संसद का मॉनसून सत्र सोमवार से शुरू हुआ। हालांकि, पहले दिन ही विपक्ष ने दोनों सदनों में जमकर हंगामा किया। इस वजह से कोई चर्चा नहीं हो पाई और दोनों सदनों की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गई। 13 अगस्त तक चलने वाले मॉनसून सत्र के दौरान मोदी सरकार कई अहम बिल लाएगी। सबसे बड़ा सस्पेंस परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक को लेकर है। बदले राजनीतिक समीकरणों और लोकसभा के नए नंबर गेम ने सरकार की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। वहीं सर्वदलीय बैठक में टीएमसी के बागी सांसदों को बुलाने पर विपक्ष के वॉकआउट ने सत्र शुरू होने से पहले ही सियासी पारा बढ़ा दिया है। आपको बता दें कि संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत काफी हंगामेदार तरीके से हुई और यह कार्यवाही स्थगित होने तक चलता रहा। विपक्षी दलों की ओर से NEET पेपर लीक, राम मंदिर चढ़ावा विवाद जैसे मुद्दों को लेकर जबरदस्त हंगामा किया गया है। इस कारण लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। अंत में दोनों सदनों की कार्यवाही कल तक लिए स्थगित कर दी गई।
लाइव अपडेट :
वंदे मातरम् बिल आज पेश नहीं होगा
राज्यसभा में सोमवार को वंदे मातरम् बिल पेश नहीं किया जाएगा। इससे पहले खबर आई थी कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को इस बिल को राज्यसभा में पेश कर सकते हैं।
सरकार लोगों के मुद्दों को लेकर बिल्कुल भी संवेदनशील नहीं- केसी वेणुगोपाल
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा, “यह सरकार लोगों के मुद्दों को लेकर बिल्कुल भी संवेदनशील नहीं है। आप NEET और CBSE परीक्षा लीक को लेकर देश के परिवारों का दर्द देख सकते हैं। माता-पिता छात्रों, यानी अपने बेटे-बेटियों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। हमारी कम से कम यह मांग है कि शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें और NEET व CBSE परीक्षाओं पर चर्चा हो।”
सरकार चर्चा कराए और सदन चलेगा- मनीष तिवारी
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा- “हम भी चाहते हैं कि मॉनसून सत्र सार्थक हो, लेकिन लोगों की उम्मीदों और भावनाओं से जुड़े कुछ बहुत बुनियादी मुद्दे हैं। भारत की शिक्षा व्यवस्था में भारी नाकामियों के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए। इसी तरह, राम मंदिर में चढ़ावे के कथित दुरुपयोग पर भी विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। सरकार चर्चा कराए और सदन चलेगा।”
NEET पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए- कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला
कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने कहा- “विपक्ष के नेता, हमारी पार्टी और पूरे विपक्ष ने सदन में मांग की है कि NEET पेपर लीक और छात्रों की आत्महत्या के मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए। हमने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। PM को अयोध्या राम मंदिर में हुए ‘चंदा चोरी’ के मामले पर भी बयान देना चाहिए। लेकिन सरकार चर्चा से भाग रही है। उन्होंने पूरी शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर दिया है।”
हमारे सांसदों को पुलिस स्टेशन में रखा गया है- अखिलेश यादव
समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने कहा- “हमारे सांसदों को पुलिस स्टेशन में रखा गया है, जबकि बाहर बच्चों की पिटाई हो रही है। यह कैसी सरकार है? आप बच्चों की बात नहीं सुनना चाहते। अगर NEET परीक्षा हुई और उसमें गड़बड़ी हुई, तो इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है? किसकी विश्वसनीयता दांव पर है? तैयारी किसे करनी थी?”
