बिहार में प्रति व्यक्ति प्रति दिन दूध की उपलब्धता 285 ग्राम है। 2007-08 की तुलना में 2024-25 में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 128 ग्राम प्रतिदिन बढ़ी है। हालांकि, राज्य में अब भी प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता राष्ट्रीय औसत से 200 ग्राम कम है। देश में प्रति व्यक्ति प्रति दिन 485 ग्राम दूध की उपलब्धता है। विश्वस्तर पर प्रतिदिन प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 328 ग्राम है।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने अनुशंसा है कि प्रति व्यक्ति 300 ग्राम प्रतिदिन होना चाहिए। इस आधार पर बिहार में प्रतिदिन प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 15 ग्राम कम है। राज्य सरकार दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। पशुपालकों के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं। इस वर्ष दुग्ध दिवस की थीम महिला किसानों का उत्सव है। इसलिए महिला किसानों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। देश में प्रति वर्ष एक जून को विश्व दुग्ध दिवस मनाया जाता है। देश में दूध उत्पादन में बिहार नौवें स्थान पर है। बिहार में 2024-25 में 2023-24 की तुलना में 4.2 प्रतिशत दूध उत्पादन बढ़कर सालाना 134 लाख टन हो गया है। 2018-19 में सालाना 98.18 लाख टन दूध का उत्पादन था। 2022-23 में 125 लाख टन और 2023-24 में 128 लाख टन था।
बिहार में कुल गाय दूध का उत्पादन का लगभग 17.6 प्रतिशत समस्तीपुर, बेगूसराय और पटना में है। कुल भैंस दूध उत्पादन का 16.6 मधुबनी, सीतामढ़ी और पश्चिम चंपारण में है। राज्य में रोजाना लगभग 26 लाख किलोग्राम प्रतिदिन संग्रहण होता है। राज्य में 28704 दुग्ध सहकारी समितियां हैं। इनमें 13.76 सदस्य हैं। इनमें महिला सदस्यों की संख्या 3.19 लाख है। एससी-एसटी के 1.30 लाख सदस्य हैं। पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग के 6.56 लाख और सामान्य वर्ग के 2.71 लाख सदस्य हैं। कॉम्फेड के जरिए रोजाना 22 से 24 लाख किलो दूध का संग्रहण होता है। इनमें दूध की सीधे बिक्री 18.10 लाख लीटर तक प्रतिदिन होती है। लगभग 3.5 लाख लीटर दूध से दही, पेड़ा, पनीर आदि तैयार कर बेचे जाते हैं। राज्य में वर्तमान में दूध बूथ 944 हैं। खुदरा बिक्री केंद्र 37425 हैं।
छह करोड़ आबादी दूध की पहुंच से बाहर:
दूध में प्रोटीन सहित विभिन्न पोषक तत्व हैं। यह कुपोषण दूर करने में कारगर है। डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अधिकारी भी स्वीकार करते हैं कि राज्य में 285 ग्राम प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता उत्पादन के आधार पर है।







