ट्रंप बोले- होर्मुज हमेशा रहेगा टोल फ्री
ड्राफ्ट में क्या-क्या है?
- 30 दिनों के अंदर होर्मुज से अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह हटेगी.
- ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात पर लगे प्रतिबंध निलंबित किए जाएंगे.
- लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध स्थायी रूप से बंद होगा.
- होर्मुज जलडमरूमध्य 30 दिनों के भीतर ईरानी प्रबंधन के तहत दोबारा खोला जाएगा.
- अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को ईरान के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण प्लान पेश करना होगा.
24 अरब डॉलर की फ्रीज रकम भी होगी रिलीज?
परमाणु मुद्दे पर 60 दिन की नई जंग
Iran-US Peace Deal Live: ईरानी सेना का दावा- अमेरिका और इजरायल को झुकने पर मजबूर किया
अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की घोषणा के बाद ईरान के खात्म अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने बयान जारी कर इसे अपनी बड़ी सफलता बताया है. सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, ईरानी सेना ने देश की जनता और सशस्त्र बलों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि ईरान ने इस संघर्ष के दौरान मजबूती और दृढ़ता का प्रदर्शन किया. बयान में कहा गया कि ईरानी जनता और सशस्त्र बलों की एकजुटता ने यह साबित कर दिया कि अमेरिका और इजरायल के पास अंततः समझौता स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा.a
समझौते पर इजरायल में बगावती सुर: अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते को लेकर इजरायल के भीतर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं. इजरायल के अति-दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने साफ कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता इजरायल पर किसी भी तरह से लागू नहीं होता. सोशल मीडिया पर जारी बयान में बेन-गवीर ने कहा कि इजरायल अमेरिका का अधीनस्थ देश नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है. उन्होंने कहा कि यह ऐसा समझौता है जो इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करता, इसलिए इजरायल इससे बंधा हुआ नहीं है.
जमीन पर नहीं दिखा असर: अमेरिका-ईरान समझौते और लेबनान में हमले रोकने के दावों के बावजूद दक्षिणी लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई जारी रहने की खबरें सामने आई हैं. लेबनान की नेशनल न्यूज एजेंसी (NNA) के अनुसार, पिछले कुछ घंटों में इजरायली सेना ने कई अलग-अलग इलाकों में हमले किए. रिपोर्ट के मुताबिक, खियाम क्षेत्र में दो हवाई हमले किए गए, जबकि कफर तेबनित कस्बे में एक कार को ड्रोन हमले का निशाना बनाया गया. इस हमले में कुछ लोगों के घायल होने की सूचना है. इसके अलावा कफर तेबनित और नबातियेह अल-फौका इलाकों पर तोपखाने से भी गोलाबारी की गई. NNA ने यह भी दावा किया है कि इजरायली सेना ने हारिस-तिबनिन सड़क पर एक दूर से नियंत्रित विस्फोटक लगे M113 बख्तरबंद वाहन को उड़ा दिया. यह सड़क दक्षिणी लेबनान के प्रमुख शहर टायर की ओर जाती है.
इजरायल में बढ़ी बेचैनी: इजरायली राजनीतिक विश्लेषक गिडियन लेवी ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते को इजरायल और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की बड़ी हार करार दिया है. उनका कहना है कि ईरान के खिलाफ अभियान नेतन्याहू की लंबे समय से सबसे बड़ी राजनीतिक और रणनीतिक प्राथमिकता रहा है, लेकिन समझौता प्रक्रिया में इजरायल को पूरी तरह किनारे कर दिया गया. लेवी के मुताबिक, वार्ता में शामिल न किए जाने के बाद इजरायल केवल समझौते को कमजोर करने या बाधित करने की कोशिश कर सकता है. उन्होंने रविवार को बेरूत के दक्षिणी इलाकों पर हुए इजरायली हमलों को इसी संदर्भ में देखा और कहा कि इससे इजरायल को कोई रणनीतिक फायदा नहीं मिला.
समझौते पर नया विवाद: अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बावजूद इजरायल दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना नहीं हटाएगा. इजरायली सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्ट में यह दावा किया गया है. यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने समझौते की घोषणा करते हुए कहा था कि इसमें लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई समाप्त करने का प्रावधान शामिल है.
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अभी तक अमेरिका-ईरान समझौते या लेबनान से जुड़े मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की है. हालांकि इजरायली पक्ष का कहना है कि दक्षिणी लेबनान से वापसी फिलहाल उसकी योजना का हिस्सा नहीं है.
समझौता अंतिम रूप लेने से कुछ घंटे पहले नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने बेरूत के दहिया इलाके पर हमले का आदेश दिया था. इजरायल ने इसे हिज्बुल्लाह की ओर से इजरायली क्षेत्र पर हुई गोलीबारी का जवाब बताया. दोनों नेताओं ने कहा था कि इजरायल अपने क्षेत्र पर किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा.
