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क्या पाठक से भिड़कर गलती कर बैठे चंद्रशेखर?

UB India News by UB India News
July 6, 2023
in खास खबर, पटना, बिहार, ब्लॉग
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क्या पाठक से भिड़कर गलती कर बैठे  चंद्रशेखर?
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बिहार में महागठबंधन की सरकार में मंत्री और अधिकारी की टकराहट की मिसाल कायम होने लगे हैं। अभी तो किस्सा शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर बनाम शिक्षा विभाग के अधिकारी केके पाठक बीच कोहराम मचा रहा है। इसके पहले मंत्री और अधिकारी की टकराहट की गूंज के शिकार तत्कालीन कृषि मंत्री सुधाकर सिंह और तत्कालीन मंत्री डॉ. संतोष सुमन भी हुए थे। इन सब समय में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का मौन ही हावी रहा।

हंगामा है क्यों बरपा!
क्या हुआ कि शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर बनाम शिक्षा सचिव केके पाठक के बीच कि तलवारें जेडीयू और आरजेडी के बीच तन गई। दरअसल, शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक ने जिम्मेदारी संभालते ही विभाग और जिला शिक्षा कार्यालयों पर नकेल कसनी शुरू कर दी। अब खबर यह है कि अपर मुख्य सचिव की कार्यशैली से बिहार के शिक्षा मंत्री डॉ. चंद्रशेखर से नाखुश हैं।

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उन्होंने अपर मुख्य सचिव और निदेशक स्तर के पदाधिकारियों को पीत पत्र भेजकर कार्यशैली पर सवाल उठाया है। मंत्री ने नाराजगी जताते हुए पत्र लिखा है कि ऐसा देखा जा रहा है कि कई मामलों में सरकार की कार्य संहिता के हिसाब से काम नहीं कराए जा रहे। राजपत्रित अधिकारी को भी उनके पद के अनुरूप काम नहीं दिए जा रहे हैं। विभाग के ऐसे कई अधिकारी हैं, जिनसे उनके पद से नीचे के स्तर के काम लिए जा रहे हैं। इतना भर ही नहीं शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने केके पाठक को ‘नायक’ फिल्‍म के हीरो या रॉबिनहुड वाली छवि नहीं बनाने की नसीहत तक दे डाली।

आरोप तो यह भी लगा डाला कि पिछले कई दिनों से यह महसूस किया जा रहा है कि शिक्षा विभाग मीडिया में नकारात्मक खबरों से अधिक चर्चा में बना हुआ है। कोई भी विभागीय सूचना का पत्र पहले अख़बार के पास पहुंचता है।

मंत्री पर भारी अधिकारी
शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक ने अब विभाग के अंदर शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर के लिए काम करना मुश्किल कर दिया। वो जिस निजी सचिव से पीत पत्र लिखवाये थे,अपर मुख्य सचिव केके पाठक ने भी एक आदेश निकालकर शिक्षा मंत्री के उस निजी सचिव के विभाग में प्रवेश पर रोक लगा दी है। साथ ही निदेशक सुबोध कुमार चौधरी की ओर से एक पत्र भी जारी कराया गया है, जिसमें कहा गया है कि विभागीय मंत्री के आप्त सचिव(बाह्य) कृष्णा नंद यादव की ओर से प्रेषित पत्र/पीत पत्र या अन्य कोई भी पत्र रिसीव नहीं करना है।

इस मामले में आरजेडी और जेडीयू के बीच बढ़ी खटास
शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर और केके पाठक के मुद्दे पर आरजेडी और जेडीयू आमने सामने हो गये। जेडीयू कोटे से नीतीश सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने केके पाठक के पक्ष में कहा है कि वह नियम-कानून से चलने वाले ईमानदार अधिकारी हैं। कड़क अधिकारी हैं। इस राज्य में जो भी अधिकारी हैं कानून के हिसाब से काम करते हैं। मिनिस्टर अगर कानून को तोड़ेंगे तो मिनिस्टर भी नप सकते हैं तो अधिकारी क्या है।

आरजेडी के विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा है कि केके पाठक शिक्षा मंत्री की फजीहत कराते हैं। मनमर्जी का काम करते हैं। मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार को उन्हें बाहर निकाल देना चाहिए। वह जानबूझ कर विभाग को बदनाम कर रहे हैं।

पूर्व कृषि मंत्री बनाम कृषि विभाग
शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर बनाम अपर मुख्य सचिव केके पाठक के बीच तकरार की यह कोई पहली घटना नहीं है। इसके पूर्व भी कृषि मंत्री सुधाकर सिंह को अधिकारियों से लगातार अनबन बनी रही। तब सुधाकर सिंह ने कहा था कि अधिकारी चोर और मैं चोरों का सरदार। यहां तक कि राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट कृषि रोड मैप को भी नकारा। साफ आरोप लगाया कि कृषि रोड मैप के नाम पर भारी घपला घोटाला किया है।

लघु सिंचाई मंत्री की भी अधिकारी नहीं सुनते
तत्कालीन लघु सिंचाई मंत्री और एससी एसटी मंत्री डॉ. संतोष सुमन ने भी यही शिकायत थी कि अधिकारी लोग नहीं सुनते। खुद जीतनराम मांझी अपने विधायकों को साथ लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास ले गए। लेकिन जब कोई एेक्शन नहीं लिया गया तो महागठबंधन छोड़ना पड़ा। और आज मंत्री पद छोड़ कर बीजेपी ज्वाइन करना पड़ा।

बहरहाल, मंत्री बनाम अधिकारी की लड़ाई का हश्र अब तक तो आरजेडी और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा झेलता आया है। तत्कालीन कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने कृषि विभाग के पदाधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोला तो मंत्री पद से हाथ धोना पड़ा। हम पार्टी भी जीतनराम मांझी के नेतृत्व में जब यह कहने गए कि अधिकारी हम विधायकों की तो मंत्री नहीं सुनते डॉ. सुमन की भी नहीं सुनते। एक अन्ने मार्ग में अधिकारियों के विरुद्ध शिकायत का हश्र क्या हुआ डॉ. संतोष सुमन को भी मंत्री पद छोड़ना पड़ा। साथ ही महागठबंधन से भी नाता तोड़ना पड़ा। अब इस लड़ाई का हश्र क्या होता है? राजनीतिक गलियारा में यह यक्ष प्रश्न तैर रहा है।

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