ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उन्हें अमेरिका से संदेश मिला है. संदेश में बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई गई है. अराघची ने भारतीय राजधानी में पत्रकारों से कहा, “कुछ दिन पहले जब ट्रंप ने ट्वीट किया था कि यह अस्वीकार्य है, तब यह कहा गया था कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान के प्रस्ताव या अमेरिकी प्रस्ताव पर ईरान की प्रतिक्रिया को अस्वीकार कर दिया है. लेकिन उसके बाद हमें अमेरिकियों से फिर से संदेश मिले हैं, जिसमें उन्होंने कहा है कि वे बातचीत जारी रखने और संवाद स्थापित करने के लिए तैयार हैं.”
परमाणु हथियारों पर भी बता दी स्थिति
अब्बास अराघची ने कहा कि बातचीत के माध्यम से समाधान के अलावा कोई और रास्ता नहीं हो सकता. होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति इस समय बेहद जटिल है. हम होर्मुज जलडमरूमध्य से सभी जहाजों को सुरक्षित निकालने में मदद करने के लिए तैयार हैं. सिर्फ उन देशों के जहाजों को दिक्कत है, जो ईरान से युद्ध में हैं. ईरान ने कभी भी परमाणु हथियार नहीं चाहे हैं. ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में विश्वास की कमी आ रही है. ईरान के पास अमेरिका पर भरोसा नहीं करने के सभी कारण हैं. अमेरिकियों के पास ईरान पर भरोसा करने के सभी कारण हैं. ईरान से संबंधित किसी भी समस्या का कोई सैन्य समाधान नहीं है. उन्होंने कहा कि सेना के दम पर ईरान को झुकाना मुश्किल है. पाकिस्तान की मध्यस्थता अभी तक विफल नहीं हुई है.
चीन और भारत की भूमिका पर ये बोले
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को कहा कि वे मध्य पूर्व में संघर्ष के समाधान में मदद के लिए चीन सहित किसी भी तरह के समर्थन के लिए तैयार हैं. उन्होंने भारत की राजधानी में पत्रकारों से कहा, जहां वे ब्रिक्स देशों के समूह की बैठक में शामिल हुए थे, “हम किसी भी ऐसे देश की सराहना करते हैं जो मदद करने में सक्षम हो, विशेषकर चीन की. चीन के साथ हमारे बहुत अच्छे संबंध हैं, हम एक-दूसरे के रणनीतिक साझेदार हैं, और हम जानते हैं कि चीन की मंशा अच्छी है, इसलिए कूटनीति में मदद के लिए उनके द्वारा किया गया कोई भी प्रयास इस्लामी गणराज्य द्वारा स्वागत योग्य होगा.”हम भारत की किसी भी रचनात्मक भूमिका का स्वागत करेंगे.







