पश्चिम बंगाल की राजनीति में हुई एक बड़ी बगावत ने दिल्ली से लेकर पटना और अमरावती तक के राजनीतिक गुणा-गणित को गड़बड़ा दिया। टीएमसी के 20 सांसदों के बागी होकर एनडीए में शामिल होने से भारतीय जनता पार्टी बैसाखियों के सहारे से पूरी तरह मुक्त हो गई। अब केंद्र की मोदी सरकार 300 के पार पहुंच चुकी है। इस नए अपडेट के बाद जदयू प्रमुख नीतीश कुमार और टीडीपी चीफ चंद्रबाबू नायडू की ‘बार्गेनिंग पावर’ और ‘किंगमेकर’ वाली ताकत नहीं रही। अब अगर ये दोनों दल केंद्र सरकार से समर्थन वापस भी ले लें, तब भी मोदी सरकार संसद में पूरी तरह सुरक्षित रहेगी।
अब 300 के पार मोदी सरकार
2024 के लोकसभा चुनाव के बाद केंद्र की सत्ता के समीकरण बैसाखियों पर टिके नजर आ रहे थे, जो अब पूरी तरह बदल चुके हैं। बागियों ने मोदी सरकार की मुराद पूरी कर दी।
- 2024 के चुनाव में बीजेपी को 240 सीटें मिली थीं, जो बहुमत (272) से 32 सीटें कम थीं।
- सरकार चलाने के लिए टीडीपी के 16 और जदयू के 12 सांसदों समेत 11 अन्य पार्टियों के 24 सांसदों (कुल 282 सांसद) का समर्थन हासिल था।
- अब टीएमसी से अलग हुए 20 बागी सांसदों (NCPI) के एनडीए में आने से अब कुल आंकड़ा 312 पर पहुंच गया है, जो बहुमत से 40 ज्यादा है।
- जदयू और टीडीपी दोनों भी समर्थन वापस ले लें, तो भी एनडीए के पास 284 सांसद बचेंगे, जो बहुमत के आंकड़े से 12 अधिक हैं।
नीतीश और नायडू ‘न्यूट्रलाइज’
इससे पहले नीतीश कुमार यूसीसी और ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ जैसी केंद्र की बड़ी नीतियों पर अपनी शर्तों को लेकर दबाव बनाते थे क्योंकि बीजेपी को हर बिल पास कराने के लिए जदयू के 12 वोटों की सख्त जरूरत थी। लेकिन अब बीजेपी के पास बागी टीएमसी सांसदों का मजबूत बैकअप तैयार है। इसके अलावा शिव सेना (उद्धव) से भी 7-8 सांसद आने को तैयार हैं। लिहाजा, केंद्र सरकार अब पूरी तरह अपने मोड में आ चुकी है। अब नीतीश कुमार और चंद्र बाबू नायडू की दखलअंदाजी पूरी तरह खत्म हो गई है।
JDU को तीसरा मंत्री मिलना मुश्किल
20 जून के आसपास होने वाले मोदी कैबिनेट फेरबदल और विस्तार में जदयू कोटे से एक और मंत्री को शामिल किए जाने की पूरी संभावना थी। नीतीश कुमार की नजर बिहार के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद कुछ भारी-भरकम मंत्रालयों पर थी। लेकिन अब 20 नए सांसदों के धड़े को कैबिनेट में जगह मिलने की चर्चा के बीच, जदयू को तीसरा मंत्री पद देने की मांग को बीजेपी आसानी से दरकिनार कर सकती है।
बिहार में भी कम होगा नीतीश का असर
अप्रैल 2026 में नीतीश कुमार के इस्तीफे और राज्यसभा जाने के बाद बीजेपी के सम्राट चौधरी बिहार के नए मुख्यमंत्री बने थे। इसके बावजूद केंद्र में जदयू की मजबूती के कारण बिहार सरकार के फैसलों में नीतीश कुमार का अच्छा दखल था। अब केंद्र में निर्भरता खत्म होते ही बिहार में बीजेपी पूरी तरह स्वतंत्र होकर काम कर सकती है और ट्रांसफर-पोस्टिंग से लेकर आगामी योजनाओं में जदयू का दबाव पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। बिहार में भी अगर जेडीयू को हटा दिया जाए तो बहुमत से 4-5 सीट ही बीजेपी कम है।
‘बराबरी’ का दर्जा भी खो सकती है JDU
बिहार में अब तक सीट शेयरिंग के फॉर्मूले में जदयू खुद को हमेशा बीजेपी के बराबर या बड़े भाई की भूमिका में रखती आई थी। नीतीश कुमार के पाला बदलने के डर से बीजेपी हमेशा झुकती थी, लेकिन अब यह डर खत्म हो चुका है। आगामी चुनावों में बीजेपी अब बड़े भाई की भूमिका में आकर जदयू को बेहद कम सीटों पर सिमटने के लिए मजबूर कर सकती है, जिससे बिहार में जदयू की राजनीतिक हैसियत काफी कमजोर हो जाएगी।







