बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के दलों के बीच सीट बंटवारा तय हो गया है। सीटों का ऐलान आज दिल्ली में बीजेपी के केंद्रीय कार्यालय पर हुआ। बिहार के एनडीए गठबंधन में इस बार भारतीय जनता पार्टी, हिंदुस्तान आवाम मोर्चा, जनता दल (यू), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी दल शामिल हैं। 40 सीटों का बंटवारा इन्हीं पांच दलों के बीच में हुआ है। 40 सीटों में से 17 सीटों पर बीजेपी, जेडीयू 16, चिराग पासवान की पार्टी 5 सीटों पर, हिंदुस्तान आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी एक-एक सीट पर चुनाव लड़ेगी।
इस बार बिहार की पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, औरंगाबाद, मधुबनी, अररिया, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, महाराजंगज, सारण, उजियारपुर,बेगुसराय, नवादा, पटनासाहिब, पाटलिपुत्र, आरा, बक्सर और सासाराम लोकसभा सीट से बीजेपी अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारेगी। वहीं वैशाली, हाजीपुर, समस्तीपुर, खगड़िया और जमुई लोकसभा सीटों से चिराग पासवान की पार्टी चुनाव लड़ेगी। इसके अलावा उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी काराकाट सीट से और जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा को गया की सीट दी गई है। वहीं जेडीयू की बात करें तो पार्टी वाल्मीकि नगर, सीतामढी, झंझारपुर, सुपौल, किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया, मधेपुरा, गोपालगंज, सीवान, भागलपुर, बांका, मुंगेर, नालन्दा, जहानाबाद और शिवहर सीट से अपने उम्मीदवार उतारेगी।
पशुपति पारस और मुकेश सहनी एनडीए से बाहर
एनडीए के सीट बंटवारा ऐलान के बाद अब साफ़ हो गया है कि पशुपति पारस और मुकेश सहनी की पार्टियां एनडीए से बाहर हो गई हैं। बता दें कि पशुपति कुमार अभी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री भी हैं। पिछले दिनों चिराग पासवान ने जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद पशुपति ने कहा भी था कि उनके साथ न्याय नहीं किया जा रहा है और वह एनडीए से अलग भी हो सकते हैं। वहीं मुकेश सहनी की भी एनडीए से बात नहीं बनी और वह भी इस गठबंधन से बाहर हो गए हैं।
चिराग ने विधानसभा चुनाव में बिगाड़ा था नीतीश का खेल
रामविलास पासवान के निधन के बाद राज्य में 2020 में हुए विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान ने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया था. इस चुनाव में उन्होंने खुलकर नीतीश कुमार के खिलाफ हमला बोला. इतना ही नहीं उन्होंने एनडीए में नीतीश के खाते में गई सीटों पर अपनी पार्टी के उम्मीदवार उतारे. चिराग ने 5 सीटों पर बीजेपी के खिलाफ भी उम्मीदवार उतारे थे. भले ही इस चुनाव में उनकी पार्टी को एक सीट पर जीत मिली हो, लेकिन उन्होंने करीब 75 सीटों पर नीतीश की पार्टी को नुकसान पहुंचाया. इस चुनाव में लोजपा को 5.7 फीसदी वोट मिला. इस चुनाव में बिहार की 89 सीटें ऐसी थीं, जहां लोजपा को 10 हजार से ज्यादा वोट मिले और जदयू को नुकसान पहुंचा. इसका नतीजा ये हुआ कि नीतीश की पार्टी को सिर्फ 43 सीटें मिलीं.
क्या बगावत करेंगे पशुपति पारस?
सूत्रों की मानें तो बीजेपी ने पशुपति पारस को भी मनाने की कोशिश की है. उन्हें राज्यपाल का ऑफर दिया गया है. इसके अलावा प्रिंस राज को बिहार सरकार में मंत्री बनाने का वादा किया गया है. लेकिन पशुपति पारस इस ऑफर पर खुश नहीं हैं. वे खुले तौर पर नाराजगी जता चुके हैं.
हाल ही में पशुपति पारस ने बगावती तेवर दिखाते हुए कहा था, मैं पीएम मोदी का बहुत सम्मान करता हूं. हम 2014 से बहुत ईमानदारी से एनडीए का साथ देते आ रहे हैं. लेकिन हमारे साथ अन्याय हुआ है.
उन्होंने कहा, हमें लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं दी गई. उन्होंने बीजेपी से लिस्ट पर दोबारा विचार करने की मांग की थी. इतना नहीं उन्होंने कहा था कि हमारे सामने विकल्प खुला था. पशुपति पारस ने कहा था, मैं बीजेपी की लिस्ट के बाद फैसला लूंगा. लेकिन इतना तय है कि हाजीपुर लोकसभा सीट से चुनाव जरूर लड़ूंगा. उन्होंने कहा था, हमारे तीन और सांसद अपनी अपनी सीटों से चुनाव में उतरेंगे.
क्या इंडिया गठबंधन में जाएंगे पशुपति पारस?
पशुपति पारस विकल्प खुले रहने की बात कहकर ये संकेत दे चुके हैं कि वे इंडिया गठबंधन में जा सकते हैं. उधर, आरजेडी के नेतृत्व वाला महागठबंधन ने भी पशुपति पारस के खिए दरवाजे खोल रखे हैं. इसके पीछे बिहार में पासवान वोट बड़ी वजह है. जातिगत जनगणना के मुताबिक, बिहार में यादवों के बाद पासवान दूसरा सबसे बड़ा समुदाय है. राज्य की कुल आबादी यानी 13 करोड़ में 5.3 प्रतिशत पासवान हैं.
क्या हाजीपुर में होगा चाचा VS भतीजा?
एनडीए में सीट बंटवारे के ऐलान के बाद चिराग पासवान ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा, मैं बीजेपी को धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने हमारी पार्टी का सम्मान दिया और हमें उचित स्थान दिया. गठबंधन में उचित स्थान मिला. मैं नीतीश कुमार को भी धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने भी गठबंधन धर्म निभाया है. मैं हाजीपुर से चुनाव लडूंगा. हमने भी गठबंधन में अपनी एक सीट छोड़ी है कहीं न कहीं सभी को गठबंधन में कुछ ना कुछ बलिदान देना पड़ता है. मैं हर चुनौती के लिए तैयार हूं मेरे सामने कोई भी चुनौती आती है, उसका शक्ति से सामना करूंगा.







