बिहार के पूर्व मंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक आलोक मेहता के कई ठिकानों पर देर रात से जारी छापेमारी ने सनसनीखेज खुलासा किया है। जांच एजेंसियों को छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण इनपुट और बैंक से जुड़े कागजात मिले हैं, जिनमें लोन घोटाले और फर्जी लोन निकासी के मामले सामने आए हैं। जांच के दौरान यह खुलासा हुआ है कि बैंक ने फर्जी पहचान पत्रों के जरिए निकासी की थी।
100 करोड़ से अधिक के बैंक घोटाला मामले में राज्य सरकार के पूर्व मंत्री व राजद विधायक आलोक मेहता पर ईडी ने शिकंजा कस दिया है। शुक्रवार को ईडी की अलग-अलग टीम ने राजद नेता के 19 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। पटना में आशियाना-दीघा रोड स्थित घर और सचिवालय-विधानसभा रोड स्थित सरकारी आवास के साथ सभी ठिकानों पर ईडी की टीम रात 1 बजे ही पहुंच गई थी।
गेट खुलने की आवाज और शोरगुल की आवाज से जब आसपास के लोग जगे, तो उन्हें ईडी छापे की जानकारी मिली। आशियाना-दीघा रोड स्थित निजी आवास पर पांच एसयूबी कारों से ईडी की टीम पहुंची थी। शुक्रवार की देर रात तक छापेमारी जारी थी। ईडी की टीम किसी को अंदर नहीं जाने दे रही थी। आलोक मेहता से बात करने की कोशिश की गई, पर बात नहीं हो सकी। पता चला कि छापेमारी के दौरान उन्हें किसी से बात करने की मनाही थी। आलोक मेहता पर बैंक लोन से जुड़े मामलों में गड़बड़ी करने का आरोप है। जून 2023 में पांच करोड़ के घोटाले का पता चला था। आरबीआई की रिपोर्ट के बाद हाजीपुर में तीन एफआईआर दर्ज हुई थी।
पूर्व मंत्री के भतीजे ने किया घोटाले में उनकी संलिप्तता का खुलासा
घोटाले के उजागर होने के इस बैंक के फर्जीवाड़े का शिकार हुए खाताधारकों ने जब वर्तमान चेयरमैन और पूर्व मंत्री के भतीजे संजीव को घेरा, तो उन्होंने इस पूरे मामले में उनकी संलिप्तता का खुलासा किया। इस मामले में वैशाली जिले के नगर थाना में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराई गई। बैंक के सीईओ और मैनेजर फरार हैं।
फर्जी लोन के सहारे बैंक से हजारों निवेशकों की रकम गायब हुई
आरबीआई से रजिस्टर्ड वैशाली शहरी विकास कोऑपरेटिव बैंक पर करीब 100 करोड़ का घोटाला करने का आरोप है। हजारों निवेशकों की जमा पूंजी करीब 100 करोड़ की रकम फर्जी लोन के सहारे गायब कर दी गई। जांच में पता चला कि लिच्छवी कोल्ड स्टोरेज प्राइवेट लिमिटेड और महुआ कोऑपरेटिव कोल्ड स्टोरेज नामक दो कंपनियों ने बैंक से लगभग 60 करोड़ रुपए का गबन किया है।
कोऑपरेटिव बैंक की स्थापना 35 साल पहले उनके पिता ने की थी
इस कोऑपरेटिव बैंक की स्थापना 35 साल पहले आलोक मेहता के पिता स्व. तुलसीदास मेहता ने की थी। 1995 से 2012 तक आलोक मेहता बैंक के चेयरमैन रहे। घोटाले की बात सामने आने के बाद आलोक मेहता ने बैंक प्रबंधन से खुद को अलग कर लिया, लेकिन बैंक का संचालन अब भी उनके भतीजे संजीव द्वारा किया जा रहा था।
दिलचस्प बात यह है कि आलोक मेहता का परिवार इन फर्जी लोन निकासी करने वाली कंपनियों से सीधे जुड़ा हुआ है। बता दें कि आलोक मेहता 1995 से 2012 तक एक प्रमुख बैंक के अध्यक्ष रह चुके हैं, और यह घोटाला उनके कार्यकाल में हुआ था। एजेंसी ने अब तक कई महत्वपूर्ण कागजात बरामद किए हैं, जिनमें से कुछ कागजात बैंक लोन और फर्जीवाड़े से संबंधित हैं। इस घोटाले की गहराई में जाकर अब एजेंसियां जांच की प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ा रही हैं। मामले के अंतर्गत कई करोड़ों रुपए के लेनदेन और फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। एजेंसियां अब यह साफ करने में जुटी हैं कि यह घोटाला कितने लोगों तक फैला हुआ था और इसमें कौन-कौन से बड़े नाम शामिल हो सकते हैं। पूरे मामले की जांच जारी है, और यह मामला जल्द ही बड़े खुलासे का संकेत दे रहा है। बता दें आलोक मेहता लालू यादव के करीबी सहयोगी है।
कल यानी 10 जनवरी को इनके घर पर छापेमारी हुई थी। पटना- हाजीपुर-9, कोलकाता-5, वाराणसी-4 व दिल्ली में 1 जगह छापा