ईरान के लिए राहत की संभावना: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के समझौते के बाद ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली ने संकेत दिया है कि यदि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर ठोस कदम उठाता है तो उस पर लगे प्रतिबंधों में राहत दी जा सकती है. चारों देशों के नेताओं ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जा सकता और इसी उद्देश्य से वे अमेरिका, ईरान और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं. संयुक्त बयान में कहा गया कि परमाणु मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए कूटनीतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाना जरूरी है.
पाकिस्तान ने जताई खुशी: पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते को महत्वपूर्ण सफलता करार दिया है. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सभी पक्षों की लगातार कूटनीतिक कोशिशों और राजनीतिक इच्छाशक्ति का नतीजा है. सोशल मीडिया पर जारी बयान में डार ने कहा कि यह समझौता अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भरोसा बढ़ाने वाला संदेश है और इससे वैश्विक बाजारों तथा विश्व अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिलने की उम्मीद है.
Iran-US Deal Live: ट्रंप के पूर्व सहयोगी ने इजरायल को सैन्य मदद रोकने की वकालत की
पूर्व अधिकारी का बड़ा बयान: ट्रंप प्रशासन में काम कर चुके और ईरान युद्ध को लेकर मतभेदों के बाद पद छोड़ने वाले पूर्व अमेरिकी अधिकारी जो केंट ने अमेरिका-ईरान युद्धविराम समझौते का स्वागत किया है. हालांकि उन्होंने कहा कि यदि वॉशिंगटन इस समझौते को लंबे समय तक टिकाऊ बनाना चाहता है तो उसे इजरायल को दी जाने वाली सैन्य और खुफिया सहायता बंद करने पर विचार करना चाहिए. जो केंट ने सोशल मीडिया पर लिखा कि इजरायल ने समझौते को पटरी से उतारने की हर संभव कोशिश की और भविष्य में भी ऐसा कर सकता है. उनके मुताबिक, अमेरिका को ऐसे सभी कारकों को नियंत्रित करना चाहिए जो उसे दोबारा युद्ध में खींच सकते हैं. केंट ने यह भी सुझाव दिया कि अमेरिका को चुपचाप अपने सैनिकों को उन खाड़ी सैन्य ठिकानों से हटा लेना चाहिए जो ईरान की पहुंच में हैं. उनका तर्क है कि इससे ईरान के कट्टरपंथी गुट अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर अमेरिका को फिर से संघर्ष में घसीट नहीं पाएंगे.
ट्रंप के लिए अहम दिन: अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की घोषणा ऐसे समय हुई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपना 80वां जन्मदिन मना रहे हैं. वॉशिंगटन से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप के लिए यह केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण क्षण है. बताया जा रहा है कि समझौते की प्रक्रिया इजरायल की हालिया सैन्य कार्रवाइयों के कारण पटरी से उतर सकती थी, लेकिन ट्रंप प्रशासन का मानना है कि अमेरिका ने पाकिस्तान और कतर जैसे मध्यस्थ देशों के सहयोग से वार्ता को सही दिशा में बनाए रखा. विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप पर अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी और विपक्ष दोनों की ओर से दबाव था, क्योंकि आलोचक लगातार कह रहे थे कि 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) से बाहर निकलने के बाद अमेरिका को कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिला.
तेहरान का स्पष्ट संदेश: ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा है कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित समझौते पर हस्ताक्षर के बाद शुरू होने वाली 60 दिन की वार्ता में सबसे बड़ा मुद्दा ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को समाप्त कराना होगा. ईरानी सरकारी मीडिया को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के खिलाफ लगाए गए सभी प्रतिबंधों को हटाना बातचीत की पहली प्राथमिकता है. गरीबाबादी ने यह भी कहा कि ईरान चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा पारित प्रतिबंधात्मक प्रस्तावों और निर्णयों को भी समाप्त किया जाए. ईरान लंबे समय से दुनिया के सबसे ज्यादा प्रतिबंध झेलने वाले देशों में शामिल रहा है.
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के समझौते की घोषणा के बाद एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शेयर बाजारों में जबरदस्त तेजी देखी गई है, जबकि तेल की कीमतों में तेज गिरावट आई है. जापान का निक्केई 225 सूचकांक शुरुआती कारोबार में 5 प्रतिशत से अधिक उछल गया, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 5.7 प्रतिशत चढ़ गया. ताइवान का ताइएक्स 2.7 प्रतिशत और ऑस्ट्रेलिया का ASX200 करीब 1.5 प्रतिशत मजबूत हुआ. वहीं अमेरिकी शेयर बाजारों के फ्यूचर्स में भी तेजी रही. S&P 500 से जुड़े फ्यूचर्स करीब 1 प्रतिशत और नैस्डैक फ्यूचर्स 1.6 प्रतिशत तक बढ़े. दूसरी ओर, वैश्विक तेल बाजार में राहत दिखी और ब्रेंट क्रूड की कीमत 4 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर लगभग 83.70 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई.