अखिलेश यादव ने कहा- “यह ‘सरकार’ नहीं, ‘अहंकार’ है। जो लोग श्रद्धांजलि देने में भेदभाव करते हैं, उन्होंने उन बच्चों की मौत पर शोक का एक शब्द भी नहीं कहा। सरकार के लिए इससे बड़ा अहंकार क्या हो सकता है? जब छात्र और युवा यहां आए हैं, तो वे चाहते हैं कि सरकार उनकी बात सुने।”
छात्रों पर लाठीचार्ज लोकतंत्र पर हमला- मल्लिकार्जुन खरगे
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, “छात्रों पर लाठीचार्ज लोकतंत्र पर हमला है। यह सरकार सत्ता में बने रहने के लायक नहीं है। हमने (अयोध्या राम मंदिर में) दान की चोरी का मुद्दा भी उठाया है। मोदी साहब को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए क्योंकि उन्होंने ही ट्रस्ट बनाया था।”
INDIA गठबंधन के फ्लोर लीडर्स की बैठक
संसद के मॉनसून सत्र के दौरान सोमवार को संसद में INDIA गठबंधन के फ्लोर लीडर्स की बैठक हुई। इस बैठक में राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी मौजूद थे।
कौन से विधेयकों को पारित कराने पर सरकार का जोर?
संसद के मानसून सत्र में सरकार का मुख्य ध्यान अपने विधायी एजेंडे को पूरा करने और कई अहम विधेयकों को पारित कराने पर रहेगा।
1. परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक: यह सरकार के सबसे प्रमुख और महत्वाकांक्षी एजेंडों में से एक है। इसका मुख्य मकसद 2029 के आम चुनावों तक संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करना है। इस विधेयक के जरिए लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या को 550 से बढ़ाकर 850 करने का भी प्रस्ताव है। इस संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी, जिसे जुटाने के लिए वह अन्य दलों का समर्थन हासिल करने का प्रयास कर रही है।
2. विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026: इस विधेयक का उद्देश्य विदेशी फंडों को हासिल करने और उनके इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है। हालांकि, यह सत्र के सबसे विवादास्पद विधेयकों में से एक हो सकता है, क्योंकि विपक्ष को आशंका है कि इससे कुछ विशेष गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और संस्थाओं पर असर पड़ सकता है।
3. सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026: इसके जरिए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रस्ताव है।
4. आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026: यह विधेयक एक अध्यादेश का स्थान लेगा, जिसका उद्देश्य सरकारी बॉन्डों में निवेश करने वाले विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) को टैक्स (पूंजीगत कर) में छूट प्रदान करना है।
5. राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026: इस विधेयक के तहत विशेष रूप से वंदे मातरम के गायन में बाधा डालने या अपमानित करने को एक आपराधिक कृत्य बनाने का प्रस्ताव शामिल है।
6. जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026: इसके जरिए जन्म और मृत्यु के देरी से होने वाले पंजीकरण के नियमों को और सख्त बनाया जाएगा।
7. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विकास (संशोधन) विधेयक, 2026: इसका उद्देश्य विलंबित भुगतानों के तंत्र को मजबूत करके, मध्यस्थता लागू करके और व्यापार नियमों को आसान बनाकर एमएसएमई क्षेत्र के कानूनों का आधुनिकीकरण करना है।
8. विकसित भारत शिक्षा प्रतिष्ठान विधेयक 2025: उच्च शिक्षा को विनियमित करने वाले इस विधेयक को भी पेश किया जा सकता है। हालांकि, कुछ विवादों के चलते फिलहाल इसके पेश होने की संभावना कम है।
9. 130वां संविधान संशोधन विधेयक: गंभीर अपराधों में लगातार 30 दिनों से अधिक समय तक गिरफ्तार रहने वाले मंत्रियों को पद से हटाने के प्रावधान वाले इस बिल को भी सरकार ने फिलहाल के लिए ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
इनमें किन विधेयकों पर सबसे ज्यादा विवाद और क्यों?
1. परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक
संघवाद पर खतरा और दक्षिणी राज्यों का डर: विपक्षी और क्षेत्रीय दलों का आरोप है कि सरकार इसके जरिए पिछले दरवाजे से परिसीमन लागू कर रही है, जो संघवाद के खिलाफ है। उनका तर्क है कि अगर 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों का बंटवारा होता है तो दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी सिकुड़ जाएगी और राष्ट्रीय राजनीति में उनका प्रभाव कम हो जाएगा।
लिखित गारंटी की मांग: विपक्षी दल इस बात से आशंकित हैं, क्योंकि पहले वितरित किए गए ड्राफ्ट में सीटों की बढ़ोतरी का विवरण नहीं था। कुछ विपक्षी दल मांग कर रहे हैं कि विधेयक में सभी राज्यों के लिए सीटों में एक समान 50% बढ़ोतरी का स्पष्ट रूप से जिक्र किया जाना चाहिए।
2. विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026
सरकार का तर्क है कि इस विधेयक का मूल मकसद विदेशी फंड्स को हासिल करने और उनके इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि इन प्रस्तावित बदलावों का विदेशी चंदा प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और विशेष रूप से ईसाई संगठनों पर अनुचित और गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
3. विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025
यह विधेयक उच्च शिक्षा को विनियमित करने के लिए एक एकल निकाय बनाने का प्रस्ताव करता है। हालांकि, इसके जबरदस्त केंद्रीकरण के प्रावधानों के कारण इसे खुद सत्ता पक्ष के भीतर से ही कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इसी विरोध के कारण सरकार को सावधानी बरतते हुए इससे जुड़ी संयुक्त संसदीय समिति की बैठक को भी रद्द करना पड़ा है।
सरकार के पास विधेयकों को पारित कराने के लिए कितना समर्थन?
मौजूदा समय में एनडीए के पास 293 सांसद हैं। इनमें भाजपा के 240 सांसद हैं, जबकि सहयोगी दलों के 53 सांसद भी शामिल हैं।
1. टीएमसी में टूट: तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट का दावा है कि उनके पास कुल 28 सांसदों में से 19-20 सांसदों का समर्थन है। ऐसे में अगर यह सांसद एनडीए को समर्थन देते हैं तो इस गठबंधन को कुल 313 सांसदों तक का समर्थन मिल सकता है।
2. शिवसेना में टूट: वहीं, शिवसेना के भी नौ में से छह सांसद टूट चुके हैं। यह सांसद शिंदे गुट के साथ आए हैं, जो कि एनडीए का अंग हैं। इस लिहाज से एनडीए का कुल समर्थन 320 तक पहुंच सकता है।
3. द्रमुक-कांग्रेस में फूट: तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के बाद विजय की पार्टी टीवीके को कांग्रेस ने समर्थन दे दिया। इसे लेकर द्रमुक ने नाराजगी जताई है और कांग्रेस पर अपने चुनाव पूर्व बने गठबंधन को तोड़ने का आरोप लगाया। नाराजगी जताते हुए द्रमुक हाल ही में हुई विपक्षी गठबंधन- इंडिया की बैठक में भी नहीं पहुंचा था। अटकलें लग रही हैं कि द्रमुक मुद्दों के आधार पर एनडीए सरकार को समर्थन दे सकती है। द्रमुक से 22 सांसद हैं। ऐसा होता है तो एनडीए का आंकड़ा बढ़कर 342 हो जाएगा।
..तो क्या लोकसभा में अहम विधेयक पारित हो सकते हैं?
यूं तो केंद्र सरकार की तरफ से जो विधेयक पेश किए जा रहे हैं, उन्हें साधारण बहुमत से पारित कराया जा सकता है। हालांकि, कुछ विधेयक संविधान संशोधन से जुड़े हैं, जिन्हें पारित कराने के लिए सरकार को कुछ टूटे हुए सांसदों के साथ विपक्ष के कुछ दलों के अपने पक्ष में आने की उम्मीद करनी होगी।
परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयकों को लोकसभा में पारित कराने के लिए सरकार को लोकसभा के कुल सदस्यों की संख्या का दो-तिहाई समर्थन हासिल करना अनिवार्य है। यानी 543 सांसदों वाले सदन में कम से कम 362 सांसदों का समर्थन। मौजूदा समय में सदन में 540 सांसद हैं। यानी एनडीए को 360 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी। फिलहाल उसके 293 सांसद हैं और टीएमसी-शिवसेना में टूट से उसे अधिकतम 27 सांसदों का अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है। यानी उसका आंकड़ा 320 तक पहुंच सकता है। यानी अब भी 360 के जादुई आंकड़े से 40 सीट दूर। द्रमुक के 22 सांसदों का समर्थन मिलता है तो ये आंकड़ा 242 तक पहुंचेगा। यानी जादुई आंकड़े से 18 कम।
विपक्ष के पास क्या मुद्दे, लोकसभा-राज्यसभा में हंगामा क्यों तय?
