शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज माघ मेला छोड़ने का ऐलान कर दिया है। बुधवार सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- आज मन इतना व्यथित है कि हम बिना स्नान किए ही विदा ले रहे हैं। प्रयागराज हमेशा से आस्था और शांति की धरती रही है। श्रद्धा के साथ यहां आया था, लेकिन एक ऐसी घटना हो गई, जिसकी मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी।
उन्होंने कहा- इस घटना ने मेरी आत्मा को झकझोर दिया। इससे न्याय और मानवता के प्रति मेरा विश्वास कमजोर हुआ है। मुझे जो कहना था, वो कह चुका हूं, लेकिन एक बात बता दूं कि कल मुझे माघ मेला प्रशासन की ओर से एक पत्र और प्रस्ताव भेजा गया।
इसमें कहा कि मुझे पूरे सम्मान के साथ पालकी से संगम ले जाकर स्नान कराया जाएगा। लेकिन मन बहुत दुखी है, इसलिए जा रहा हूं। जब दिल में दुख और गुस्सा हो, तो पवित्र पानी भी शांति नहीं दे पाता।
माघ मेला 15 फरवरी तक चलेगा। अभी 2 स्नान बचे हैं। माघी पूर्णिमा (1 फरवरी) और महाशिवरात्रि (15 फरवरी)। यानी, विवाद के चलते शंकराचार्य ने 18 दिन पहले ही माघ मेला छोड़ दिया।
अब तक क्या हुआ, जानिए—
- 18 जनवरी को माघ मेले में स्नान के लिए जा रहे अविमुक्तेश्वरानंद की पुलिस ने पालकी रोकी। विरोध पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई, शिखा पकड़कर घसीटने का आरोप लगा। इसके बाद शंकराचार्य शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। 11दिनों से शिविर में प्रवेश नहीं किया।
- प्रशासन ने दो दिनों में दो नोटिस जारी कर शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा, जिनका अविमुक्तेश्वरानंद ने जवाब दिया। सीएम योगी ने बिना नाम लिए ‘कालनेमि’ कहा, जिससे विवाद और गहरा गया। जवाब में अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी की तुलना कालनेमि और औरंगजेब से कर दी।
- शंकराचार्य विवाद पर संत समाज दो हिस्सों में बंट गया, जबकि तीनों शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में थे। शंकराचार्य की मांग थी कि प्रशासन माफी मांगे, तभी वह स्नान करेंगे। शंकराचार्य के समर्थन में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने 26 जनवरी को इस्तीफा दे दिया। 24 घंटे बाद सीएम के समर्थन में अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार ने रिजाइन कर दिया।
शंकराचार्य विवाद और माघ मेले से जुड़े अपडेट्स के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए….
लाइव अपडेट्स
शंकराचार्य ने कहा- जो कुछ कहना था, वह कहा जा चुका है। फिर भी एक महत्वपूर्ण तथ्य स्पष्ट करना आवश्यक है कि कल प्रशासन की ओर से, ब्रह्मचारी के माध्यम से तथा हमारे मुख्य कार्याधिकारी श्रीमान चंद्र प्रकाश उपाध्याय द्वारा एक पत्र और प्रस्ताव हमें भेजा गया। इस पत्र में यह कहा गया था कि हमें पूर्ण सम्मान के साथ पालकी द्वारा संगम ले जाकर अधिकारियों की उपस्थिति में स्नान कराया जाएगा।
- अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- संगम की लहरों में स्नान केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अंतरात्मा की संस्कृति और आत्मिक चेतना का मार्ग है। लेकिन आज मन इतना व्यथित है कि हम बिना स्नान किए ही इस पावन स्थल से विदा ले रहे हैं। जब हृदय में क्षोभ और पीड़ा हो, तब जल की शीतलता भी मन को शांति प्रदान नहीं कर सकती।
- हम अपने इस वक्तव्य के माध्यम से विशेष रूप से सनातनी समाज, कुंभ मेला प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश शासन तक यह बात पहुंचाना चाहते हैं कि न्याय की परीक्षा कभी समाप्त नहीं होती। आज हम यहां से जा रहे हैं, लेकिन अपने पीछे सत्य की गूंज और कई प्रश्न छोड़कर जा रहे हैं, जो न केवल प्रयागराज की हवा में रहेंगे, बल्कि पूरे विश्व के वायुमंडल में विद्यमान रहेंगे और अपने उत्तर की प्रतीक्षा करेंगे।
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- प्रयागराज की यह पावन धरती सदैव धार्मिक शांति, आस्था और आत्मिक शुद्धता का केंद्र रही है। हम यहाँ श्रद्धा और धार्मिक शांति की कामना लेकर आए थे। लेकिन आज इस धरती से हमें अत्यंत भारी मन से लौटना पड़ रहा है। ऐसी घटना घटित हुई है, जिसकी हमने कभी कल्पना नहीं की थी। यह घटना न केवल हमारी आत्मा को झकझोरने वाली है, बल्कि न्याय और मानवता के प्रति हमारे सामूहिक विश्वास पर भी गहरा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज माघ मेला छोड़ने का ऐलान कर दिया है। बुधवार सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- आज मन इतना व्यथित है कि हम बिना स्नान किए ही विदा ले रहे हैं। प्रयागराज हमेशा से आस्था और शांति की धरती रही है। श्रद्धा के साथ यहां आया था, लेकिन एक ऐसी घटना हो गई, जिसकी मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी।
