अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद की शपथ लेने वाले हैं। शपथ ग्रहण से पहले ही देश के कई हिस्सों में उनके विरोध में प्रदर्शन हो गए हैं। शनिवार को हजारों लोगों ने अलग-अलग जगहों पर ट्रम्प के खिलाफ प्रदर्शन किया।
राजधानी वॉशिंगटन में कई NGO के एक ग्रुप ने ‘पीपुल्स मार्च’ बैनर के तले ट्रम्प की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारियों ने ट्रम्प के अलावा इलॉन मस्क और उनके करीबी सहयोगियों के खिलाफ पोस्टर और बैनर के जरिए विरोध जताया।
इससे पहले भी इस ग्रुप ने जनवरी 2017 में ट्रम्प के पहले शपथ ग्रहण पर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए थे।

शपथ ग्रहण के लिए वाशिंगटन पहुंचे ट्रम्प
डोनाल्ड ट्रम्प शपथ ग्रहण के लिए राजधानी वॉशिंगटन पहुंच चुके हैं। ट्रम्प ने शनिवार दोपहर फ्लोरिडा के वेस्ट पाम बीच से वायुसेना के सैन्य विमान सी-32 में सवार होकर उड़ान भरी। उनके साथ उनकी पत्नी मेलानिया और बेटे बैरेन ट्रम्प भी साथ थे।
इस फ्लाइट को स्पेशल एयर मिशन 47 नाम दिया गया था। मिशन 47 का मतलब है कि डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति होंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने ट्रम्प को ये विमान मुहैया कराया।
अमेरिका में आमतौर पर सत्ता से बाहर जा रहे राष्ट्रपति नए राष्ट्रपति के लिए ऐसा करते हैं। हालांकि 2021 में डोनाल्ड ट्रम्प ने बाइडेन के लिए ऐसा नहीं किया था। इस वजह से बाइडेन को निजी प्लेन से वॉशिंगटन आना पड़ा था।