1. नीट पेपर लीक और छात्रों के मुद्दे
विपक्ष की तरफ से नीट परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं को जोर-शोर से उठाने की बात कही गई है। विपक्ष छात्रों के विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है। खुद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर मुखरता दिखाई है।
2. राम मंदिर चंदा चोरी का आरोप
विपक्ष, खासकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए आए चंदे में कथित गबन के मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे। विपक्षी नेताओं ने इस मामले में ट्रस्ट के वित्तीय मामलों की एक स्वतंत्र जांच कराने और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर पर उनके अनशन से जबरन हटाकर अस्पताल ले जाने की पुलिस की कार्रवाई का विपक्ष कड़ा विरोध कर रहा है। माना जा रहा है कि विपक्ष इस मुद्दे को सरकार के विरोध में उठाएगा, जिसे लेकर हंगामे के भी आसार हैं।4. मणिपुर की स्थिति
विपक्षी दल इस सत्र में मणिपुर के हालातों पर भी सरकार से चर्चा और जवाबदेही की मांग करेंगे।5. आर्थिक और नीतिगत मुद्दे
विपक्ष महंगाई, भ्रष्टाचार, घोटालों, पेट्रोल में इथेनॉल और विदेश नीति की विफलताओं जैसे विषयों पर सरकार को घेरेगा। इसके अलावा विपक्षी दल सरकार पर संस्थाओं पर कब्जे और राजनीतिक दलों को तोड़ने का आरोप लगाते हुए इस मुद्दे को भी संसद में उठाएंगे। इसे लेकर पहले ही रविवार को विपक्ष ने सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का बहिष्कार कर दिया था।
संसद का मॉनसून सत्र सोमवार से शुरू हुआ। हालांकि, पहले दिन ही विपक्ष ने दोनों सदनों में जमकर हंगामा किया। इस वजह से कोई चर्चा नहीं हो पाई और दोनों सदनों की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गई। 13 अगस्त तक चलने वाले मॉनसून सत्र के दौरान मोदी सरकार कई अहम बिल लाएगी। सबसे बड़ा सस्पेंस परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक को लेकर है। बदले राजनीतिक समीकरणों और लोकसभा के नए नंबर गेम ने सरकार की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। वहीं सर्वदलीय बैठक में टीएमसी के बागी सांसदों को बुलाने पर विपक्ष के वॉकआउट ने सत्र शुरू होने से पहले ही सियासी पारा बढ़ा दिया है। आपको बता दें कि संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत काफी हंगामेदार तरीके से हुई और यह कार्यवाही स्थगित होने तक चलता रहा। विपक्षी दलों की ओर से NEET पेपर लीक, राम मंदिर चढ़ावा विवाद जैसे मुद्दों को लेकर जबरदस्त हंगामा किया गया है। इस कारण लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। अंत में दोनों सदनों की कार्यवाही कल तक लिए स्थगित कर दी गई।
लाइव अपडेट :
वंदे मातरम् बिल आज पेश नहीं होगा
राज्यसभा में सोमवार को वंदे मातरम् बिल पेश नहीं किया जाएगा। इससे पहले खबर आई थी कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को इस बिल को राज्यसभा में पेश कर सकते हैं।
सरकार लोगों के मुद्दों को लेकर बिल्कुल भी संवेदनशील नहीं- केसी वेणुगोपाल