उन्होंने कहा- इस घटना ने मेरी आत्मा को झकझोर दिया। इससे न्याय और मानवता के प्रति मेरा विश्वास कमजोर हुआ है। मुझे जो कहना था, वो कह चुका हूं, लेकिन एक बात बता दूं कि कल मुझे माघ मेला प्रशासन की ओर से एक पत्र और प्रस्ताव भेजा गया।
इसमें कहा कि मुझे पूरे सम्मान के साथ पालकी से संगम ले जाकर स्नान कराया जाएगा। लेकिन मन बहुत दुखी है, इसलिए जा रहा हूं। जब दिल में दुख और गुस्सा हो, तो पवित्र पानी भी शांति नहीं दे पाता।
माघ मेला 15 फरवरी तक चलेगा। अभी 2 स्नान बचे हैं। माघी पूर्णिमा (1 फरवरी) और महाशिवरात्रि (15 फरवरी)। यानी, विवाद के चलते शंकराचार्य ने 18 दिन पहले ही माघ मेला छोड़ दिया।
अब तक क्या हुआ, जानिए—
- 18 जनवरी को माघ मेले में स्नान के लिए जा रहे अविमुक्तेश्वरानंद की पुलिस ने पालकी रोकी। विरोध पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई, शिखा पकड़कर घसीटने का आरोप लगा। इसके बाद शंकराचार्य शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। 11दिनों से शिविर में प्रवेश नहीं किया।
- प्रशासन ने दो दिनों में दो नोटिस जारी कर शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा, जिनका अविमुक्तेश्वरानंद ने जवाब दिया। सीएम योगी ने बिना नाम लिए ‘कालनेमि’ कहा, जिससे विवाद और गहरा गया। जवाब में अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी की तुलना कालनेमि और औरंगजेब से कर दी।
- शंकराचार्य विवाद पर संत समाज दो हिस्सों में बंट गया, जबकि तीनों शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में थे। शंकराचार्य की मांग थी कि प्रशासन माफी मांगे, तभी वह स्नान करेंगे। शंकराचार्य के समर्थन में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने 26 जनवरी को इस्तीफा दे दिया। 24 घंटे बाद सीएम के समर्थन में अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार ने रिजाइन कर दिया।
शंकराचार्य विवाद और माघ मेले से जुड़े अपडेट्स के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए….
लाइव अपडेट्स
शंकराचार्य ने कहा- जो कुछ कहना था, वह कहा जा चुका है। फिर भी एक महत्वपूर्ण तथ्य स्पष्ट करना आवश्यक है कि कल प्रशासन की ओर से, ब्रह्मचारी के माध्यम से तथा हमारे मुख्य कार्याधिकारी श्रीमान चंद्र प्रकाश उपाध्याय द्वारा एक पत्र और प्रस्ताव हमें भेजा गया। इस पत्र में यह कहा गया था कि हमें पूर्ण सम्मान के साथ पालकी द्वारा संगम ले जाकर अधिकारियों की उपस्थिति में स्नान कराया जाएगा।
- अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- संगम की लहरों में स्नान केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अंतरात्मा की संस्कृति और आत्मिक चेतना का मार्ग है। लेकिन आज मन इतना व्यथित है कि हम बिना स्नान किए ही इस पावन स्थल से विदा ले रहे हैं। जब हृदय में क्षोभ और पीड़ा हो, तब जल की शीतलता भी मन को शांति प्रदान नहीं कर सकती।
- हम अपने इस वक्तव्य के माध्यम से विशेष रूप से सनातनी समाज, कुंभ मेला प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश शासन तक यह बात पहुंचाना चाहते हैं कि न्याय की परीक्षा कभी समाप्त नहीं होती। आज हम यहां से जा रहे हैं, लेकिन अपने पीछे सत्य की गूंज और कई प्रश्न छोड़कर जा रहे हैं, जो न केवल प्रयागराज की हवा में रहेंगे, बल्कि पूरे विश्व के वायुमंडल में विद्यमान रहेंगे और अपने उत्तर की प्रतीक्षा करेंगे।
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- प्रयागराज की यह पावन धरती सदैव धार्मिक शांति, आस्था और आत्मिक शुद्धता का केंद्र रही है। हम यहाँ श्रद्धा और धार्मिक शांति की कामना लेकर आए थे। लेकिन आज इस धरती से हमें अत्यंत भारी मन से लौटना पड़ रहा है। ऐसी घटना घटित हुई है, जिसकी हमने कभी कल्पना नहीं की थी। यह घटना न केवल हमारी आत्मा को झकझोरने वाली है, बल्कि न्याय और मानवता के प्रति हमारे सामूहिक विश्वास पर भी गहरा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।







