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पीके शाही ने इस्तीफा क्यों दिया …………

UB India News by UB India News
June 20, 2026
in पटना, बिहार
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पीके शाही ने इस्तीफा क्यों दिया …………
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बिहार की सियासत और कानूनी गलियारों में इस वक्त सत्यदर्शी संजय (एसडी संजय) के नाम की खूब चर्चा है। 18 जून 2026 को बिहार के विधि विभाग ने अधिसूचना जारी कर उन्हें राज्य का 23वां महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) बना दिया।

लेकिन इस नई नियुक्ति से कहीं ज्यादा चर्चा नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जाने वाले प्रशांत कुमार शाही (पीके शाही) के इस्तीफे की है।

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16 जनवरी 2023 से इस कुर्सी पर काबिज और पूर्व शिक्षा मंत्री रहे शाही के इस कदम के पीछे सिर्फ निजी कारण नहीं, अपितु सत्ता परिवर्तन और गहरे नीतिगत मतभेद बड़े कारण हैं।

पीके शाही के इस्तीफा देने के 4 बड़े कारण

1. सत्ता बदली तो ट्यूनिंग बदल गई

राज्य की राजनीति में जब भी बड़ा प्रशासनिक या राजनीतिक उलटफेर होता है, उसका सीधा असर महाधिवक्ता कार्यालय पर पड़ता है।

  • महाधिवक्ता का पद संवैधानिक जरूर है, लेकिन व्यवहार में यह पूरी तरह राज्य सरकार की नीतियों का रक्षक होता है। पीके शाही सीधे तौर पर नीतीश कुमार के कोर ग्रुप और उनके भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते थे।
  • नीतीश कुमार के CM पद से हटने और सम्राट चौधरी के ‘ड्राइविंग सीट’ पर आने के बाद सरकार की कार्यशैली और प्राथमिकताओं में भारी बदलाव आया। नई सरकार अपने हिसाब से कानूनी टीम की रूपरेखा तैयार करना चाहती थी।
  • हाईकोर्ट और सचिवालय के गलियारों में यह साफ था कि नई व्यवस्था में पीके शाही की वह पुरानी ‘ट्यूनिंग’ और राजनीतिक रसूख काम नहीं कर पा रहा था, जो नीतीश राज में था। इसी वैचारिक और प्रशासनिक दूरी के कारण शाही असहज थे।

2. रिशु श्री टेंडर घोटाले से बिगड़ गई बात

पीके शाही के इस्तीफे की सबसे तात्कालिक और बड़ी वजह ‘रिशु श्री टेंडर घोटाला’ माना जा रहा है। यह मामला सिर्फ एक टेंडर का नहीं, बल्कि सरकार इसके सहारे ‘बड़ी मछलियों’ (सीनियर ब्यूरोक्रेट्स और नेताओं) पर अपनी पकड़ बढ़ा रही है।

राज्य सरकार इस कथित घोटाले को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपनाए हुए है। इसी सिलसिले में सरकार को सहयोग करने वाले एक सीनियर आईएएस (IAS) अधिकारी को निलंबित भी किया जा चुका है। सरकार इस मामले में सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करना चाहती थी।

  • विधि विभाग के सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार ने इस टेंडर घोटाले में आगे की कठोर कार्रवाई और बड़ी हस्तियों पर शिकंजा कसने के लिए एडवोकेट जनरल पीके शाही से लीगल ओपिनियन (कानूनी राय) मांगी थी।
  • इस पर पीके शाही की राय थी कि कोर्ट में इस मामले में सरकार का पक्ष कानूनी रूप से बहुत कमजोर है। अगर बिना पुख्ता सबूतों के सरकार आगे बढ़ती है, तो अदालत में यह केस टिक नहीं पाएगा और सरकार को मुंह की खानी पड़ सकती है।
  • सरकार चाहती थी कि महाधिवक्ता उनके कड़े रुख के हिसाब से कानूनी रास्ता निकालें। सरकार कानून की परवाह किए बिना परसेप्शन की लड़ाई लड़ना चाहती है।
  • जबकि, पीके शाही कानून के दायरे में रहकर काम करना चाहते थे। वह कानूनी सीमाओं से बाहर जाने को तैयार नहीं थे। इसी वैचारिक टकराव के बाद उन्होंने इस्तीफे की पेशकश कर दी।
पीके शाही को नीतीश कुमार का काफी करीबी माना जाता है। नीतीश कुमार नवंबर 2005 में जब मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने पहली बार शाही को महाधिवक्ता बनाया। 5 साल बाद उनको शिक्षा मंत्री बनाया। 2023 में फिर महाधिवक्ता बनाया।
पीके शाही को नीतीश कुमार का काफी करीबी माना जाता है। नीतीश कुमार नवंबर 2005 में जब मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने पहली बार शाही को महाधिवक्ता बनाया। 5 साल बाद उनको शिक्षा मंत्री बनाया। 2023 में फिर महाधिवक्ता बनाया।

3. पीपी और एपीपी की नियुक्तियों पर टकराव

महाधिवक्ता कार्यालय और विधि विभाग के बीच का टकराव केवल बड़े घोटालों की जांच तक सीमित नहीं था, बल्कि यह रोजमर्रा के प्रशासनिक फैसलों और नियुक्तियों में भी सतह पर आ गया था।

