उत्तर भारत सहित कई राज्यों में इन दिनों जमकर बारिश हो रही है. बारिश का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. ऐसे में इस साल का पहला चक्रवात के आने की संभावना जताई गई है. आईएमडी को इसके संकेत मिल चुके हैं, जिसको लेकर अलर्ट भी जारी कर दिया गया है. भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने इसे लेकर एक प्रेस वार्ता भी किया. मौसम प्रणाली के 8 मई को कम दबाव के क्षेत्र में केंद्रित होने और 9 मई को चक्रवात में बदलने की आशंका है. प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा कि बंगाल की मध्य खाड़ी की तरफ बढ़ने का अनुमान है.
बुधवार को मौसम विभाग के कार्यालय ने जानकारी देते हुए बताया कि दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में चक्रवात के शुरुआती संकेतों का पता चला है. इसके चलते मछुआरों और नाव चलाने वाल लोगों को इस क्षेत्र में न जाने की चेतावनी दी गई है. आईएमडी प्रमुख ने कहा कि चक्रवात की स्थिति में इस क्षेत्र में 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना है. महापात्रा ने कहा कि चक्रवात का नाम मोचा रखने का सुझाव यमन ने दिया है.
यह इस साल 2023 का पहला चक्रवात होगा। जिसको लेकर 7 से 11 मई तक पश्चिम बंगाल और ओडिशा में अलर्ट जारी किया गया है। साल के पहले साइक्लोन मोचा को लेकर आईएमडी (India Meteorological Department) ने भी चेतावनी जारी की है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मोचा चक्रवात के तूफान में बदलने के काफी ज्यादा आसार हैं। आईएमडी डीजी मृत्युंजय महापात्रा ने ‘मोचा’ चक्रवात को लेकर जानकारी साझा की है। जिसके मुताबिक 6 मई के करीब दक्षिण पूर्व बंगाल की खाड़ी के ऊपर चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र विकसित हो सकता है। जिसके चलते अगल दिन यानी कि 7 मई के करीब उसी क्षेत्र में एक कम दबाव वाला क्षेत्र बन सकता है। वहीं इन सब के बीच बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक दबाव केंद्रित होने की आशंका है। इसके बाद खाड़ी के मध्य की ओर उत्तर दिशा की ओर बढ़ते हुए 9 मई को चक्रवाती के तूफान में बदलने की संभावना है।
चक्रवात का नाम क्यों है मोचा?
अब यह समझ लेते हैं कि आखिर क्यों चक्रवात का नाम मोचा पड़ा? दरअसल विश्व मौसम विज्ञान संगठन के जरिए चक्रवात के नामकरण की प्रणाली को अपनाया जाता है। जिसमें कि संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCAP) के सदस्य देशों का दखल होता है। चक्रवात के नाम को लेकर यमन ने इसका सुझाव दिया था। लालसागर तट पर एक बंदरगाह शहर ‘मोचा’ का नाम सुझाया गया था। जिसके चलते इस पर मुहर लगाने के बाद चक्रवात का नाम मोचा रखा गया।
बांग्ला देश और म्यामांर तक ‘मोचा’ का असर
मौसम वैज्ञानिकों के लगाए जा रहे अनुमान के मुताबिक चक्रवात मोचा का असर पूर्वी भारत से शुरू होकर बांग्लादेश और म्यामांर तक जा सकता है। मई के पहले हफ्ते के आखिरी तक दक्षिण बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक कम दबाव वाला क्षेत्र बन सकता है। अगर ऐसा होता है तो इस बात के आसार ज्यादा बढ़ जाएंगे कि यह तूफान का रूप ले ले।







