आफगानिस्तान में तालिबान हुकूमत कायम होने के दो–ढाई महीने बाद वहां के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा है कि देश की आधी आबादी भुखमरी और अकाल के कगार पर है। अफगानिस्तान की निर्वासित सरकार के कार्यकारी राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने भी देश में मानवीय संकट की ओर दुनिया का ध्यान आकृष्ट कराया है। उन्होंने कहा है कि देश में नब्बे फीसद जनसंख्या गरीबी के दलदल में फंस गई है। देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीड़ीपी) तीस फीसद गिर गया है। बैंक बंद हैं। नागरिक प्रशासन नाममात्र का है। प्रेस और मीडि़या पर नियंत्रण है। शरीयत के नाम पर महिलाओं को गुलामी में धकेल दिया गया है। सालेह के अनुसार देश में जो मानवीय सहायता कार्य चल रहा है‚ वह सरकार की बजाय स्वयंसेवी संगठन कर रहे हैं। सालेह का आरोप है कि देश का शासन तालिबान नहीं‚ बल्कि पाकिस्तान का सैन्य मुख्यालय चला रहा है। उनके अनुसार आतंकवादी गिरोह के रूप में तालिबान का समर्थन करना एक बात है‚ सरकार के रूप में तालिबान को कारगर बनाए रखना पाकिस्तान के बूते की बात नहीं है। दुनिया का सर्वाधिक शक्तिशाली देश अमेरिका हो या यूरोप के विकसित देश‚ सभी इस बात के गवाह हैं कि अफगानिस्तान में लोकतांत्रिक शासन प्रणाली को हथियार के बलबूते खत्म करने के क्या परिणाम सामने आ रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अफगानिस्तान में आधी से ज्यादा आबादी यानी करीब ढाई करोड़़ लोगों को अगले महीने नवम्बर से भुखमरी का सामना करना पड़़ सकता है। शर्मनाक बात यह है कि अब वहां भुखमरी से बचने के लिए लोग अपने बच्चों को बेचने लगे हैं। आर्थिक विषय के जानकारों का मानना है कि अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था का करीब तीन चौथाई हिस्सा विश्व बैंक‚ अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और अन्य अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहायता पर निर्भर करता है। गृह युद्धके बाद देश में जो अस्थिरता का दौर शुरू हुआ है‚ उसके कारण अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहायता बाधित हो गईहै। जहां तक भारत का संबंध है‚ उसे अफगानिस्तान में राजनीतिक रूप से सक्रिय होने में कुछ समय लगेगा। हालांकि नई दिल्ली वहां मानवीय सहायता के लिए पहले की तरह आज भी प्रयत्नशील है। फिलहाल‚ उसकी प्राथमिकता आतंकवाद से देश को सुरक्षित रखना है।
भारत के मंदिरों को चलाने में सरकार की क्या है भूमिका?
अयोध्या में भव्य राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही यहां देश और दुनिया से...







