JDU की राष्ट्रीय परिषद की बैठक शुरू हो गई है. नीतीश कुमार, ललन सिंह सहित JDU के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के तमाम सदस्य इस बैठक में मौजूद हैं. बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जाएंगे साथ ही नीतीश कुमार की राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका पर भी मुहर लगेगी. बैठक के बाद से ही JDU की सदस्यता अभियान की शुरुआत भी हो जाएगी और संगठन चुनाव की प्रकिया भी शुरू हो जाएगी लेकिन बैठक में सभी की निगाहें नीतीश कुमार की भूमिका को लेकर है.
आने वाले लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार की क्या भूमिका होने वाली है और राष्ट्रीय परिषद में क्या कुछ होने वाला है, इसकी तस्वीर बैठक में शामिल हो रहे नेताओं के बयान से ही मिलने लगा है.
बिहार सरकार की मंत्री लेसी सिंह ने नीतीश कुमार को जेपी की संज्ञा देते हुए कहा इस बार 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की करारी हार होगी. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कड़ी टक्कर देंगे. साथ ही उन्होंने कहा कि इस बार बिहार से जो शंखनाद होगा वह पूरे देश में एक बड़ा संदेश जाएगा. 2024 का आगाज हो चुका है.
जेडीयू संसदीय बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने सीएम नीतीश कुमार के 50 सीटों पर बीजेपी के रोकने के फार्मूले को बताते हुए कहा कि सभी विपक्षी एकता अगर एक साथ एक मंच पर आएगी तो सब कुछ संभव है. हम सभी की सबसे पहली प्राथमिकता देश से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता से बेदखल करना है. प्रधानमंत्री पद को लेकर कोई अभी इस पर चर्चा नहीं हुई है.
नीतीश कुमार के राष्ट्रीय राजनीति में जाने पर और तेजस्वी यादव को बिहार की कमान देने के सवाल पर उपेंद्र कुशवाहा ने सवाल टालते हुए कहा कि नीतीश कुमार बिहार के सीएम के साथ-साथ पूरे देश की विपक्षी एकता को मजबूत करने का काम करेंगे. इससे बिहार का विकास नहीं प्रभावित होगा. बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि 2024 में केंद्र की सरकार का जाना है तय है. सीएम नीतीश कुमार में सत्ता बदलने का दम है और केंद्र की सत्ता इस बार पूरी तरह से बदलेगी.
50 सीटों पर सिमट जायेगी भाजपा
जदयू के प्रदेश कार्यालय में शनिवार को शुरू पार्टी की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विरोधी दल के खिलाफ जमकर आग उगली। उन्होंने कहा कि सभी विपक्षी दल यदि एक साथ हो गये‚ तो वर्ष २०२४ के लोकसभा चुनाव में वे मिलकर भाजपा को सबक सिखा देंगे। मैं इसी अभियान में लगा हुआ हूं। वर्ष २०२४ के लोकसभा चुनाव में भाजपा ५० सीटों पर सिमट कर रह जायेगी।
बैठक में मुख्यमंत्री ने पार्टी के नेताओं और पदाधिकारियों से आपसी मतभेद भूलकर वर्ष २०२४ के लोकसभा चुनाव की तैयारी में अभी से जुट जाने की अपील की। उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग प्रदेश में सांप्रदायिक एवं सामाजिक सौहार्द को बिगाडने का कार्य करेंगे। हम सभी को पंचायत स्तर तक पूरी सावधानी बरतनी है। उन्होंने कहा कि मैं देशभर में विपक्ष को एकजुट करूंगा। इसके लिए मैं पांच सितम्बर को दिल्ली जाउंगा और विभिन्न दलों के नेताओं से मुलाकात करूंगा। उन्होंने कहा कि पहले से भी इस मुद्े पर हमारी बात विभिन्न दलों के नेताओं से हो रही है। उन्होंने कहा कि एकसाथ होने पर पूरा विपक्ष मिलकर २०२४ लोकसभा चुनाव में भाजपा को सबक सिखा देगा। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि अगले लोकसभा चुनाव में विपक्ष को जनता का पूरा समर्थन मिलेगा और चुनाव परिणाम भाजपा के खिलाफ होगा। मणिपुर में जदयू के पांच विधायकों को सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल किये जाने की घटना पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा‚ ‘आप सोच लीजिये क्या हो रहा है। अन्य पार्टियों के लोगों को अपनी तरफ लाना और खींचना क्या ये संवैधानिक हैॽ’ ये किस तरह से किसी पार्टी के निर्वाचित लोगों को अपनी तरफ ले रहे हैंॽ उन्होंने कहा कि जब हमलोग राजग में साथ थे‚ तो क्या किसी (भाजपा विधायक) को अपने दल में शामिल कियाॽ यह कौन सा स्वभाव हैॽ यह किस प्रकार का काम हैॽ इस तरह की कोई चीज क्या पहले से चलती रही हैॽ एक नये ढंग का इस तरह