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राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण व दूरदर्शी पहल………………

UB India News by UB India News
May 29, 2026
in राष्ट्रीय, संपादकीय
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राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण व दूरदर्शी पहल………………
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पिछले कई वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों, खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों में आबादी की संरचना में आ रहे बदलावों की पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार द्वारा उच्चाधिकार समिति का औपचारिक गठन राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण व दूरदर्शी पहल है। इस मामले में केंद्रीय गृहमंत्री का यह कहना विचारणीय है कि घुसपैठ तथा किन्हीं अन्य वजहों से जनसंख्या में आने वाला असामान्य बदलाव किसी भी राष्ट्र के वर्तमान और भविष्य के लिए एक गंभीर चुनौती है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले वर्ष स्वतंत्रता दिवस के दिन इस उद्देश्य के लिए जल्द ही एक उच्चाधिकार समिति के गठन का एलान किया था।

उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ वर्षों में अवैध घुसपैठ पर चर्चाएं बढ़ी जरूर हैं, लेकिन इस समस्या की जड़ें काफी गहरी हैं। असम के पूर्व राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) एसके सिन्हा ने 1998 में इस संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट तत्कालीन राष्ट्रपति को सौंपी थी, जिसके अनुसार बांग्लादेश से हो रही अवैध घुसपैठ ने असम की सीमा पर स्थित कई जिलों में आबादी का संतुलन बदल दिया है। 2005 में सर्वोच्च न्यायालय ने सर्बानंद सोनोवाल बनाम भारत संघ मामले में अवैध घुसपैठ की तुलना एक किस्म के अघोषित बाहरी आक्रमण से की थी। राजनीतिक दलों में इस विषय पर मतभेद और बहसें भले जारी हों, लेकिन तथ्य अपनी कहानी आप कहते हैं।

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सेंटर फॉर पॉलिसी स्टडीज के एक शोध के अनुसार, 1951 से लेकर 2011 के बीच, पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों की आबादी पश्चिमी जिलों की तुलना में बांग्लादेश की सीमा से सटे जिलों में लगभग दोगुनी और कहीं-कहीं तो तीन गुनी रफ्तार से बढ़ी। यह प्रवृत्ति सिर्फ असम और पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है। कुछ अध्ययन एवं सार्वजनिक विमर्श दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार जैसे देश के अन्य हिस्सों में भी जनसांख्यिकीय परिवर्तनों को लेकर चिंताओं के संकेत देते रहे हैं।

हालांकि, शिक्षा का स्तर, स्वास्थ्य सेवा, रोजगार के अवसर, प्रवासन इत्यादि जैसे अनेक कारक जनसांख्यिकीय बदलाव को प्रभावित कर सकते हैं, पर अवैध घुसपैठ को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सही निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए नवगठित समिति की कार्यप्रणाली और उद्देश्य संतुलित होना भी जरूरी है। देश की सबसे बड़ी शक्ति उसकी विविधता और सामाजिक सह-अस्तित्व की परंपरा रही है। ऐसे में, नवगठित समिति की सफलता इसमें होगी कि वह तथ्यों, पारदर्शिता और संतुलित दृष्टिकोण के आधार पर ऐसी सिफारिशें दे, जो राष्ट्रीय हितों को मजबूत करने के साथ सामाजिक विश्वास को भी कायम रखें।

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