीएम नीतीश कुमार के साथ सभी एनडीए नेताओं के साथ बैठकर कार्यकर्ताओं तक मजबूत संदेश भेजा है. दूसरी तरफ गठबंधन का अब तक कोई बैठक नहीं हो पायी है. आरजेडी कांग्रेस माले सभी अपनी-अपनी अलग तैयारियों में लगे हैं और अभियान शुरू किया है, पर सभी एक मंच पर या एकसाथ बैठ नहीं पाए हैं.
राहुल गांधी पिछले तीन महीनों में तीन बार बिहार आ चुके हैं. पटना पहुंचकर कई कार्यक्रमों में शामिल हुए और पार्टी की मजबूती के लिए संदेश देते रहे हैं. पिछली बार के पटना आगमन पर राहुल गांधी की मुलाकात तेजस्वी यादव और लालू यादव से हुई थी पर उसके बाद दलों की एकजुटता नहीं देखी गई. पिछले दिनों पटना पहुंचे राहुल गांधी की मुलाकात तेजस्वी के साथ मानी जा रही थी, पर दोनों के बीच कोई मुलाकात नहीं हुई. राहुल गांधी के पटना आगमन से पहले कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने तेजस्वी से मुलाकात कर संदेश दिया था. गठबंधन दलों के नेताओं के बीच बैठक नहीं होने और दूरियों ने विपक्ष को सवाल खड़ा करने का मौका दे दिया है.







