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विराट रामायण मंदिर’ में स्थापित किये जाने वाले सहस्र लिंगम’ को तराशने का काम शुरू

UB India News by UB India News
May 16, 2022
in Lokshbha2024, अध्यात्म, खास खबर, पूर्वी चंपारण
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विराट रामायण मंदिर’ में स्थापित किये जाने वाले सहस्र लिंगम’ को तराशने का काम शुरू
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बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में बन रहे विश्व के सबसे बड़े ‘विराट रामायण मंदिर’ में स्थापित किये जाने वाले १००८ शिवलिंगों को समाहित करता हुआ २०० टन के ‘सहस्र लिंगम’ को तराशने का काम तमिलनाडु के महाबलीपुरम में शुरू हो गया है। महावीर स्थान ट्रस्ट के सचिव किशोर कुणाल ने रविवार को बताया कि अयोध्या और जनकपुर के बीच बन रहे फोरलेन ‘राम–जानकी पथ’ पर स्थित पूर्वी चंपारण जिले में बन रहे विश्व के सबसे बड़े विराट रामायण मंदिर में स्थापित किये जाने वाले २०० टन के सहस्र लिंगम को तराश कर बनाने का काम तमिलनाडु के महाबलीपुरम में शुरू हो गया है। उन्होंने बताया कि अगले छह माह में यह सहस्र लिंगम बनकर तैयार हो जायेगा। श्री कुणाल ने बताया कि इसके बाद सहस्र लिंगम को एक विशेष ट्रक के जरिये महाबलीपुरम से पूर्वी चंपारण लाया जायेगा। इसमें करीब पांच माह का वक्त लग सकता है। उन्होंने इसमें लगने वाले वक्त के संबंध में बताया कि सहस्र लिंगम को लेकर आने वाले ट्रक की रफ्तार पांच किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक नहीं हो सकती है। इसके साथ ही सड़क मार्ग पर यातायात का भी ख्याल रखा जाना है।

महावीर स्थान ट्रस्ट कमेटी के सचिव ने बताया कि सहस्र लिंगम की ऊंचाई ३३ फुट और गोलाई भी ३३ फुट ही होगी। यह काले ग्रेनाइट पत्थर से बना होगा और इसके लिए पत्थर भी तमिलनाडु के तिरूनेल्वेली जिला के कुम्बीकुलम से लिया गया है। उन्होंने बताया कि देश में सहस्र लिंगम शिवलिंग बहुत कम है। सहस्र लिंगम का निर्माण ८०० ईसवी के बाद से बंद हो गया था। तमिलनाडु के तंजौर में वृहदेश्वर मंदिर में चोल राजाओं ने सहस्र लिंगम स्थापित किया था। इसके अलावा बिहार में गया जिले में भी कुछ मंदिरों में सहस्र लिंगम स्थापित हैं।

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श्री कुणाल ने बताया कि सहस्र लिंगम में श्रद्धालु गंगा और सरयू नदी के संगम (सारण जिले के छपरा में गुलटेनगंज) से पवित्र जल लेकर जलाभिषेक करेंगे। रामायण के अनुसार‚ यह वही स्थल है‚ जहां महर्षि विश्वामित्र के साथ अयोध्या से जनकपुर जाने के दौरान भगवान राम और लक्ष्मण ने रात्रि विश्राम किया था। भगवान राम का जनकपुर जाने के दौरान यह दूसरा पड़ाव था। उनका पहला पड़ाव उत्तर प्रदेश में सरयू नदी के तट पर बायीं ओर था‚ जो अब आजमगढ जिले का मुजफ्फरनगर है। इसी स्थल पर भैरव मंदिर बना हुआ है।महावीर स्थान ट्रस्ट के सचिव ने बताया कि सारण जिले के छपरा में गुलटेनगंज स्थित गंगा और सरयू नदी के संगम से विराट रामायण मंदिर की दूरी करीब ७२ किलोमीटर है और इसे राज्य सरकार ने कांवरिया पथ के रूप में विकसित करने की सहमति दी है। उन्होंने बताया कि श्रद्धालु सहस्र लिंगम पर आसानी से जलाभिषेक कर सकें‚ इसके लिए दो ओर से सीढी‚ एसकेलेटर और एक ओर से लिफ्ट भी लगाया जायेगा।

