पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी सरकार द्वारा सत्ता संभालने के अल्पकाल में ही स्पष्ट बदलाव दिख रहा है। ममता सरकार की विचारधारा और दिशा के बिल्कुल उलट शुभेंदु सरकार के शासन की गाड़ी तीव्र गति से वहां पहुंच रही है, जहां से बंगाल शांत और स्थिर हो सामान्य राज्य के रूप में गतिविधियों का निर्धारण करे। शुभेंदु सरकार ने केंद्रीय योजनाओं को लागू करने के अलावा कुछ ऐसे फैसले लिए, जिनसे बदलाव आया।
क्या किसी ने कल्पना की थी कि सरकार बनने के हफ्ते भर के अंदर ही राज्य से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) द्वारा लगाए गए अवैध टोल बूथ हट जाएंगे, बैरिकेड समाप्त हो जाएंगे, अवैध वसूली का धंधा खत्म हो जाएगा? लेकिन यह सब हो गया। ममता ने महिलाओं को रात में न निकलने की बात कही थी। सरकार बदलते ही अब महिलाएं देर रात तक बेखौफ होकर बाहर निकल सकती हैं। सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। कोलकाता से आसनसोल तक अवैध निर्माण के विरुद्ध बुलडोजर कार्रवाई का हिंसक विरोध पूर्व सरकार की तस्वीर पेश कर रहा था। पत्थरबाजी भी हुई। इसके बाद फुटेज से पत्थरबाजों और दंगाइयों की पहचान करके कार्रवाई हो रही है तथा पुलिस ने एलान किया है कि जिन लोगों ने हिंसा और तोड़फोड़ की है, उनकी संपत्ति से इसकी वसूली की जाएगी।
भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान कानून-व्यवस्था मजबूत करने, महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने, अवैध घुसपैठ रोकने और घुसपैठियों को बाहर निकालने, सीमा व आंतरिक सुरक्षा की मजबूती, तुष्टीकरण के खात्मे, हिंदुओं के साथ हुए अन्याय को दूर करने, भ्रष्टाचार खत्म करने जैसे वादे किए थे। इसी क्रम में, मुख्यमंत्री का पदभार संभालते ही शुभेंदु अधिकारी ने बांग्लादेश की सीमा पर घेराबंदी के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को भूमि सौंपने का आदेश दिया। सबसे बड़ा व अहम फैसला नेशनल हाईवे 10 व 110 के सात हिस्से केंद्र सरकार को सौंपना है। इनमें से पांच सड़कें चिकन नेक, यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर से होकर गुजरती हैं। यह पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण रास्ता है। अगर यह संपर्क टूट जाए, तो पूर्वोत्तर का भारत से सीधा जमीनी संपर्क खत्म हो सकता है। पहले यहां अवैध घुसपैठ, तस्करी और भारत विरोधी गतिविधियों को पूरी तरह रोकना मुश्किल था, पर अब हाईवे के बेहतर विकास से इन पर नियंत्रण आसान हो सकेगा।
कट मनी, भ्रष्टाचार तथा महिलाओं के विरुद्ध अपराध की व्यापक छानबीन और कार्रवाई के लिए दो उच्च स्तरीय अधिकार प्राप्त आयोगों का गठन किया जा चुका है। सरकार ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व सुपरिटेंडेंट संदीप घोष के खिलाफ वित्तीय धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में ईडी को मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। ऐसे ही आदेश अन्य मामलों में दिए जा रहे हैं, जिन्हें पूर्व सरकार ने रोककर रखा था।
संदेशखाली से लेकर आईजी कर और मुर्शिदाबाद के दंगों में महिलाओं के साथ किया गया अनुचित व्यवहार बंगाल में प्रमुख मुद्दा रहा है। वास्तव में, शुभेंदु सरकार ने भाजपा की विचारधारा को सत्ता नीति में अपनाते हुए स्पष्ट संदेश दिया है। वंदे मातरम गायन अनिवार्य कर दिया गया है। राज्य के इमामों, मुअज्जिनों और पुजारियों को दिया जाने वाला सरकारी भत्ता एक जून से समाप्त करने का आदेश जारी किया गया है। एक बड़ा फैसला ओबीसी आरक्षण को 17 से घटाकर सात प्रतिशत करना तथा इसे केवल 66 हिंदू जातियों तक ही सीमित रखना भी है। ममता बनर्जी ने 2024 में 71 जातियों को पिछड़ी जाति में शामिल किया था, जिनमें 65 मुस्लिम समुदाय के थे। ममता ने मुसलमानों को ज्यादा से ज्यादा पिछड़ी जाति का आरक्षण देने के लिए ही श्रेणी ए बनाकर 10 फीसदी आरक्षण घोषित किया था। पहले यह सात प्रतिशत था। साफ था कि केवल वोट बैंक की दृष्टि से मुसलमानों को पिछड़ी जाति में शामिल कर अतिरिक्त आरक्षण का अनुपात लाया गया।
इस तरह शुभेंदु सरकार ने कम समय में ही त्वरित गति से अपने कदमों द्वारा यह स्थापित कर दिया कि राज्य किसी मजहब या पंथ विशेष या पार्टी नेताओं या समर्थकों लिए नहीं, बल्कि सबके हित में काम करेगा, खजाने का धन किसी पंथ के तुष्टीकरण के लिए नहीं, बल्कि उपयुक्त पात्रों के कल्याण पर खर्च होगा, शासन कानून और विधान के अनुसार चलेगा, प्राथमिकता आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा तथा विकास होगा एवं पहले जो निहित स्वार्थी तत्व इसके रास्ते में आए, सत्ता का दुरुपयोग किया, उन सबके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।







