भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने पुलिस कार्रवाई का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि इस मामले की न्यायिक जांच चल रही है, इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी भी तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
इसके साथ ही उन्होंने भरत तिवारी के समर्थन में आयोजित महापंचायत में शामिल नहीं होने की वजह भी स्पष्ट की।
चिराग पासवान जो करेंगे, जरूरी नहीं हम भी वही करें- मांझी
चिराग पासवान के भोजपुर जाकर भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात करने के सवाल पर मांझी ने कहा, ‘इस मामले पर हमारा रुख शुरू से स्पष्ट है। पुलिस ने जो कार्रवाई की है, वह परिस्थितियों के अनुसार सही कार्रवाई है। नहीं तो पुलिसकर्मी ही मारे जाते। इस मामले की न्यायिक जांच बैठ चुकी है, इसलिए अभी ज्यादा टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।’
भरत तिवारी एनकाउंटर को ठहराया जायज
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, ‘अगर वह पूरी तरह निर्दोष थे, तो उनके खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC/ST) एक्ट के तहत मामला क्यों दर्ज था? जो रिवॉल्वर दिखाई जा रही है, पहले यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि उसके लिए वैध लाइसेंस था या नहीं। अगर पुलिस की मंशा मारने की होती, तो गोली सीने में मारी जाती। पुलिस ने नियमानुसार कार्रवाई की और कमर के नीचे गोली चलाई।’
पुलिस का उद्देश्य जान लेना नहीं था- जीतन राम मांझी
जीतन राम मांझी ने आगे कहा, ‘पुलिस का उद्देश्य जान लेना नहीं, बल्कि आरोपी को रोकना और काबू करना था। यदि इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई, तो यह अलग बात है, लेकिन पुलिस ने मारने की नीयत से गोली नहीं चलाई। मेरा मानना है कि पुलिस ने अपना काम सही तरीके से किया।’
एनकाउंटर पर केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘पुलिस ने परिस्थितियों के अनुसार सही कार्रवाई की। उनका कहना था कि यदि पुलिस कार्रवाई नहीं करती तो पुलिसकर्मियों की जान भी जा सकती थी।’







