सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन समरदुंग (झोलुंगे) सुरंग में हुए हादसे ने पूरे इलाके में चिंता बढ़ा दी है। सुरंग के भीतर मीथेन गैस रिसाव और उसके बाद हुए भूस्खलन के कारण कई मजदूरों के फंसने की आशंका है। शुरुआत में 17 मजदूरों के फंसे होने की जानकारी सामने आई थी, लेकिन बाद में यह संख्या बढ़कर 27 तक पहुंचने की आशंका जताई गई। हालांकि जिला प्रशासन ने अभी अंतिम संख्या की पुष्टि नहीं की है और रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी के कारण राहत अभियान बेहद कठिन बना हुआ है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग से फोन पर बात की। प्रधानमंत्री ने बचाव अभियान की जानकारी ली और केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव मदद का भरोसा दिया। इस हादसे में अब तक सात मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। वहीं, सुरंग में फंसे अन्य मजदूरों को सुरक्षित निकालने के लिए राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। राज्य सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री ने समरडुंग (झोलुंगे) स्थित निर्माणाधीन सुरंग की स्थिति की जानकारी ली और चल रहे बचाव कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों और प्रभावित मजदूरों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री को भरोसा दिलाया कि बचाव अभियान और राहत कार्यों के लिए केंद्र सरकार हर संभव सहायता उपलब्ध कराएगी। मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने प्रधानमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग के आश्वासन से राज्य प्रशासन को राहत और हौसला मिला है। उन्होंने बताया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद बचाव अभियान पूरी तेजी से चलाया जा रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग से फोन पर बात कर नामची जिले में निर्माणाधीन सुरंग में हुए भूस्खलन की घटना की जानकारी ली। अधिकारियों के अनुसार, अमित शाह ने चल रहे राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा की और राज्य सरकार को केंद्र की ओर से हरसंभव मदद का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों की सहायता के लिए केंद्र सरकार पूरी तरह तैयार है।
यह हादसा सोमवार दोपहर नामची जिले के समरदुंग में एनएचपीसी की तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में हुआ। भूस्खलन के कारण सुरंग का प्रवेश द्वार बंद हो गया, जिससे अंदर करीब 27 मजदूर फंस गए। इस दौरान सुरंग में गैस रिसाव होने की भी आशंका जताई गई। अधिकारियों ने बताया कि सुरंग के अंदर गैस होने के कारण बचाव अभियान में काफी मुश्किलें आ रही हैं। कई बचावकर्मियों को अंदर जाते समय चक्कर आए और कुछ बेहोश भी हो गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह गैस भूस्खलन के बाद जमीन के नीचे की चट्टानों और परतों में बदलाव होने से प्राकृतिक रूप से निकल रही है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
भारी बारिश की वजह से टनल के अंदर भरा पानी
मामले में नामची SP सोनम डोलमा ने बताया कि ‘करीब 27 लोग फंसे हुए हैं; यह संख्या बदल सकती है। फंसे हुए 27 लोगों में से हमने अब तक 10 शव बरामद कर लिए हैं। अभी हम उनमें से तीन की पहचान नहीं कर पाए हैं और पहचान की प्रक्रिया चल रही है। जिन लोगों की पहचान हो गई है, हम उनके परिवार वालों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि शव उन्हें सौंपे जा सकें… अब तक बरामद और पहचाने गए लोगों में से तीन पश्चिम बंगाल से हैं, एक उत्तराखंड से है, और असम व सिक्किम के लोग भी शामिल हैं। मैं अभी इसकी वजह नहीं बता सकती क्योंकि इसके लिए जांच-पड़ताल की जरूरत है और हमें विशेषज्ञों की राय भी लेनी होगी। इस पर हम बाद में बात करेंगे, लेकिन अभी हमारा पूरा ध्यान बचाव अभियान को जल्द से जल्द पूरा करने पर है। कल रात से हो रही भारी बारिश की वजह से टनल के अंदर पानी भर गया, जिससे बचाव अभियान में रुकावट आई। अंदर हालात पहले से ही मुश्किल थे और पानी ने मुश्किलें और बढ़ा दीं। हालांकि, पानी निकाले जाने के बाद बचाव अभियान फिर से शुरू हो गया’।
जहरीली गैस के कारण बचाव में आई परेशानी