श्री कुणाल ने बताया कि २७० फुट ऊंचाई‚ १०८० फुट लंबाई‚ ५४० फुट चौड़ाई और १०८ एकड़ क्षेत्रफल वाला विराट राम मंदिर बन जाने के बाद यह दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर होगा। उन्होंने बताया कि मुख्य मंदिर‚ जिसकी ऊंचाई २७० फुट है‚ उसमें बीच में सहस्र लिंगम होगा‚ जिसकी भगवान राम पूजा कर रहे हैं। उनकी बगल में ही छोटे भाई लक्ष्मण खड़े हैं और भक्त हनुमान भगवान राम को पूजन सामग्री दे रहे हैं। भगवान राम जहां पूजा कर रहे हैं‚ उससे करीब १३५ फुट की दूरी पर उनकी नजर के सामने अशोक वाटिका में माता सीता बैठी हुई हैं। ट्रस्ट के सचिव ने बताया कि इसमें मंदिरों की संख्या १८ और शिखरों की संख्या १५ है। इसमें चार आश्रम सिद्धाश्रम‚ अहिल्या स्थान‚ पंचवटी और शबरी आश्रम होगा‚ जो पूरी तरह इको फ्रेंडली होगा। उन्होंने बताया कि रामायण मंदिर भूकंपीय जोन–५ में आता है‚ इसलिए इसकी स्थिरता और मजबूती के लिए सभी तकनीकी सावधानियां बरती जा रही हैं। तकनीकी आकलन के अनुसार‚ मंदिर २५० वर्षों तक किसी भी क्षति से मुक्त रहेगा।

गौरतलब है कि विश्व प्रसिद्ध अंकोरवाट मंदिर की प्रतिकृति वाले दुनिया के इस सबसे बड़े ‘विराट रामायण मंदिर’ को लेकर कंबोडिया की सरकार ने भारत सरकार से आपत्ति जताई थी। कंबोडिया सरकार ने विदेश मंत्रालय को पत्र लिख कर कहा था कि प्रसिद्ध कंबोडियाई अंकोरवाट मंदिर एक विश्व विरासत है। यह१२वीं सदी का हिंदू मंदिर असाधारण होने के साथ–साथ दुनिया के सभी हिंदुओं के लिए आस्था का केंद्र है। ऐसे में इस मंदिर की प्रतिकृति बनाना सही नहीं है। कंबोडिया सरकार ने भारतीय विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर काम रुकवाने की अपील की थी॥। कंबोडिया में बना प्रचीन अंकोरवाट एक विशाल हिंदू मंदिर है‚ जो भगवान विष्णु को समर्पित है। यह दुनिया का सबसे बड़ा पूजा–स्थल है और दुनिया का महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल भी। वर्ष १९९२ में यूनेस्को ने इसे विश्व विरासत की सूची में शामिल किया है।

फ़्रांस से आजादी मिलने के बाद अंकोरवाट मंदिर इस देश का प्रतीक बन गया। इसकी तस्वीर कंबोडिया के राष्ट्रीय ध्वज पर बनी हुई है। कंबोडिया सरकार की आपत्ति को संज्ञान में लेकर विराट रामायण मंदिर के डिजायन में बदलाव किया गया । कंबोडिया सरकार को भारत सरकार के माध्यम से महावीर ट्रस्ट की ओर से बताया गया कि विराट रामायण मंदिर का डिजायन अंकोरवाट मंदिर के हूबहू नहीं है‚ बल्कि इसके डिजायन में १५ अंतर हैं और यह भारतीय वास्तुकला पर आधारित है।श्री कुणाल ने बताया कि सहस लिंगम के विराट रामायण मंदिर में स्थापित होने के बाद करीब तीन वर्षों में पूरे मंदिर का निर्माण हो जायेगा॥।

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