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा, “यह सरकार लोगों के मुद्दों को लेकर बिल्कुल भी संवेदनशील नहीं है। आप NEET और CBSE परीक्षा लीक को लेकर देश के परिवारों का दर्द देख सकते हैं। माता-पिता छात्रों, यानी अपने बेटे-बेटियों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। हमारी कम से कम यह मांग है कि शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें और NEET व CBSE परीक्षाओं पर चर्चा हो।”
सरकार चर्चा कराए और सदन चलेगा- मनीष तिवारी
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा- “हम भी चाहते हैं कि मॉनसून सत्र सार्थक हो, लेकिन लोगों की उम्मीदों और भावनाओं से जुड़े कुछ बहुत बुनियादी मुद्दे हैं। भारत की शिक्षा व्यवस्था में भारी नाकामियों के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए। इसी तरह, राम मंदिर में चढ़ावे के कथित दुरुपयोग पर भी विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। सरकार चर्चा कराए और सदन चलेगा।”
NEET पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए- कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला
कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने कहा- “विपक्ष के नेता, हमारी पार्टी और पूरे विपक्ष ने सदन में मांग की है कि NEET पेपर लीक और छात्रों की आत्महत्या के मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए। हमने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। PM को अयोध्या राम मंदिर में हुए ‘चंदा चोरी’ के मामले पर भी बयान देना चाहिए। लेकिन सरकार चर्चा से भाग रही है। उन्होंने पूरी शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर दिया है।”
हमारे सांसदों को पुलिस स्टेशन में रखा गया है- अखिलेश यादव
समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने कहा- “हमारे सांसदों को पुलिस स्टेशन में रखा गया है, जबकि बाहर बच्चों की पिटाई हो रही है। यह कैसी सरकार है? आप बच्चों की बात नहीं सुनना चाहते। अगर NEET परीक्षा हुई और उसमें गड़बड़ी हुई, तो इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है? किसकी विश्वसनीयता दांव पर है? तैयारी किसे करनी थी?”
अखिलेश यादव ने कहा- “यह ‘सरकार’ नहीं, ‘अहंकार’ है। जो लोग श्रद्धांजलि देने में भेदभाव करते हैं, उन्होंने उन बच्चों की मौत पर शोक का एक शब्द भी नहीं कहा। सरकार के लिए इससे बड़ा अहंकार क्या हो सकता है? जब छात्र और युवा यहां आए हैं, तो वे चाहते हैं कि सरकार उनकी बात सुने।”
छात्रों पर लाठीचार्ज लोकतंत्र पर हमला- मल्लिकार्जुन खरगे
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, “छात्रों पर लाठीचार्ज लोकतंत्र पर हमला है। यह सरकार सत्ता में बने रहने के लायक नहीं है। हमने (अयोध्या राम मंदिर में) दान की चोरी का मुद्दा भी उठाया है। मोदी साहब को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए क्योंकि उन्होंने ही ट्रस्ट बनाया था।”
INDIA गठबंधन के फ्लोर लीडर्स की बैठक
संसद के मॉनसून सत्र के दौरान सोमवार को संसद में INDIA गठबंधन के फ्लोर लीडर्स की बैठक हुई। इस बैठक में राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी मौजूद थे।
कौन से विधेयकों को पारित कराने पर सरकार का जोर?
