बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज दिल्ली दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के साथ महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। इस बैठक में बिहार की कई बड़ी सड़क और पुल परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा होगी। राज्य सरकार इन परियोजनाओं के लिए केंद्र से वित्तीय स्वीकृति और आवश्यक राशि उपलब्ध कराने का अनुरोध करेगी। मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के बीच होने वाली बैठक का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा करीब 15 हजार करोड़ रुपये की सड़क और पुल परियोजनाओं को गति देना है। इन परियोजनाओं के माध्यम से बिहार के सड़क नेटवर्क को मजबूत करने और आवागमन को अधिक सुगम बनाने की योजना है।
चार नए रेलवे ओवरब्रिज (ROB) का प्रस्ताव
बैठक में डुमराव, विक्रमगंज, सफिया सराय और जहानाबाद में नए रेलवे ओवरब्रिज (ROB) के निर्माण पर चर्चा होगी। इन परियोजनाओं के लिए केंद्र से मंजूरी और वित्तीय सहयोग मांगा जाएगा। इन पुलों के बनने से रेलवे फाटकों पर लगने वाले जाम से राहत मिलेगी और लोगों की आवाजाही आसान होगी।
अरवल-बिहारशरीफ सड़क परियोजना पर जोर
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अरवल-बिहारशरीफ पथ परियोजना को भी बैठक में प्रमुखता से उठाएंगे। यह सड़क परियोजना दक्षिण और मध्य बिहार के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करेगी, जिससे व्यापार, परिवहन और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।
इसके साथ ही बैठक में बेतिया, समस्तीपुर और औरंगाबाद बाइपास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी होगी। इन बाइपास के निर्माण से शहरों में ट्रैफिक का दबाव कम होगा और लंबी दूरी के वाहनों की आवाजाही अधिक सुगम हो सकेगी।
जयनगर में कमला नदी पर दो नए पुलों का प्रस्ताव
मुख्यमंत्री जयनगर में कमला नदी पर दो नए पुलों के निर्माण का प्रस्ताव भी केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखेंगे। इन पुलों के निर्माण से मिथिलांचल क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और सीमावर्ती इलाकों के लोगों को आवागमन में बड़ी सुविधा मिलेगी।
मुख्यमंत्री सभी प्रमुख परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार से जल्द वित्तीय स्वीकृति और आवश्यक बजट जारी करने का आग्रह करेंगे, ताकि निर्माण कार्य समय पर शुरू हो सके और विकास योजनाओं में तेजी आए।
राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा दौरा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का यह दिल्ली दौरा केवल विकास परियोजनाओं तक सीमित नहीं माना जा रहा है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सड़क और आधारभूत संरचना से जुड़ी परियोजनाओं की समीक्षा और उन्हें केंद्र की मंजूरी दिलाना बताया गया है। लेकिन इस दौरे के दौरान मुख्यमंत्री का कई और लोगों से मुलाकात और बैठक की भी संभावना है।
केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद काम शुरू
केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। सड़क निर्माण विभाग ने शहरी क्षेत्रों में यातायात की भीड़ को कम करने और जिलों के बीच संपर्क को बेहतर बनाने के लिए बेतिया, समस्तीपुर और औरंगाबाद के लिए नए बाईपास प्रस्तावित किए हैं। इसके अतिरिक्त, जयनगर में कमला नदी पर दो नए पुलों के निर्माण के साथ-साथ शहर के लिए एक नए बाईपास के निर्माण के लिए 2,200 करोड़ रुपये से अधिक के डीपीआर तैयार किए गए हैं।
तीन बड़े प्रोजेक्ट निभाएंगे अहम भूमिका
| प्रोजेक्ट के नाम | कितनी है लागत? |
| मसरख- चकिया | भित्था मोर रोड: 146 किलोमीटर लंबे राजमार्ग की अनुमानित लागत 8,671.80 करोड़ रुपये है। |
| अरवल-बिहार शरीफ रोड | 89 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर जिसकी अनुमानित परियोजना लागत 3,844.69 करोड़ रुपये है। |
| बारबीघा-पंजवारा सड़क और सतीघाट पुल | एक रणनीतिक संपर्क परियोजना जिसकी अनुमानित लागत 974.37 करोड़ रुपये है। |
डुमरांव, विक्रमगंज और जहानाबाद में आरओबी
राज्य सरकार ने डुमरांव, बिक्रमगंज और जहानाबाद में नए रेलवे ओवरब्रिज (ROB) बनाने की योजना भी बनाई है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य रेलवे क्रॉसिंग पर होने वाली देरी को खत्म करना, सड़क सुरक्षा में सुधार करना और यातायात की सुगम आवाजाही सुनिश्चित करना है। सड़क निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने कहा कि बिहार सरकार और केंद्रीय मंत्रालय राज्य के परिवहन बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए निकट समन्वय में काम कर रहे हैं।
विभाग के सचिव ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि मंत्रालय द्वारा उठाए गए सभी तकनीकी आपत्तियों का निर्धारित समय सीमा के भीतर समाधान कर दिया गया है, जिससे परियोजनाओं की शीघ्र मंजूरी और क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। तीन मेगा परियोजनाओं की कुल लागत 13,000 करोड़ रुपये से अधिक है।
तीन परियोजना में 13 हजार करोड़ का निवेश
इन तीनों परियोजनाओं में कुल प्रस्तावित निवेश का 13,000 करोड़ रुपये से अधिक का हिस्सा शामिल है। सड़क निर्माण विभाग के अनुसार, नए बाईपास भीड़भाड़ वाले शहरी केंद्रों से होकर गुजरने वाले यातायात को दूसरी दिशा में मोड़ देंगे, जबकि राजमार्ग, पुल और रेलवे ओवरब्रिज यात्रा दक्षता में सुधार करेंगे, आवागमन के समय को कम करेंगे और बिहार के समग्र सड़क नेटवर्क को मजबूत करेंगे।