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर कई अहम बातें कही हैं.
- इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (MoU): गरीबाबादी ने कहा कि समझौते के मसौदे को अंतिम रूप दे दिया गया है और इस पर शुक्रवार को जिनेवा में औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे.
- युद्ध और नाकाबंदी खत्म होगी: उनके मुताबिक, समझौते के लागू होते ही सबसे पहले लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई समाप्त की जाएगी और ईरान पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी हटाई जाएगी.
- ईरान की प्रतिबद्धताओं का पालन: उन्होंने कहा कि ईरान अपने वादों और दायित्वों को शुक्रवार को आधिकारिक हस्ताक्षर के बाद लागू करना शुरू करेगा.
- सभी प्रतिबंध हटाने की मांग: आगामी वार्ता का पहला और सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा ईरान पर लगे सभी आर्थिक और वित्तीय प्रतिबंधों को पूरी तरह समाप्त करना होगा.
- UN और IAEA प्रस्तावों का मुद्दा: दूसरा प्रमुख एजेंडा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा ईरान के खिलाफ पारित प्रस्तावों और निर्णयों को खत्म करना है.
- परमाणु विवाद का समाधान: समझौते के अगले चरण में ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विवादों का स्थायी समाधान निकालने पर बातचीत होगी.
- आर्थिक सहयोग और निगरानी तंत्र: गरीबाबादी ने कहा कि दोनों पक्ष पुनर्निर्माण, आर्थिक विकास और निवेश सहयोग के लिए नई व्यवस्था तैयार करेंगे. साथ ही समझौते के पालन की निगरानी के लिए एक संयुक्त तंत्र भी बनाया जाएगा.
- एंटोनियो गुटेरेस (संयुक्त राष्ट्र महासचिव): गुटेरेस ने अमेरिका-ईरान समझौते को संघर्ष खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम बताया. उन्होंने कहा कि यह तत्काल और स्थायी युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और आगे की बातचीत का रास्ता तैयार करता है. उन्होंने पाकिस्तान, कतर, मिस्र, सऊदी अरब और तुर्किये समेत क्षेत्रीय देशों की भूमिका की भी सराहना की.
- रेसेप तैयप एर्दोगन (तुर्की के राष्ट्रपति): एर्दोगन ने समझौते को क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने पाकिस्तान की मध्यस्थता की तारीफ की और अमेरिका, ईरान, कतर तथा सऊदी अरब के प्रयासों की भी सराहना की.
- एंथनी अल्बनीज (ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री): अल्बनीज ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया लंबे समय से तनाव कम करने और युद्ध समाप्त करने की मांग करता रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि युद्ध जितना लंबा चलता, उसका असर उतना बढ़ता. साथ ही उन्होंने पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब और तुर्किये के प्रयासों की प्रशंसा की.
- कीर स्टार्मर (ब्रिटेन के प्रधानमंत्री): स्टार्मर ने समझौते को युद्ध समाप्त करने और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण कदम बताया. उन्होंने ट्रंप और मध्यस्थ देशों को बधाई देते हुए कहा कि यही वह प्रगति है जिसकी लंबे समय से उम्मीद की जा रही थी.
- डोनाल्ड ट्रंप (अमेरिकी राष्ट्रपति): ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच डील पूरी हो चुकी है. उन्होंने इसे अपनी कूटनीतिक सफलता बताया और कहा कि इससे होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा खोला जाएगा.
- शहबाज शरीफ (पाकिस्तान के प्रधानमंत्री): शरीफ ने घोषणा की कि दोनों पक्ष समझौते पर सहमत हो गए हैं. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लगातार मध्यस्थता कर रहा था और अब शांति पहले से कहीं ज्यादा करीब है.
इजरायल में बढ़ा विरोध: अमेरिका और ईरान के बीच उभरते शांति समझौते को लेकर इजरायल में आलोचना तेज हो गई है. रिपोर्टों के मुताबिक, कई इजरायली विश्लेषकों और राजनीतिक हलकों का मानना है कि यह समझौता ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान को कमजोर कर सकता है और तेहरान से जुड़ी मूल सुरक्षा चिंताओं का समाधान नहीं करता. इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि लेबनान में इजरायली हवाई हमलों से ईरान की नाराजगी के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच समझौता अभी भी तय समय पर आगे बढ़ रहा है. ट्रंप के अनुसार, प्रस्तावित डील के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाएगा. हालांकि इजरायल के भीतर कई आवाजें यह सवाल उठा रही हैं कि क्या यह समझौता ईरान की क्षेत्रीय गतिविधियों और सुरक्षा चुनौतियों को वास्तव में सीमित कर पाएगा या नहीं.