संसद के मानसून सत्र में सरकार का मुख्य ध्यान अपने विधायी एजेंडे को पूरा करने और कई अहम विधेयकों को पारित कराने पर रहेगा।
1. परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक: यह सरकार के सबसे प्रमुख और महत्वाकांक्षी एजेंडों में से एक है। इसका मुख्य मकसद 2029 के आम चुनावों तक संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करना है। इस विधेयक के जरिए लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या को 550 से बढ़ाकर 850 करने का भी प्रस्ताव है। इस संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी, जिसे जुटाने के लिए वह अन्य दलों का समर्थन हासिल करने का प्रयास कर रही है।
2. विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026: इस विधेयक का उद्देश्य विदेशी फंडों को हासिल करने और उनके इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है। हालांकि, यह सत्र के सबसे विवादास्पद विधेयकों में से एक हो सकता है, क्योंकि विपक्ष को आशंका है कि इससे कुछ विशेष गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और संस्थाओं पर असर पड़ सकता है।
3. सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026: इसके जरिए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रस्ताव है।
4. आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026: यह विधेयक एक अध्यादेश का स्थान लेगा, जिसका उद्देश्य सरकारी बॉन्डों में निवेश करने वाले विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) को टैक्स (पूंजीगत कर) में छूट प्रदान करना है।
5. राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026: इस विधेयक के तहत विशेष रूप से वंदे मातरम के गायन में बाधा डालने या अपमानित करने को एक आपराधिक कृत्य बनाने का प्रस्ताव शामिल है।
6. जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026: इसके जरिए जन्म और मृत्यु के देरी से होने वाले पंजीकरण के नियमों को और सख्त बनाया जाएगा।
7. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विकास (संशोधन) विधेयक, 2026: इसका उद्देश्य विलंबित भुगतानों के तंत्र को मजबूत करके, मध्यस्थता लागू करके और व्यापार नियमों को आसान बनाकर एमएसएमई क्षेत्र के कानूनों का आधुनिकीकरण करना है।
8. विकसित भारत शिक्षा प्रतिष्ठान विधेयक 2025: उच्च शिक्षा को विनियमित करने वाले इस विधेयक को भी पेश किया जा सकता है। हालांकि, कुछ विवादों के चलते फिलहाल इसके पेश होने की संभावना कम है।
9. 130वां संविधान संशोधन विधेयक: गंभीर अपराधों में लगातार 30 दिनों से अधिक समय तक गिरफ्तार रहने वाले मंत्रियों को पद से हटाने के प्रावधान वाले इस बिल को भी सरकार ने फिलहाल के लिए ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
इनमें किन विधेयकों पर सबसे ज्यादा विवाद और क्यों?
1. परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक
संघवाद पर खतरा और दक्षिणी राज्यों का डर: विपक्षी और क्षेत्रीय दलों का आरोप है कि सरकार इसके जरिए पिछले दरवाजे से परिसीमन लागू कर रही है, जो संघवाद के खिलाफ है। उनका तर्क है कि अगर 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों का बंटवारा होता है तो दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी सिकुड़ जाएगी और राष्ट्रीय राजनीति में उनका प्रभाव कम हो जाएगा।
लिखित गारंटी की मांग: विपक्षी दल इस बात से आशंकित हैं, क्योंकि पहले वितरित किए गए ड्राफ्ट में सीटों की बढ़ोतरी का विवरण नहीं था। कुछ विपक्षी दल मांग कर रहे हैं कि विधेयक में सभी राज्यों के लिए सीटों में एक समान 50% बढ़ोतरी का स्पष्ट रूप से जिक्र किया जाना चाहिए।
2. विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026
सरकार का तर्क है कि इस विधेयक का मूल मकसद विदेशी फंड्स को हासिल करने और उनके इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि इन प्रस्तावित बदलावों का विदेशी चंदा प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और विशेष रूप से ईसाई संगठनों पर अनुचित और गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
3. विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025
यह विधेयक उच्च शिक्षा को विनियमित करने के लिए एक एकल निकाय बनाने का प्रस्ताव करता है। हालांकि, इसके जबरदस्त केंद्रीकरण के प्रावधानों के कारण इसे खुद सत्ता पक्ष के भीतर से ही कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इसी विरोध के कारण सरकार को सावधानी बरतते हुए इससे जुड़ी संयुक्त संसदीय समिति की बैठक को भी रद्द करना पड़ा है।
सरकार के पास विधेयकों को पारित कराने के लिए कितना समर्थन?