  • हाईकोर्ट से लेकर जिला अदालतों तक सरकार का पक्ष रखने के लिए पब्लिक प्रोस्क्यूटर (PP) और एडिशनल पब्लिक प्रोस्क्यूटर (APP) की फौज तैनात की जाती है। इन पदों पर किसकी तैनाती होगी, इसमें पारंपरिक रूप से महाधिवक्ता की राय का बड़ा वजन होता है।
  • नई सरकार के गठन के बाद विधि विभाग के मंत्री संजय टाइगर और अधिकारियों की अपनी सूचियां थीं, जबकि महाधिवक्ता कार्यालय अपनी मेरिट और पसंद के वकीलों को आगे बढ़ाना चाहता था।
  • सूत्रों के मुताबिक, इन नियुक्तियों और सरकार के पैनल में शामिल अन्य वकीलों के नामों को लेकर विभागीय मंत्री और पीके शाही के बीच कई दौर की बैठकों में असहमति बनी। जब यह विरोधाभास कोर्ट रूम के भीतर सरकार के मुकदमों के लचर प्रदर्शन के रूप में दिखने लगा, तो पीके शाही ने गरिमापूर्ण तरीके से हटना ही बेहतर समझा।

4. पुरानी नीतियों को बदलने के मूड में नहीं थे शाही

भारतीय संविधान के ऑर्टिकल- 165 के तहत महाधिवक्ता का पद भले ही संवैधानिक है, लेकिन व्यावहारिक रूप से यह पूरी तरह से राजनीतिक विश्वास और सरकार की नीतियों पर टिका होता है।

एडवोकेट जनरल केवल एक वकील नहीं, बल्कि सरकार का सबसे करीबी कानूनी सलाहकार होता है। सरकार के कई संवेदनशील एजेंडे, कैबिनेट के गोपनीय निर्णय और भविष्य की कानूनी रणनीतियां महाधिवक्ता के साथ ही साझा की जाती हैं।

  • ऐसे में जब सत्ता बदलता है, तो नई सरकार को अपनी नई योजनाओं, कानूनों और फैसलों को अदालत में सही साबित करने के लिए एक ऐसे कानूनी सेनापति की जरूरत होती है जो उनकी सोच, विचारधारा और प्राथमिकताओं को बेहतर तरीके से समझता हो।
  • नई सरकार पिछली सरकार के कई फैसलों, टेंडरों या कानूनों की समीक्षा करना चाहती है या अदालतों में चल रहे मुकदमों में राज्य का रुख बदलना चाहती है। पीके शाही इस पर राजी नहीं थे। वे नीतीश के नीतियों के रक्षक थे, जबकि नई सरकार नए एजेंडे के साथ कोर्ट में खड़ा होना चाहती थी।

अब नए महाधिवक्ता SD संजय को जानिए…

पीके शाही के जाने के बाद सम्राट सरकार ने भाजपा से जुड़े सीनियर वकील और भारत सरकार के एडीशनल सॉलिसिटर जनरल एसडी संजय को नया महाधिवक्ता बनाया है। 18 जून की शाम उन्होंने पदभार ग्रहण कर लिया। पीके शाही ने 15 जून को महाधिवक्ता पद से त्यागपत्र दे दिया था जिसके बाद यह पद रिक्त हो गया था।

  • नए महाधिवक्ता एसडी. संजय ने पटना हाईकोर्ट से वकालत शुरू की थी। उन्हें संवैधानिक विधि, जनहित, सिविल और आपराधिक मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है।
  • 2010 में उन्हें राज्य का अपर महाधिवक्ता बनाया गया था। वे 2014 तक इस पद पर रहे। इसके बाद 2015 में केंद्र सरकार ने उन्हें अपना एडीशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) नियुक्त किया।
  • हाल ही में 11 सितंबर 2024 को भारत सरकार ने उन्हें फिर से तीन साल के लिए एएसजी बनाया था।
  • पत्नी सुशीला अग्रवाल भी एक एडवोकेट हैं। बेटा अक्षत और बहू दिशा भी पेशे से एडवोकेट हैं और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं।
  • वहीं, उनकी बेटी और दामाद सात समंदर पार अमेरिका की सिलिकॉन वैली में रहते हैं।
एसडी संजय का संबंध RSS से भी है। वह पार्टी के भरोसेमंद माने जाते हैं।
एसडी संजय का संबंध RSS से भी है। वह पार्टी के भरोसेमंद माने जाते हैं।

शिक्षक के बेटे ने डीयू से की है लॉ की पढ़ाई

  • संजय का जन्म एक साधारण मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता एक शिक्षक थे। उनकी शुरुआती पढ़ाई सर गणेश दत्त पाटलिपुत्र स्कूल में हुई।
  • इसके बाद उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी के वाणिज्य महाविद्यालय से स्नातक (ऑनर्स) की डिग्री ली। आगे की पढ़ाई के लिए वे दिल्ली चले गए और दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से लॉ की डिग्री हासिल की।

पार्टी के भरोसेमंद सिपाही

एसडी संजय सिर्फ कानूनी जानकार ही नहीं हैं, अपितु BJP के बेहद भरोसेमंद भी माने जाते हैं।

  • 2020 बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने उन पर बड़ा भरोसा जताया और उन्हें चुनाव प्रबंधन समिति का प्रदेश प्रमुख बनाया। इसके साथ ही वे पार्टी की ‘संकल्प पत्र’ (घोषणापत्र) समिति के भी सदस्य रहे।
  • पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा और मैनेजमेंट को देखते हुए 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बीजेपी ने उन्हें एक बार फिर चुनाव प्रबंधन समिति का प्रमुख नियुक्त किया था।
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