पटाखों की बिक्री पर रोक लगाने के पीछे सुप्रीम कोर्ट की मंशा दिल्ली एनसीआर के लोगों की सेहत की चिंता है। सर्दियां शुरू होते ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता बिगड़़ने लगती है ओैर दिवाली के बाद तो पूरा वातावरण दमघोंटू हो जाता है। इसके पीछे पटाखों के जलाए जाने से होने वाला प्रदूषण जिम्मेदार होता है। पहले तो एक दो दिन में प्रदूषण वातावरण से साफ हो जाता था लेकिन दो तीन वर्षों से एनसीआर का आसमान कई–कई दिन तक जानलेवा प्रदूषण से घिरा रहता है। इसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता दिखाते हुए पटाखों की बिक्री‚ भंड़ारण और उन्हें जलाने पर रोक लगा रखी है। इसका उद्देश्य जहरीले रसायनों का धुआं वातावरण में जाने से रोकना और ध्वनि प्रदूषण में कमी लाना था। राजधानी पहले ही से वाहनों के धुएं‚ भवन निर्माण में उड़़ने वाली गर्द और पराली जलाए जाने से होने वाले प्रदूषण से हलकान है। पटाखों का धुआं प्रदूषण को बेकाबू स्तर तक पहुंचा देता है। लेकिन २०१८ में जब पटाखों पर रोक लगी तब तक अनेक व्यापारी एड़वांस इत्यादि देकर माल मंगा चुके थे। करोड़ों के व्यवसाय पर एकाएक रोक से निर्माताओं और व्यवसायियों को भारी नुकसान हुआ। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने हानिकारक रसायनों से मुक्त और कम आवाज वाले पटाखों की बिक्री और उपयोग पर रोक नहीं लगाई है। लेकिन भारत में आजकल हर बात को किसी समुदाय विशेष के खिलाफ बताने की परंपरा बन गई है। सोशल मीडि़या से शुरू होकर पटाखों की लड़ा़ई भी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि हम किसी समुदाय की खुशी और आनंद के खिलाफ नहीं हैं‚ लेकिन लोगों के अधिकार का उल्लंघन नहीं होने दे सकते। हम सख्त संदेश देना चाहते हैं कि हम यहां नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए हैं। पटाखा निर्माता मस्ती और आनंद का बहाना बनाकर लोगों की जिंदगी से नहीं खेल सकते। बैन के आदेश में तमाम कारण बताए गए थे। सभी पटाखों को बैन नहीं किया गया था। आदेश लोकहित में पारित किया गया था। किसी कम्युनिटी का नाम लेकर कोई धारणा नहीं बनाई जानी चाहिए कि बैन अमुक उद्देश्य से लगाया गया है। संंबंधित अथॉरिटी की जिम्मेदारी है कि आदेश का अनुपालन कराएं। अभी भी हानिकारक पटाखों की बिक्री जारी है‚ जिस पर सख्त रोक लगनी चाहिए। आखिर सबकी सेहत का मामला है।
भारत के मंदिरों को चलाने में सरकार की क्या है भूमिका?
अयोध्या में भव्य राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही यहां देश और दुनिया से...







