बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने अपने खिलाफ साजिश रचने, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, उनकी छवि धूमिल करने और जान-माल की सुरक्षा को खतरा बताते हुए पटना के सचिवालय थाने में विस्तृत एफआईआर दर्ज कराई है. पटना के सचिवालय थाने को सौंपे गए अपने आधिकारिक शिकायती पत्र में तेज प्रताप ने आकाश यादव और अनुष्का यादव समेत कुल 8 लोगों को नामजद करते हुए तेज प्रताप ने बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं. एफआईआर में तेज प्रताप यादव ने आरोप लगाया है कि कुछ लोग सुनियोजित तरीके से उनके नाम और प्रतिष्ठा का दुरुपयोग कर रहे हैं. आवेदन के अनुसार, उनके नाम से फर्जी कागजात तैयार किए गए, सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से भ्रामक प्रचार किया गया और उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई.
तेज प्रताप यादव ने पुलिस को दिए आवेदन में कहा है कि आरोपितों की गतिविधियों से उन्हें और उनके परिवार को जान-माल का खतरा महसूस हो रहा है. आवेदन में यह भी दावा किया गया है कि पूरे घटनाक्रम के पीछे एक संगठित साजिश है, जिसका उद्देश्य उन्हें राजनीतिक और सामाजिक रूप से बदनाम करना है.तेज प्रताप यादव ने आरोप लगाया है कि इन लोगों ने मिलकर षड्यंत्रपूर्वक फर्जी दस्तावेज तैयार किए, उनका दुरुपयोग किया तथा उनके खिलाफ गलत और भ्रामक सूचनाएं प्रसारित कीं. इनमें पांच बेहद गंभीर आरोप हैं.
आरोप 1: सुनियोजित तरीके से ब्लैकमेलिंग और मानसिक प्रताड़ना
तेज प्रताप यादव ने अपनी प्राथमिकी में पहला और सबसे बड़ा आरोप गंभीर ब्लैकमेलिंग का लगाया है. उन्होंने पुलिस को लिखित रूप में बताया है कि नामजद किए गए सभी आरोपी एक सोची-समझी रणनीति के तहत पिछले लंबे समय से उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं. आरोपियों का मुख्य कृत्य उन्हें लगातार डराना-धमकाना और ऐसी परिस्थितियां पैदा करना है जिससे वे मानसिक तनाव के दौर से गुजरें.

तेज प्रताप यादव ने आकाश यादव और अनुष्का यादव समेत 8 आलोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. इसको लेकर पुलिस से निष्पक्ष जांच की अपील भी है.
आरोप 2: अवैध धन उगाही और मोटी रंगदारी वसूलने का प्रयास
सचिवालय थाने को दिए गए पत्र के अनुसार, तेज प्रताप यादव ने विरोधियों पर ‘अवैध धन वसूली’ यानी जबरन वसूली का बेहद संगीन आरोप मढ़ा है. तेज प्रताप का दावा है कि यह पूरा गिरोह उन पर दबाव बनाकर मोटी रकम ऐंठने की फिराक में है. इसके लिए बकायदा पैसों के लेनदेन और वित्तीय जाल बिछाने की कोशिश की जा रही है, जिसके पुख्ता और डिजिटल सबूत वे खुद जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों को सौंपने की बात कह रहे हैं.
आरोप 3: राजनीतिक-सामाजिक छवि को मटियामेट करने की साजिश
बिहार के पूर्व मंत्री ने अपनी एफआईआर में साफ लिखा है कि आरोपियों का यह कुकृत्य उनकी सामाजिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा को पूरी तरह नष्ट करने के उद्देश्य से किया जा रहा है . उन्होंने आरोप लगाया कि झूठी और मनगढ़ंत कहानियां बुनकर, सोशल मीडिया और मीडिया के विभिन्न माध्यमों से उनका गलत और भ्रामक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, ताकि जनता के बीच उनकी छवि को एक विलेन (खलनायक) की तरह पेश किया जा सके.
आरोप 4: झूठे मुकदमों के जाल में फंसाने का खतरनाक जाल
तेज प्रताप यादव ने अपनी प्राथमिकी में यह गंभीर आशंका जताई है कि विरोधी खेमे के लोग उनके खिलाफ कोर्ट और थानों में फर्जी और मनगढ़ंत मुकदमे दर्ज करा रहे हैं. उनका इशारा सीधे तौर पर आकाश यादव द्वारा हाल ही में पटना कोर्ट में दायर किए गए उस नालिसी मुकदमे की तरफ था, जिसमें तेज प्रताप पर जबरन घर में घुसने का आरोप लगाया गया है. तेज प्रताप ने इसे पूरी तरह से झूठा और उन्हें फंसाने की एक सोची-समझी स्क्रिप्ट बताया है.

तेज प्रताप पर कोर्ट में मुकदमा में अनुष्का यादव के घर में जबरन घुसने और धमकी का आरोप लगाया है. इसके काउंटर में तेज प्रताप यादव ने भी पटना के सचिवालय थाना में प्राथमिकी दर्ज करवाई है.
आरोप 5: जान-माल को गंभीर नुकसान पहुंचाने की धमकी
प्राथमिकी के सबसे अंत में तेज प्रताप ने अपनी सुरक्षा को लेकर सबसे बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है. उन्होंने लिखित तौर पर कहा है कि वर्तमान में उनके पास पर्याप्त सुरक्षा या अंगरक्षक (बॉडीगार्ड) उपलब्ध नहीं हैं. इस सुरक्षा के अभाव का फायदा उठाकर आरोपी उन्हें लगातार जान-माल की क्षति पहुंचाने की धमकी दे रहे हैं. तेज प्रताप ने आशंका जताई है कि ये लोग भविष्य में उन पर किसी भी तरह का जानलेवा हमला कर सकते हैं, जिसके कारण वे अपनी निजी सुरक्षा को लेकर इस वक्त बेहद डरे और सहमे हुए हैं.
अब एफआईआर के आरोपों की सच्चाई जानेगी पुलिस
तेज प्रताप यादव ने पुलिस से आरोपियों के व्हाट्सएप चैट, कॉल डिटेल और बैंक खातों की सघन जांच कर निष्पक्ष और गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है. जानकारी के अनुसार, सचिवालय थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और अब पुलिस आवेदन में लगाए गए आरोपों, उपलब्ध दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाएगी. ऐसे में जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि एफआईआर में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और किन लोगों की भूमिका सामने आती है.