पश्चिम बंगाल से विशेष गैस-प्रोटेक्टिव उपकरणों से लैस विशेषज्ञ बचाव दल भी अभियान में शामिल किया गया है। जहरीली गैस के कारण कई बचावकर्मियों को चक्कर आने और तबीयत बिगड़ने की भी सूचना है। जिला कलेक्टर अनुपा तामलिंग ने बताया कि सुरंग के भीतर वेंटिलेशन बेहतर करने और सुरक्षित तरीके से फंसे मजदूरों तक पहुंचने के प्रयास जारी हैं। बचावकर्मी गैस मास्क और अन्य सुरक्षा उपकरणों की मदद से अभियान चला रहे हैं, जबकि एंबुलेंस और चिकित्सा दल भी मौके पर तैनात हैं। उन्होंने बताया कि शुरू में रेस्क्यू करने गए तीन लोगों में से एक की हालत खराब हो गई, जिन्हें रंगपो सीएचसी में भर्ती कराया गया है।
तामलिंग ने बताया कि सुरंग के भीतर मीथेन गैस की मात्रा बहुत अधिक होने के कारण बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। पहली एनडीआरएफ टीम ने उन अग्निशमन कर्मियों को सुरक्षित बाहर निकाला, जो घटना के बाद अंदर गए थे। इसके बाद दूसरी एनडीआरएफ टीम सुरंग में दाखिल हुई और बचाव अभियान जारी है। तामलिंग ने कहा, प्रारंभिक जानकारी के अनुसार करीब 19 मजदूर अंदर फंसे थे। बाद में बचाव के लिए पटेल इंजीनियरिंग के तीन कर्मचारी सुरंग में गए, जिनमें से दो भी अंदर फंस गए। इससे कंपनी के कुल 21 लोगों के अंदर होने की आशंका है। इसके अलावा एनएचपीसी के छह कर्मचारी भी सुरंग के भीतर बताए जा रहे हैं, जिससे कुल संख्या 27 तक पहुंचती है। वास्तविक संख्या इससे कम या अधिक भी हो सकती है।
सिक्किम की सुरंग में फंसे मजदूरों का रेस्क्यू कैसे?
- मीथेन गैस रिसाव और उसके बाद हुए भूस्खलन में फंसे 25 से अधिक श्रमिक।
- गैस निकालने की कोशिश के दौरान ब्लास्ट जैसी स्थिति बनने के बाद सुरंग के भीतर भूस्खलन।
- जहरीली गैस के रिसाव और ऑक्सीजन की कमी के कारण राहत एवं बचाव अभियान जटिल।
- एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, अग्निशमन दल और इमरजेंसी सर्विस टीमें तैनात।
बचाव अभियान में सबसे बड़ी चुनौती क्या बन रही है?
राहत एवं बचाव कार्य में सबसे बड़ी बाधा सुरंग के भीतर मौजूद जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), जिला पुलिस, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा की टीमें लगातार अभियान चला रही हैं। पश्चिम बंगाल से गैस-प्रोटेक्टिव उपकरणों से लैस विशेषज्ञ दल भी मौके पर पहुंचा है। गैस के असर से कई बचावकर्मियों को चक्कर आने और तबीयत बिगड़ने की सूचना मिली है। कुछ राहतकर्मियों को अस्पताल भेजना पड़ा, जबकि सुरंग के भीतर जाने वाले सभी दल गैस मास्क और विशेष सुरक्षा उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं।
मजदूरों तक पहुंचने के लिए क्या कर रहा है प्रशासन?
जिला कलेक्टर अनुपा तामलिंग ने बताया कि सुरंग के भीतर वेंटिलेशन बेहतर बनाने और गैस के प्रभाव को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि बचाव दल सुरक्षित तरीके से अंदर पहुंच सके। घटनास्थल पर एंबुलेंस और चिकित्सा दल तैनात हैं। शुरुआती रेस्क्यू के दौरान अंदर गए तीन लोगों में से एक की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें रंगपो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। दो अन्य बचावकर्मी भी कुछ समय तक सुरंग के भीतर फंसे रहे। प्रशासन का कहना है कि मजदूरों तक बिना अतिरिक्त जोखिम के पहुंचना पहली प्राथमिकता है और इसी को ध्यान में रखकर चरणबद्ध तरीके से अभियान चलाया जा रहा है।
सिक्किम के हादसे पर जिला कलेक्टर क्या बोले?
- सुरंग में फंसे श्रमिकों के रेस्क्यू के लिए पश्चिम बंगाल से विशेषज्ञ बचाव दल को बुलाया गया।
- विशेष गैस-प्रोटेक्टिव उपकरणों से लैस है राहत और बचाव दल।
- जिला कलेक्टर अनुपा तामलिंग ने बोले- सुरंग के भीतर वेंटिलेशन बेहतर करना प्राथमिकता।
- फंसे मजदूरों को निकालने गई टीम के बचावकर्मियों की सेहत पर भी असर, रंगपो सीएचसी में भर्ती।
यह परियोजना कौन बना रहा है और आगे क्या होगा?
यह सुरंग एनएचपीसी की तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना के तहत पटेल इंजीनियरिंग द्वारा बनाई जा रही है। देर रात तक बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी रहा, लेकिन सभी फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का काम पूरा नहीं हो सका था। प्रशासन लगातार सुरंग के भीतर गैस की स्थिति पर नजर रखे हुए है और विशेषज्ञों की मदद से आगे की रणनीति बनाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक सुरंग के भीतर का वातावरण सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक हर कदम बेहद सावधानी से उठाया जाएगा।







