पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु को अपना नया मुख्यमंत्री मिलने जा रहा है। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से ही तमिलनाडु में नई सरकार के गठन को लेकर जो अनिश्चितता छाई थी, वह दूर हो चुकी है। राज्य में नए राजनीतिक समीकरण दिख रहे हैं, तो कुछ चुनौतियां भी होंगी।
संकट दूर। विजय की TVK के साथ अब कांग्रेस, VCK, CPI और CPM हैं। सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद बहुमत न मिलने के कारण राज्यपाल ने विजय को सरकार बनाने के लिए नहीं बुलाया था। इसकी वजह से लगातार असमंजस की स्थिति बनी हुई थी और DMK व AIADMK के बीच गठबंधन की भी चर्चा शुरू हो गई थी, जिसकी कल्पना भी बाकी दिनों में मुश्किल लगती है। यहां एक तरह का संवैधानिक संकट बनता दिख रहा था।
जनादेश का सम्मान। सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते पहला दावा TVK का ही बनता है। विजय को जिस तरह का समर्थन मिला है, अगर उन्हें मौका नहीं मिलता, तो यह जनादेश के साथ अन्याय होता। वह परिवर्तन तो ले आए हैं, पर यहां से उनकी अगली परीक्षा शुरू होनी है। गठबंधन की राजनीति कभी सरल नहीं होती और सरकार में रहते हुए तो खासतौर पर शक्ति संतुलन साधना पड़ता है।
विजय से उम्मीदें भी बहुत अधिक हैं। बतौर राजनेता भी लोग उनमें फिल्मों में निभाए गए किरदारों की छवि ही देखते हैं। उन्होंने पारंपरिक द्रविड़ राजनीति से अलग जाकर जनता में जो आकांक्षाएं जगाई हैं, उन्हें पूरा करना होगा।
सुरक्षा व्यवस्था अहम। बदलाव बंगाल में भी हुआ है। BJP पहली बार राज्य में सरकार बनाने जा रही है और उसका शुभेंदु अधिकारी को सीएम पद के लिए चुनना परिवर्तन चक्र के पूरा होने जैसा है। कभी TMC में ममता बनर्जी के बाद नंबर दो की हैसियत रखने वाले शुभेंदु अब बंगाल BJP में नंबर वन हैं। पार्टी ने ममता शासन में लचर लॉ एंड ऑर्डर का आरोप लगाया था, अब शुभेंदु सरकार को उन सभी मुद्दों को प्राथमिकता में रखना होगा, जिन पर उनकी पार्टी ने चुनाव लड़ा और जीती।
महिलाओं से वादा। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद बड़ी संख्या में केंद्रीय बलों की तैनाती के बावजूद राजनीतिक हिंसा देखने को मिली है। सरकार को किसी भी तरह की राजनीतिक बदले की कार्रवाई पर लगाम लगानी होगी। जनता ने फैसला दे दिया है और सभी को उसे स्वीकार करना चाहिए।







