भारत ने घरेलू स्तर पर बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के उपाय के तौर पर गेहूं के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। अलबत्ता‚ विदेश व्यापार महानिदेशालय ने अधिसूचना जारी करके स्पष्ट किया है कि सरकार किसी दूसरे देश की खास जरूरत के मद्देनजर गेहूं निर्यात की अनुमति दे सकती है। वह गेहूं भी निर्यात किया जा सकेगा जिसके लिए लेटर ऑफ क्रेडि़ट जारी किए जा चुके हैं‚ और जो शिपमेंट के लिए तैयार है। बीते सप्ताह जारी आधिकारिक आंकड़़ों से पता चलता है कि ईधन और खाद्य पदार्थों की उची कीमतों के कारण अप्रैल में खुदरा मुद्रास्फीति आठ साल के उच्च स्तर पर पहंुच गई है। गेहूं की कीमतों का यह हाल है कि बीते कुछ महीनों से दाम में तेजी का सिलसिला बना हुआ है। खुदरा में आटे की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं‚ और अभी प्रति किलो आटा ३५ रुपये पर बिक रहा है। ऐसे में जरूरी हो गया कि गेहूं जैसे बुनियादी खाद्यान्न की कीमतों को बेकाबू होने से रोका जाए। गेहूं के दाम बढ़ने के मोटामोटी दो कारण गिनाए जा सकते हैं। पहला‚ इस बार गेहूं का उत्पादन घटने का अनुमान है। बढ़ती गर्मी से गेहूं की फसल नष्ट होने की खबरों के बीच आकलन लगाया गया है कि इस बार अनुमानित गेहूं उत्पादन ११.१३ करोड़़ टन के बरक्स १०.५० करोड़़ टन रह सकतंा है। गौरतलब है कि देश में गेहूं की सालाना मांग १० करोड़़ टन के आसपास रहती है। सो‚ गेहूं का स्टॉक पर्याप्त बनाए रखने के लिए गेहूं का निर्यात रोका गया है। दूसरा कारण‚ रूस–यूक्रेन युद्ध के चलते गेहूं की वैश्विक मांग बढी है‚ और बीते चार महीनों के दौरान भारत अभी तक ९.६३ लाख टन का निर्यात कर चुका है। रूस और यूक्रेन विश्व में प्रमुख गेहूं निर्यातक देश हैं‚ लेकिन दोनों के बीच युद्ध के चलते वैश्विक परिदृश्य गेहूं के अभाव का बनता जा रहा है। दोनों देशों का युद्ध लंबा खिंचा तो यकीनन तमाम देशों में गेहूं की कमी पड़़ सकती है। भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़़ा गेहूं उत्पादक है‚ लेकिन इस साल अधिक गर्मी से गेहूं उत्पादन कम उतरने से मांग–पूर्ति में असंतुलन का अंदेशा है। दिक्कत यह भी है कि इस बार व्यापारियों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य से ज्यादा दाम देकर किसानों से गेहूं खरीद लिया है। सरकारी खरीद कम रहने और खाद्यान्न का ज्यादा भंड़ार निजी हाथों में होने से सरकार को ऐसे उपाय करने होंगे कि देश में गेहूं की जरूरत आसानी से पूरी हो सके। इसी कडी में गेहूं का निर्यात रोकने का फैसला किया गया है‚ जो माकूल है।
पटना मैनेजमेंट एसोसिएशन ने आयोजित किया बीमा जागरूकता सत्र
पटना, 1 अगस्त। पटना मैनेजमेंट एसोसिएशन (PMA) ने इंडियन सोसाइटी फॉर ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट (ISTD), पटना चैप्टर के सहयोग से...