शपथ ग्रहण के बाद 100 से ज्यादा आदेशों पर साइन करेंगे ट्रम्प
सोमवार को शपथ लेने के बाद ट्रम्प 100 से ज्यादा कार्यकारी आदेशों पर साइन करेंगे। उनकी टीम ने कार्यकाल शुरू होने से पहले इन आदेशों को तैयार कर लिया है। ओवल ऑफिस में ट्रम्प की टेबल पर इन्हें रखा जाएगा।
ट्रम्प के चुनावों वादों को पूरा करने के मकसद से इन आदेशों को तैयार किया गया है। एक इंटरव्यू के दौरान ट्रम्प ने कहा था कि वह पहले दिन रिकॉर्ड संख्या में आदेशों पर साइन करने की योजना बना रहे हैं।
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक इन आदेशों में मैक्सिको बॉर्डर को सील करना, अवैध प्रवासियों को देश से भेजना और महिलाओं के खेलों में ट्रांसजेंडर्स को शामिल होने से रोकने के आदेश शामिल हो सकते हैं।
कार्यकारी आदेश वह आदेश होते हैं जो राष्ट्रपति द्वारा एकतरफा जारी किए जाते हैं और जो कानून की शक्ति रखते हैं। इन्हें कांग्रेस की मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती। कांग्रेस इन्हें पलट नहीं सकती, लेकिन इन्हें अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
ट्रम्प की वापसी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। यूरोप, कनाडा और चीन जैसे देशों के बीच ट्रंप की नीतियों को लेकर असमंजस और चिंता का माहौल बना हुआ है।
वहीं, भारत और सऊदी अरब जैसे देशों में ट्रंप की जीत को सकारात्मक रूप में देखा जा रहा और उनके आने से लोगों में खुशी की लहर है। भारत के लिए उनकी नीतियां व्यापारिक दृष्टि से लाभकारी रही हैं, और इसके साथ ही सऊदी अरब जैसे देश ट्रंप की जीत से खुश नजर आ रहे हैं और रिश्ते को मजबूती से दिखा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय संबंधों में यूरोप और नाटो देशों की चिंताएं बढ़ी
डोनाल्ड ट्रंप के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को लेकर व्यापारिक दृष्टिकोण ने यूरोप और नाटो देशों में चिंता की लहर पैदा कर दी है। ट्रंप का रूस और चीन के प्रति मैत्रीपूर्ण रवैया पश्चिमी देशों की सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टि के लिए चिंता का कारण बन गया है। यूरोपीय काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (ECFR) और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक सर्वे के मुताबिक, यूरोप में ट्रंप के प्रति नकारात्मकता ज्यादा देखने को मिल रही है, जिससे उनकी विदेश नीति के बारे में सवाल उठ रहे हैं।
वहीं, भारत और सऊदी अरब जैसे देशों में ट्रंप को एक नए अवसर के रूप में देखा जा रहा है। इन देशों के लिए ट्रंप का विदेश नीति पर फोकस एक नया आर्थिक और व्यापारिक मार्ग खोलने की संभावना के रूप में देखा जा रहा है।
जीत से खुश हैं 82 फीसदी लोग
एक सर्वे के अनुसार, भारत में 82 फीसदी लोग डोनाल्ड ट्रंप की चुनावी जीत से खुश हैं। भारतीयों का मानना है कि ट्रंप की व्यावसायिक नीति से देश को अधिक आर्थिक फायदे हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप का प्रशासन भारत के लिए अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार और निवेश के नए अवसर खोल सकता है, जो पिछले प्रशासन की तुलना में ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।
ट्रंप का रवैया यूरोपीय देशों में चिंता का कारण बना
डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रवैये ने यूरोपीय देशों को परेशान कर दिया है। नाटो सहयोगियों के प्रति उनके कठोर दृष्टिकोण और रूस को ज्यादा छूट देने की धमकी से यूरोप में असुरक्षा का माहौल बन गया है। ट्रंप के सत्ता में वापस आने के बाद, यूरोपीय देशों में नकारात्मक प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ रहा है।
हालिया सर्वे के अनुसार, यूरोप में सिर्फ 28 प्रतिशत लोग ही ट्रंप की जीत से खुश हैं। वहीं, ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों में 50 प्रतिशत से ज्यादा लोग उनकी वापसी से नाराज हैं। इन देशों का मानना है कि ट्रंप का कड़ा रवैया और रूस के प्रति नरम रुख यूरोप की सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है।
ट्रंप के बयान से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मचा हड़कंप
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कुछ विवादास्पद बयान दिए हैं, जिनसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई है। उन्होंने ग्रीनलैंड को डेनमार्क से जोड़ने, कनाडा को अपने देश में शामिल करने और पनामा को अपने कब्जे में लेने की बात की है। इन बयानों ने वैश्विक समुदाय में चिंता और आशंका की लहर पैदा कर दी है, क्योंकि ये बयान किसी देश की संप्रभुता के उल्लंघन के रूप में देखे जा सकते हैं।
भारत में उम्मीदें, यूरोप में चिंताएं
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने से पहले दुनिया भर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। भारत जैसे देशों में जहां ट्रंप के व्यावसायिक दृष्टिकोण को लेकर सकारात्मक उम्मीदें जताई जा रही हैं, वहीं यूरोप और अन्य पश्चिमी देशों में उनके शासन के फिर से लौटने से असुरक्षा की भावना उत्पन्न हो रही है।
भारत में, व्यापारिक दृष्टिकोण से ट्रंप की नीतियों को लेकर उम्मीदें जताई जा रही हैं, खासकर उनके व्यापारिक समझौतों और आर्थिक विकास के पहलुओं को लेकर। वहीं, यूरोप और पश्चिमी देशों में उनके प्रशासन के दौरान उठाए गए कठोर कदमों को लेकर चिंता है, जो वैश्विक असंतुलन का कारण बन सकते हैं। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की नीतियां वैश्विक स्तर पर नए समीकरण बना सकती हैं, जिनका असर आने वाले समय में स्पष्ट रूप से दिखेगा।
जयशंकर समेत दिग्गज मेहमान शपथ के साक्षी बनेंगे
अमेरिका में भीषण ठंड व बर्फबारी के मद्देनजर 40 वर्षों में पहली बार शपथ ग्रहण समारोह को खुले स्थान के बजाय कैपिटल रोटुंडा में बंद जगह पर कराने का फैसला लिया गया है। शपथ ग्रहण समारोह से जुड़ी समिति ने बताया कि ट्रंप शपथ ग्रहण समारोह के लिए स्थानीय समयानुसार शनिवार को वाशिंगटन पहुंचेंगे। इस समारोह में भारत से विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर समेत कई विदेशी मेहमान शामिल होंगे। फिल्म, मनोरंजन और संगीत जगत के सितारों की महफिल भी सजेगी।

शपथ ग्रहण समारोह के लिए दर्जन भर से ज्यादा विदेशी नेताओं को आमंत्रित किया गया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। इटली की प्रधानमंत्री जियॉर्जिया मेलनी भी समारोह में शामिल होंगी।

समारोह में कंट्री म्यूजिक स्टार कैरी अंडरवुड, बिली रे साइरस व जेसन एल्डियन, डिस्को बैंड द विलेज पीपल, रैपर नेली व संगीतकार किड रॉक प्रस्तुतियां देंगे। अभिनेता जॉन वोइट व पहलवान हल्क होगन के भी शामिल होने की संभावना है। उद्योगपतियों में टेस्ला और एक्स के सीईओ एलोन मस्क, अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस, मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग व टिकटॉक के सीईओ शू जी च्यू मौजूद रहेंगे।

