सावन की पहली सोमवारी पर इंद्रदेव भी मानो महादेव का जलाभिषेक करने धरती पर उतर पड़े। सुबह से रुक-रुककर वर्षा हो रही है। देवों के देव महादेव की आराधना के लिए शिव का दरबार सज गया है।
शहर के महावीर मंदिर, गर्दनीबाग ठाुकरबाड़ी, कदमकुआं चूड़ी मार्केट, खाजपुरा, पंचशिव मंदिर कंकड़बाग समेत अन्य शिव मंदिरों को रंगीन बल्बों के साथ विभिन्न प्रकार के फूलों से सजाया गया है।
सुबह से ही शिवालयों में श्रद्धालुओं की कतार लगी है। हर-हर महादेव और बोलबम की गूंज हो रही है। मंदिरों के पास सुबह से चहल-पहल बनी हुई है।
आज से शुरू हो रही 16 सोमवारी
सावन की पहली सोमवारी का संयोग भी खास है। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र व सुकर्मा योग का सुयोग बन पड़ा है। घरों में पार्थिव पूजन के साथ मठ-मंदिरों में भजन-कीर्तन के साथ भगवान शिव का भव्य शृंगार किए जाने की तैयारी है।
आज से 16 सोमवारी व्रत की भी शुरुआत होगी। वहीं, मिथिलांचल का लोक पर्व मधुश्रावणी भी आज से शुरू हो रहा है। इसका समापन 15 अगस्त शनिवार को समाप्त होगा।
राजधानी से सटे खुसरुपुर के बैकटपुर स्थित श्री गौरीशंकर बैकुंठनाथ मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा है। बिहटा स्थित बाबा बिहटेश्वरनाथ मंदिर समेत अन्य जगहों पर भी भक्त पहुंच रहे हैं।
भागलपुर के सुल्तानगंज से लेकर झारखंड के देवघर तक करीब 105 किलोमीटर तक सड़क केसरिया रंग के कपड़े पहने भक्तों से रंग गया है। अजगैबीनाथ धाम मंदिर में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ है।
श्रद्धालुओं और कांवड़ियों ने उत्तरवाहिनी गंगा में डुबकी लगाकर पवित्र गंगाजल भरा। इसके बाद उन्होंने भगवान का जलाभिषेक किया। करीब 3 लाख से ज्यादा कांवरियां गंगाजल लेकर पैदल और अलग-अलग वाहनों से बाबा बैद्यनाथ धाम देवघर के लिए रवाना हुए। 30 जुलाई को श्रावणी मेले के उद्घाटन के बाद से अब तक सुल्तानगंज से अब तक 5 लाख से ज्यादा शिवभक्त जल लेकर देवघर के लिए रवाना हो चुके हैं।
शिवभक्त पूजा अर्चना के लिए पुहंच रहे हैं
इसके अलावा जिलों के शिवमंदिरों में सुबह से ही भीड़ जुटनी शुरू हो गई है। सुबह पांच बजे से शिवभक्त जलाभिषेक के लिए पहुंच रहे हैं। ॐ नमः शिवाय’, ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु भगवान शिव का गंगाजल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र से जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना कर रहे हैं।
सुल्तानगंज में श्रावणी मेला का हाल
सुल्तानगंज के नमामि गंगे और अजगैबीनाथ घाट से कांवरियों का जत्था हर पल जल भरकर निकल रहा है। सबका लक्ष्य एक है… 105 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा के बाद बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक। यहां आस्था, श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम दिख रहा है। कांवरियों में महिला, पुरुष, बच्चे यानी हर उम्र के लोग शामिल है। सबका एक ही नाम है… बम।
श्रद्धालुओं की सुगम, सुरक्षित और सुव्यवस्थित यात्रा के लिए बिहार और झारखंड सरकार और संबंधित जिला प्रशासनों ने अभूतपूर्व और चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं।
सुल्तानगंज से देवघर कांवरिया पथ पर बालू
105 किलोमीटर लंबे इस दुर्गम और कच्चे कांवरिया पथ को शिवभक्तों की सुविधा के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। नंगे पांव चलने वाले कांवरियों के पैरों में छाले न पड़ें, इसके लिए लगभग 85 किमी लंबे कच्चे रास्ते पर बारीक और महीन बालू बिछाई गई है।
इसके अलावा, उमस और तीखी धूप से राहत दिलाने के लिए पूरे रास्ते में नियमित अंतराल पर वाटर स्प्रिंकलर (पानी की फुहारें) लगाए गए हैं। पानी के टैंकरों से लगातार छिड़काव किया जा रहा है। शाम और रात के वक्त शिवभक्तों को कोई दिक्कत न हो इसके लिए कांवरियों के लिए पूरे पथ पर हाई-मास्ट लाइटें और एलईडी स्ट्रिप्स लगाई गई हैं। मुख्य पड़ावों और प्रवेश द्वारों पर आकर्षक तोरण द्वार और भक्ति संगीत के लिए साउंड सिस्टम लगाए गए हैं।
सीसीटीवी, एआई कैमरे, ड्रोन से कांवरियों की सुरक्षा
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भागलपुर, बांका और देवघर पुलिस-प्रशासन ने स्पेशल तैयारी की है। सुल्तानगंज घाट से लेकर बाबा धाम तक 500 से अधिक सीसीटीवी और एआई कैमरों के जरिए वॉच टावर और कंट्रोल रूम से 24/7 निगरानी रखी जा रही है। संवेदनशील इलाकों में ड्रोन कैमरों से भीड़ के घनत्व को मापा जा रहा है।
इसके अलावा, कांवरिया पथ पर बिहार पुलिस, झारखंड पुलिस, होमगार्ड, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और एटीएस (ATS) की टीमें तैनात हैं। सादे लिबास में भी महिला व पुरुष पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। पूरे रूट पर हर 2 से 3 किलोमीटर पर अस्थायी मेडिकल रिलीफ सेंटर (MRC) बनाए गए हैं। आपात स्थिति के लिए बाइक एम्बुलेंस, 108 एम्बुलेंस और जीवनरक्षक दवाओं के साथ डॉक्टरों की टीमें तैनात हैं।