का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मणिपुर में हमारी पार्टी के छह विधायक पिछले दिनों यहां आये थे। भाजपा से अलग होने के निर्णय पर इनलोगों ने खुशी जाहिर की थी और कहा था कि हमलोग साथ हैं। सभी छह विधायकों ने गुरुवार को सूचित किया था कि वे जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भाग लेने के लिए पटना पहुंच रहे हैं‚ लेकिन उनको पकड़़कर भाजपा वालों ने अपने खेमे में शामिल कर लिया। उन्होंने कहा कि इससे क्या फर्क पड़़ता है‚ लेकिन एक बात तो साबित हो रही है कि ये किस तरह का काम कर रहे हैं। दूसरी पार्टी के लोगों को अपने दल में शामिल कराना क्या संवैधानिक है। क्या यह कोई सही काम है। उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र को खत्म किया जा रहा है। बैठक के दौरान पार्टी के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री उम्मीदवार के रूप में आगे आने की भी अपील की और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से अलग होकर महागठबंधन सरकार बनाने के निर्णय को अच्छा कदम बताया। पार्टी के पदाधिकारियों ने कहा कि राजग से अलग होने के फैसले के कारण २०२४ के लोकसभा चुनावों में भाजपा का मुकाबला करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों में एक नई ताकत का संचार हुआ है। विपक्ष के सभी दल नये जोश के साथ भाजपा का मुकाबला करने के लिए तैयार हो रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस कार्य में आगे आना चाहिए। पूरा देश इसका इंतजार कर रहा है।
मणिपुर में वही काम हुआ‚ जो दिल्ली‚ झारखंड़‚ मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में हुआ
मणिपुर में अपने अधिकांश विधायकों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के एक दिन बाद जदयू ने शनिवार को अपने पूर्व सहयोगी पर निशाना साधा और अन्य दलों के विधायकों को फंसाने के लिए ‘धन–बल’ का उपयोग करने का आरोप लगाया। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा ने मणिपुर में वही किया‚ जो उसने पहले दिल्ली‚ झारखंड़‚ मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में किया था।’ उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा‚ ‘अरुणाचल प्रदेश में हमने सात सीटें और मणिपुर में छह सीटें जीती थीं और दोनों राज्यों में हमने सीधे भाजपा को हराकर चुनाव जीता था। २०२० में अरुणाचल प्रदेश में भी यही किया गया‚ जबकि तब हम राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का हिस्सा थे। गठबंधन धर्म‚ नैतिकता का पाठ पढाने वाले भाजपा के लोगों ने बाद में सात में छह विधायकों को तोड़़ लिया और एक को हाल में अपने दल में मिला लिया है‚ लेकिन मणिपुर में जो कुछ भी हुआ‚ वहां धन–बल का प्रयोग किया गया है।’ ॥ ॥ लगभग चार दशकों से नीतीश कुमार के साथ जुड़़े ललन ने कहा‚‘भाजपा चाहे जो भी चाल चले‚ वह २०२३ तक जदयू को राष्ट्रीय पार्टी बनने से नहीं रोक पायेगी।’ उन्होंने कहा‚‘भाजपा को अपने बारे में चिंता करनी चाहिए। २०१५ के बिहार विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा और किसी ने ४२ रैलियों को संबोधित नहीं किया‚ लेकिन पार्टी २४३ सदस्यीय विधानसभा में ५३ सीटें ही जीत सकी थी। उन्हें २०२४ में अपने भाग्य के बारे में सोचना चाहिए। पूरा विपक्ष उनके खिलाफ एकजुट होगा।’
मोदी के हालिया आरोप कि विपक्षी दल भ्रष्ट लोगों की रक्षा के लिए जुटे हुए हैं‚ इसका जिक्र करते हुए जदयू प्रमुख ने कटाक्ष किया‚‘भाजपा अन्य दलों के साथ जो कर रही है वह सदाचार है‚ लेकिन धन–बल के उसके खुले इस्तेमाल के खिलाफ एक संयुक्त लड़़ाई भ्रष्टाचार है। प्रधानमंत्री ने इसे फिर से परिभाषित किया है।’ उन्होंने बिहार भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी की उस टिप्पणी की भी आलोचना की जिसमें सुशील मोदी ने कहा था कि अरुणाचल और मणिपुर के बाद बिहार जहां पार्टी को अपने बड़़े सहयोगी लालू प्रसाद की पार्टी राजद द्वारा विभाजित किया जा सकता है‚ के ‘जदयू मुक्त’ बनने की बारी है। पूर्व उपमुख्यमंत्री की इस टिप्पणी पर तीखा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा‚‘सुशील मोदी को अपने केंद्रीय नेतृत्व का दिवास्वप्न बेचने दें। इससे उन्हें राजनीतिक वनवास से बाहर आने में मदद मिल सकती है।’