चुनाव के दौरान ट्रंप पर दो बार हुए जानलेवा हमलों के मद्देनजर शपथ समारोह में अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियां कोई मौका गंवाना नहीं चाहतीं। रातोंरात शहर के कोने-कोने में लोहे की दीवारें व बाड़ लगा दी गई हैं। 30 मील लंबी अस्थायी बाड़ लगाई गई है और करीब 25 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। शपथ ग्रहण समारोह को राष्ट्रीय विशेष सुरक्षा कार्यक्रम (एनएसएसई) माना जाता है। इसमें यूनाइटेड स्टेट्स सीक्रेट सर्विस के नेतृत्व में संघीय व स्थानीय एजेंसियां साथ काम करती हैं। समारोह से जुड़े सभी प्रमुख स्थलों को बंद कर दिया गया है।

ट्रंप पद संभालने के एक दिन बाद ही अमेरिका में देशव्यापी आव्रजन प्रवर्तन अभियान का आदेश दे सकते हैं। इसके लिए एजेंसियां तैयारी कर चुकी हैं। वाल स्ट्रीट जर्नल ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया है किअमेरिकी आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन विभाग ने इस अभियान को अंजाम देने के लिए 100-200 अधिकारियों को लगाया है। हफ्ते भर चलने वाले इस अभियान के बाद अवैध आव्रजन के आरोपियों को उनके देश वापस भेज दिया जाएगा। ट्रंप ने 2024 में कहा भी था कि वह आव्रजन को लेकर अभियान चलाएंगे और रिकॉर्ड संख्या में लोगों को वापस भेजेंगे।
डोनाल्ड ट्रंप का शपथग्रहण कितने बजे होगा, जानें क्या-क्या होगा खास
ट्रंप के औपचारिक शपथ ग्रहण समारोह में संगीत कार्यक्रम, उत्सव परेड सहित कई औपचारिक कार्यक्रम होंगे. वह संयुक्त राज्य अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे. आधिकारिक शपथ ग्रहण समारोह 20 जनवरी, 2025 को दोपहर 12 बजे (भारतीय समयनुसार रात के करीब 10:30 बजे) होगा. अमेरिका के चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ट्रंप को उनके दूसरे कार्यकाल के लिए पद की शपथ दिलाएंगे.
रविवार, 19 जनवरी का कार्यक्रम
- शपथ ग्रहण से पहले, ट्रंप रविवार को आर्लिंगटन नेशनल सेमेट्री में पुष्पांजलि अर्पित करेंगे.
- वाशिंगटन डीसी में कैपिटल वन एरिना में अपने समर्थकों के साथ एक मेगा रैली करेंगे.
- रैली के बाद कैंडल लाइट डिनर
शपथ ग्रहण समारोह का कार्यक्रम (20 जनवरी)
- सुबह 5 बजे: उपस्थित लोगों के लिए नेशनल मॉल में सुरक्षा जांच शुरू होगी.
- सुबह 9:30 बजे: कैपिटल के पश्चिमी लॉन में कैरी अंडरवुड की ओर से अमेरिका द ब्यूटीफुल गीत गाए जाने सहित लाइव प्रदर्शन होंगे.
- नव-निर्वाचित राष्ट्रपति और उनका परिवार व्हाइट हाउस के पास जॉन्स एपिस्कोपल चर्च में प्रार्थना में भाग लेगा.
- व्हाइट हाउस में बाइडेन और ट्रंप परिवार के लिए चाय का आयोजन किया जाएगा.
- इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप और व-निर्वाचित उपराष्ट्रपति माइक पेंस शपथ ग्रहण समारोह के लिए यूएस कैपिटल बिल्डिंग जाएंगे.
- दोपहर 12 बजे (भारतीय समयनुसार रात के करीब 10:30 बजे) चीफ जस्टिस आधिकारिक रूप से ट्रंप को शपथ दिलाएंगे.
- शपथ के बाद ट्रंप भाषण देंगे, जिसमें वे बताएंगे कि अगले चार साल के दौरान वह कैसा काम करने वाले हैं.
- राष्ट्रपति की परेड पेंसिल्वेनिया एवेन्यू से होते हुए व्हाइट हाउस तक जाएगी, जिसमें सैन्य रेजिमेंट, मार्चिंग बैंड और झांकियां शामिल होंगी.
कहां देखें शपथ ग्रहण समारोह
शपथ ग्रहण समारोह एक सार्वजनिक कार्यक्रम है, और वाशिंगटन डीसी में नेशनल मॉल में हजारों लोगों के इकट्ठा होने की उम्मीद है, ताकि वे बड़ी वीडियो स्क्रीन पर समारोह देख सकें. जो लोग वाशिंगटन नहीं आ सकते, उनके लिए इस कार्यक्रम का एबीसी, एनबीसी और सीएनएन जैसे प्रमुख समाचार चैनलों पर सीधा प्रसारण किया जाएगा. इसके अलावा अलग-अलग प्लेटफार्मों पर लाइव स्ट्रीमिंग भी उपलब्ध होगी.