फंड रिलीज पर विवाद: अमेरिका ने ईरान के उस दावे को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि समझौते पर हस्ताक्षर के बाद 60 दिन की वार्ता शुरू होने से पहले तेहरान को उसकी जमी हुई अरबों डॉलर की संपत्तियां वापस मिल जाएंगी. CNN के मुताबिक, एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि यह दावा पूरी तरह गलत है. अधिकारी के अनुसार, यह ‘परफॉर्मेंस आधारित समझौता’ है और जब तक ईरान अपनी प्रतिबद्धताओं को लागू नहीं करता, तब तक कोई भी फंड जारी नहीं किया जाएगा. इससे पहले ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा था कि अगले चरण की वार्ता तभी आगे बढ़ेगी जब वॉशिंगटन पहले कुछ अहम वादे पूरे करेगा, जिनमें विदेशों में फंसी ईरानी संपत्तियों को मुक्त करना भी शामिल है.
समझौते पर मिली-जुली प्रतिक्रिया: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति में शीर्ष डेमोक्रेट सदस्य ग्रेगरी मीक्स ने अमेरिका-ईरान समझौता ज्ञापन (MoU) का सावधानीपूर्वक स्वागत किया है. हालांकि उन्होंने कहा कि यह युद्ध राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फैसला था, जिसकी कीमत अमेरिकी नागरिकों, सहयोगी देशों, वैश्विक बाजारों और आम लोगों को चुकानी पड़ी. सोशल मीडिया पर जारी बयान में मीक्स ने कहा कि ईरान से जुड़े विवादों का स्थायी समाधान केवल बातचीत और सत्यापित समझौतों के जरिए ही संभव है. उन्होंने तर्क दिया कि युद्ध न तो ईरानी शासन को बदल सकता है, न उसके मिसाइल और ड्रोन कार्यक्रम को खत्म कर सकता है और न ही क्षेत्रीय समूहों को मिलने वाले उसके समर्थन को रोक सकता है.
घोषणा के समय पर भी खींचतान: अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान नहीं चाहता था कि अमेरिका-ईरान समझौते की घोषणा ऐसी समयसीमा में हो जो सीधे तौर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जन्मदिन से जुड़ जाए. रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान ने आग्रह किया था कि घोषणा ईरान के समयानुसार आधी रात के बाद की जाए. अंततः घोषणा कुछ मिनट की देरी से हुई, जिससे ईरान में यह सोमवार को हुई, जबकि अमेरिका में अभी रविवार और ट्रंप का जन्मदिन था. अधिकारियों का कहना है कि समय को लेकर दोनों पक्षों के बीच संवेदनशीलता थी और अंत में ईरान की यह मांग आंशिक रूप से मान ली गई.
कूटनीतिक कोशिशें जारी: CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, कतर के मध्यस्थ 17 घंटे तक चली गहन वार्ता के बाद तेहरान से रवाना हो गए हैं. मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया कि अब इस सप्ताह दोहा में दोनों पक्षों के साथ अलग-अलग तैयारी बैठकों का आयोजन किया जाएगा. रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित औपचारिक हस्ताक्षर और तकनीकी स्तर की वार्ताओं की शुरुआत का रास्ता साफ किया जाएगा.
तेहरान ने रखीं शर्तें: ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित 60 दिन की वार्ता तभी आगे बढ़ेगी जब वॉशिंगटन पहले अपने तीन प्रमुख वादों को लागू करेगा. ईरानी मीडिया के मुताबिक, इनमें समुद्री नाकेबंदी समाप्त करना, सैन्य कार्रवाई और युद्ध जैसी स्थिति खत्म करना तथा ईरान की जमी हुई अरबों डॉलर की संपत्तियों को मुक्त करना शामिल है. गरीबाबादी ने कहा कि अमेरिका की ओर से इन प्रतिबद्धताओं को लागू करने और ईरान द्वारा उनकी पुष्टि करने के बाद ही तकनीकी स्तर की वार्ताएं शुरू होंगी. उन्होंने बताया कि कुछ प्रारंभिक व्यवस्थाओं पर पहले ही चर्चा हो चुकी है, जबकि इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर के बाद स्विट्जरलैंड में आगे की बैठकों में वार्ता की रूपरेखा, कार्य समूहों के गठन और अन्य प्रक्रियात्मक मुद्दों को अंतिम रूप दिया जाएगा.