मौजूदा समय में एनडीए के पास 293 सांसद हैं। इनमें भाजपा के 240 सांसद हैं, जबकि सहयोगी दलों के 53 सांसद भी शामिल हैं।
1. टीएमसी में टूट: तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट का दावा है कि उनके पास कुल 28 सांसदों में से 19-20 सांसदों का समर्थन है। ऐसे में अगर यह सांसद एनडीए को समर्थन देते हैं तो इस गठबंधन को कुल 313 सांसदों तक का समर्थन मिल सकता है।
2. शिवसेना में टूट: वहीं, शिवसेना के भी नौ में से छह सांसद टूट चुके हैं। यह सांसद शिंदे गुट के साथ आए हैं, जो कि एनडीए का अंग हैं। इस लिहाज से एनडीए का कुल समर्थन 320 तक पहुंच सकता है।
3. द्रमुक-कांग्रेस में फूट: तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के बाद विजय की पार्टी टीवीके को कांग्रेस ने समर्थन दे दिया। इसे लेकर द्रमुक ने नाराजगी जताई है और कांग्रेस पर अपने चुनाव पूर्व बने गठबंधन को तोड़ने का आरोप लगाया। नाराजगी जताते हुए द्रमुक हाल ही में हुई विपक्षी गठबंधन- इंडिया की बैठक में भी नहीं पहुंचा था। अटकलें लग रही हैं कि द्रमुक मुद्दों के आधार पर एनडीए सरकार को समर्थन दे सकती है। द्रमुक से 22 सांसद हैं। ऐसा होता है तो एनडीए का आंकड़ा बढ़कर 342 हो जाएगा।
..तो क्या लोकसभा में अहम विधेयक पारित हो सकते हैं?
यूं तो केंद्र सरकार की तरफ से जो विधेयक पेश किए जा रहे हैं, उन्हें साधारण बहुमत से पारित कराया जा सकता है। हालांकि, कुछ विधेयक संविधान संशोधन से जुड़े हैं, जिन्हें पारित कराने के लिए सरकार को कुछ टूटे हुए सांसदों के साथ विपक्ष के कुछ दलों के अपने पक्ष में आने की उम्मीद करनी होगी।
परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयकों को लोकसभा में पारित कराने के लिए सरकार को लोकसभा के कुल सदस्यों की संख्या का दो-तिहाई समर्थन हासिल करना अनिवार्य है। यानी 543 सांसदों वाले सदन में कम से कम 362 सांसदों का समर्थन। मौजूदा समय में सदन में 540 सांसद हैं। यानी एनडीए को 360 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी। फिलहाल उसके 293 सांसद हैं और टीएमसी-शिवसेना में टूट से उसे अधिकतम 27 सांसदों का अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है। यानी उसका आंकड़ा 320 तक पहुंच सकता है। यानी अब भी 360 के जादुई आंकड़े से 40 सीट दूर। द्रमुक के 22 सांसदों का समर्थन मिलता है तो ये आंकड़ा 242 तक पहुंचेगा। यानी जादुई आंकड़े से 18 कम।
विपक्ष के पास क्या मुद्दे, लोकसभा-राज्यसभा में हंगामा क्यों तय?
1. नीट पेपर लीक और छात्रों के मुद्दे
विपक्ष की तरफ से नीट परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं को जोर-शोर से उठाने की बात कही गई है। विपक्ष छात्रों के विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है। खुद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर मुखरता दिखाई है।
2. राम मंदिर चंदा चोरी का आरोप
विपक्ष, खासकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए आए चंदे में कथित गबन के मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे। विपक्षी नेताओं ने इस मामले में ट्रस्ट के वित्तीय मामलों की एक स्वतंत्र जांच कराने और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर पर उनके अनशन से जबरन हटाकर अस्पताल ले जाने की पुलिस की कार्रवाई का विपक्ष कड़ा विरोध कर रहा है। माना जा रहा है कि विपक्ष इस मुद्दे को सरकार के विरोध में उठाएगा, जिसे लेकर हंगामे के भी आसार हैं।4. मणिपुर की स्थिति
विपक्षी दल इस सत्र में मणिपुर के हालातों पर भी सरकार से चर्चा और जवाबदेही की मांग करेंगे।5. आर्थिक और नीतिगत मुद्दे
विपक्ष महंगाई, भ्रष्टाचार, घोटालों, पेट्रोल में इथेनॉल और विदेश नीति की विफलताओं जैसे विषयों पर सरकार को घेरेगा। इसके अलावा विपक्षी दल सरकार पर संस्थाओं पर कब्जे और राजनीतिक दलों को तोड़ने का आरोप लगाते हुए इस मुद्दे को भी संसद में उठाएंगे। इसे लेकर पहले ही रविवार को विपक्ष ने सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का बहिष्कार कर दिया था।







