पहले ही अनुमान लगाया जा रहा था कि जाड़े़ के मौसम में यूक्रेन का संकट और बढ़ेगा। पिछले महीने ब्रिटेन की पत्रिका ‘इकोनॉमिस्ट’ ने जाड़े़ के मौसम में यूक्रेन‚ रूस सहित यूरोपीय देशों में मानवीय त्रासदी का अनुमान लगाया था। अब युद्ध क्षेत्र में तापमान जमाव बिंदु से काफी नीचे आ गया है। दोनों युद्धरत देश अपने सैनिकों को भीषण जाड़े़ से बचाने के लिए आवश्यक गरम कपड़़ों का प्रबंध करने के लिए जूझ रहे हैं। इसलिए भारत की सलाह पर अमल करते हुए यूक्रेन और रूस यदि कूटनीति और वार्ता का सहारा लें तो युद्धविराम और शांति की पहल हो सकती है। लेकिन दोनों पक्ष की ओर से इस तरह के संकेत नहीं हैं। एक बार फिर अमेरिका के बाइडे़न प्रशासन ने करोड़़ों ड़ॉलर के हथियार यूक्रेन को देने की घोषणा की है। यूक्रेनी राष्ट्रपति ब्लोदोमिर जेलेंस्की ने उम्मीद जताई कि अमेरिका आगे भी मदद देता रहेगा। अमेरिका की धरती पर जेलेंस्की के पांव रखने के पहले ही अमेरिका ने यूक्रेन को १.८५ अरब ड़ॉलर की सैन्य सहायता की घोषणा की। दूसरी ओर‚ रूस ने चेतावनी दी है कि यूक्रेन को अमेरिकी सैन्य मदद से संघर्ष और तीव्र होगा। इस बीच पुतिन ने अपने रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगू को देश के सैन्यकर्मियों की संख्या १० लाख से बढ़ाकर १५ लाख करने का निर्देश दिया है। पुतिन ने स्वीकार किया है कि यूक्रेन के रूस अधिकृत क्षेत्रों की स्थिति कठिन है। वास्तव में यूक्रेन संघर्ष से रूस की अर्थव्यवस्था चरमराने लगी है। कठोर प्रतिबंधों के कारण वह विश्व बिरादरी में अलग–थलग पड़़ता जा रहा है। शायद यही वजह है कि बृहस्पतिवार को पुतिन ने मीडि़या को संबोधित करते हुए कहा कि रूस युद्ध का अंत चाहता है और इसमें अनिवार्य रूप से एक कूटनीतिक समाधान शामिल होगा। पुतिन के रूख में यदि बदलाव आया है तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए। पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन युद्ध के शुरू होने के बाद पुतिन से पांचवीं बार टेलीफोन पर वार्ता की थी। मोदी निश्चित तौर पर मध्यस्थ की भूमिका का निर्वाह कर सकते हैं क्योंकि रूस और यूक्रेन दोनों का नेतृत्व मोदी पर भरोसा करता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि पुतिन और जेलेंस्की वार्ता की मेज पर आएंगे और समस्याओं का निराकरण होगा।
भारत के मंदिरों को चलाने में सरकार की क्या है भूमिका?
अयोध्या में भव्य राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही यहां देश और दुनिया से...







