मुजफ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया है. अस्पताल के आईसीयू में लगी आग और धुएं के कारण 5 मरीजों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं. घायलों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है. कई मरीज बेड से उठकर बाहर निकलने की स्थिति में भी नहीं थे. दम घुटने के कारण कुछ मरीजों की मौके पर ही मौत हो गई.घटना के बाद सामने आई तस्वीरें हादसे की भयावहता को बयां कर रही हैं. आईसीयू के अंदर लगे बेड, मेडिकल उपकरण और मशीनें पूरी तरह जलकर खाक हो गई हैं. कई जगहों पर शीशे तोड़े गए, ताकि धुआं बाहर निकल सके और अंदर फंसे लोगों को बचाया जा सके.जानकारी के अनुसार, आग लगने के समय आईसीयू और सीसीयू में 25 से ज्यादा मरीज भर्ती थे. अस्पताल कर्मियों और स्थानीय लोगों ने कई मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला, लेकिन चार लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे. सिटी एसपी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी पूरे मामले की जांच कर रहे हैं. प्रशासन आग लगने के सही कारणों का पता लगाने में जुटा है. इस दर्दनाक हादसे के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं.
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में प्रसाद अस्पताल के आईसीयू में गुरुवार तड़के करीब दो बजे आग लग गई। सुबह 9:30 तक पांच लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। मरने वालों में औराई के 30 वर्षीय शशांक कुमार, कथैया की गीता देवी और तरियानी-शिवहर के 57 वर्षीय उदय कुमार, कृष्ण नंदन और चंचला कुमारी के शव की पहचान हो सकी है। करीब 20 लोगों के हताहत होने की जानकारी आई, लेकिन मौतों की संख्या पर औपचारिक पुष्टि नहीं हो रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग अस्पताल की ऊपरी मंजिल स्थित आईसीयू में लगी, जिसके बाद पूरे परिसर में धुआं फैल गया और मरीजों व उनके परिजनों के बीच भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने का अभियान शुरू किया गया।
वहीं, इस बड़े हादसे के बीच बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार पटना एयरपोर्ट से अचानक दिल्ली के लिए रवाना हो गए. एयरपोर्ट पर जब मीडियाकर्मियों ने इस दर्दनाक घटना को लेकर उनसे सवाल पूछने चाहे, तो स्वास्थ्य मंत्री ने कोई जवाब नहीं दिया. उन्होंने मीडिया के सामने सिर्फ हाथ जोड़े और बिना कुछ बोले आगे बढ़ते हुए दिल्ली की फ्लाइट पकड़ ली.
सीएम सम्राट चौधरी ने इस हादसे पर दुख जता है. उन्होंने ने कहा कि ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें और परिजनों को इस कठिन समय में संबल दें. साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मृतकों के परिजनों को अविलंब 4-4 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाए.
घटना पर CM ने जताया दुख, 4-4 लाख रुपये मुआवजे का ऐलान
मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड पर मुख्यमंत्री ने गहरा दुख व्यक्त किया है. उन्होंने इस हादसे में चार व्यक्तियों की मृत्यु को अत्यंत दुखद बताते हुए शोक-संतप्त परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें और परिजनों को इस कठिन समय में संबल दें. इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने आपदा की इस घड़ी में पीड़ित परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मृतकों के परिजनों को अविलंब 4-4 लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान (मुआवजा) प्रदान किया जाए. मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि स्थानीय प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और हादसे में घायल हुए लोगों के त्वरित व समुचित उपचार के लिए सदर अस्पतालों में पुख्ता व्यवस्था की गई है.
बेड पर लोग छटपटा रहे थे, स्टाफ भाग गया
स्थानीय निवासी धीरज गिरी ने बताया, ‘मैं अस्पताल की छत पर सो रहा था। अचानक चिल्लाने की आवाज आई। नीचे आकर देखा तो लोग जान बचाने के लिए छटपटा रहे थे। कुछ लोग अस्पताल के स्टाफ को डांट रहे थे। वार्ड में धुआं इतना ज्यादा था कि कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।’ परिजन का ये भी आरोप है कि आग लगने के बाद अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारी मरीजों को तड़पता छोड़कर भाग गए। दमकल विभाग के एक अधिकारी ने भी दावा किया कि जब हमारी टीम घटनास्थल पर पहुंची, तब अस्पताल का अधिकांश स्टाफ वहां मौजूद नहीं था।
DM बोले- ICU में 15 मरीज थे
मुजफ्फरपुर के DM सुब्रत कुमार के मुताबिक, हादसे के समय ICU में 15 मरीज थे। 4 की मौत की जानकारी मिली है। घायलों को जिले के दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने कहा, ‘अस्पताल की लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी। कुछ परिजन आरोप लगा रहे हैं कि उनके मरीज वार्ड से गायब हैं। हर पहलू की जांच की जा रही है।’
3:50 बजे मिली आज की सूचना, 4:00 बजे मौके पर था- फायरमैन
मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड को लेकर राहत और बचाव कार्य में जुटे एक फायरमैन ने घटना की सिलसिलेवार जानकारी दी है. फायरमैन ने बताया कि उन्हें तड़के लगभग 3:50 बजे अस्पताल में आग लगने की सूचना मिली थी, जिसके बाद दमकल की टीम मुस्तैदी दिखाते हुए ठीक 4:00 बजे मौके पर पहुंच गई. वहां पहुंचने पर टीम ने देखा कि अस्पताल की चौथी मंजिल पर स्थित आईसीयू (ICU) वॉर्ड में भीषण आग लगी हुई थी. दमकल कर्मियों ने तुरंत मोर्चा संभाला और सूझबूझ से रेस्क्यू अभियान चलाकर वॉर्ड के भीतर फंसे 15 से 20 मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला. रेस्क्यू किए गए इन सभी मरीजों को तुरंत इलाज के लिए दूसरे अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है. फायरमैन के मुताबिक, कड़ी मशक्कत के बाद अब आग पर काबू पा लिया गया है और फिलहाल परिस्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है. इस हादसे में अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है.
हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भारी दल-बल के साथ तुरंत प्रसाद हॉस्पिटल पहुंचे और खुद मौके पर मौजूद रहकर राहत व बचाव कार्यों की कमान संभाली. अधिकारियों की देखरेख में मुस्तैदी दिखाते हुए झुलसे और गंभीर रूप से जख्मी सभी मरीजों को तुरंत एम्बुलेंस के जरिए शहर के विभिन्न अस्पतालों में शिफ्ट किया गया, जहाँ डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है.
हादसे के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि आग लगने के बाद अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारी मरीजों को तड़पता छोड़कर मौके से भाग खड़े हुए. वहीं, दमकल विभाग के एक अधिकारी ने भी इस बात की पुष्टि करते हुए दावा किया कि जब उनकी टीम राहत और बचाव कार्य के लिए घटनास्थल पर पहुंची, तब अस्पताल का अधिकांश स्टाफ वहां मौजूद नहीं था.
चश्मदीद धर्मेंद्र कुमार ने रोते हुए अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने बताया कि उनकी चाची गीता देवी आईसीयू में भर्ती थीं. आग रात के करीब 3 बजे लगी और उस वक्त आईसीयू में लगभग 20 मरीज थे. हैरान करने वाली बात यह है कि हादसे के समय वहां कोई अटेंडेंट मौजूद नहीं था. जब पूरा वार्ड धुएं से भर गया, तब जाकर अस्पताल का स्टाफ वहां पहुंचा. ऐसे में आप भला कितने लोगों को बचा पाएंगे. धर्मेंद्र ने आगे दिल दहला देने वाला दावा करते हुए कहा कि उनकी चाची की बॉडी को अस्पताल के बाहर फेंक दिया गया था, जिसे उन्होंने खुद ढूंढकर निकाला है. यह अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही और असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा है.
यह दर्दनाक हादसा बुधवार रात करीब 3 बजे हुआ, जहां पांचवीं मंजिल पर आईसीयू वार्ड होने के कारण बचाव कार्य में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. आग लगने की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और दमकलकर्मियों ने खिड़कियां व दरवाजे तोड़कर आईसीयू और अन्य वार्डों में फंसे मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला. काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार गंभीर स्थिति को देखते हुए मृतकों का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है.
मुजफ्फरपुर से बीजेपी विधायक रंजन कुमार अस्पताल पहुंचे। उन्होंने कहा, यह बेहद दुखद घटना है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगी, जिसके बाद पूरे अस्पताल में धुआं फैल गया। इस हादसे में 4 मरीजों की मौत हुई है। 20 मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालकर शहर के अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। वहीं, जनरल वार्ड के मरीजों को भी दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट किया गया है। सरकार यहां भर्ती सभी मरीजों के इलाज की व्यवस्था करेगी। जरूरत पड़ने पर मरीजों को AIIMS भी भेजा जाएगा। मामले की जांच के लिए जिला प्रशासन ने टीम का गठन कर दिया है। जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मरीजों के परिजन ने बताया, बुधवार रात 3 बजे अस्पताल की ICU में धमाके की आवाज आई। उसके बाद वेंटिलेटर उपकरणों में आग लग गई। आग लगने के बाद अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। पूरा वार्ड धुएं से भर गया। परिजन और मरीज चिल्लाने लगे। जैसे-तैसे मरीजों को निकालने में जुट गए। उनका आरोप है कि आग बुझाने को लेकर अस्पताल के कर्मियों ने मदद नहीं की।
इस हादसे पर बिहार के सीएम सम्राट चौधरी ने दुख जताया है। उन्होंने X पर लिखा, मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल में आग लगने से चार व्यक्तियों की मृत्यु अत्यंत दुःखद है। शोक-संतप्त परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें तथा परिजनों को इस कठिन समय में संबल दें।मृतकों के परिजनों को अविलंब 4-4 लाख रुपए मुआवजा देने का ऐलान किया गया है।







