आज से चारधाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो गया है। वैदिक मंत्रोचार, धार्मिक अनुष्ठान और जय मां गंगा और यमुना के जयकारों के साथ अक्षय तृतीय के पर्व पर गंगोत्री धाम और यमुनोत्री मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए हैं। सीएम मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद इस दिव्य पल के साक्षी बने। गंगोत्री के कपाट खुलने के समय हजारों तीर्थयात्री मंदिर प्रांगण में मौजूद रहे। इस दौरान हर-हर गंगे और मां गंगा की जय के जयकारों से पूरा गंगोत्री धाम गूंज उठा। वहीं, तय मुहूर्त पर दोपहर 12.15 पर गंगोत्री मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले गए । इस दौरान धाम में मौजूद भक्तों पर हेलीकॉप्टर से फूलों की वर्षा भी की गई
रविवार को मां गंगा की उत्सव डोली तड़के ही गंगोत्री धाम के कपाट खोलने के लिए भैरव घाटी से प्रस्थान किया। इससे पहले भैरव घाटी में मां गंगा की विशेष पूजा अर्चना की। इसके बाद मां गंगा की डोली यात्रा गंगोत्री धाम के लिए रवाना हुई।
मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने बताया कि विधिविधान के साथ गंगा पूजन, गंगा सहस्नाम पाठ एवं विशेष पूजा अर्चना करने के बाद वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ देश विदेश के श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। पहले ही दिन हजार यात्रियों ने गंगोत्री धाम पहुंचकर गंगा जी के दर्शन और पूजा-अर्चना का पुण्य लाभ अर्जित किया।
लाखों श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया
मुख्यमंत्री ने यात्रियों से नियमों का पालन करने और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए यात्रा को प्लास्टिक मुक्त बनाने में सहयोग करने की अपील भी की. चारधाम यात्रा के अगले चरण में केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को और बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खोले जाएंगे.
अब तक 18.9 लाख श्रद्धालु ऑनलाइन पंजीकरण करा चुके है. इनमें सबसे अधिक 6.5 लाख पंजीकरण केदारनाथ धाम के लिए हुए है. बद्रीनाथ के लिए 5.5 लाख, गंगोत्री के लिए 3.3 लाख और यमुनोत्री के लिए 3.2 लाख श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया है.
शनिवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चारधाम यात्रा बस ट्रांजिट कैंप परिसर से यात्रियों के वाहनों को हरी झंडी दिखाकर धामों के लिए रवाना किया। इस दौरान यात्रियों ने जय बाबा केदार, जय बदरीविशाल, जय मां गंगे और जय मां यमुना के जयकारे के साथ यात्रा का श्रीगणेश किया।
कार्यक्रम का आयोजन संयुक्त यात्रा रोटेशन समिति की ओर से किया गया था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज ऐसा लग रहा है कि भगवान यहां आए हुए हैं। कहा कि जिसके मन में सनातन है, चारधाम की यात्रा वही करता है और उस पर भगवान की कृपा सदैव बनी रहती है। यह यात्रा आस्था, साधना और शिवत्व को जोड़ने का मार्ग है। यात्रा में कठिन भौगोलिक परिस्थितियां आती हैं लेकिन कठिन यात्रा ही भगवान को पाने का मार्ग है। जिनका जन्म इस देवभूमि में हुआ है, वह तो सौभाग्यशाली है और जो यहां आ रहे हैं वह परम सौभाग्यशाली हैं। चारधाम यात्रा हमारी आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है। इस वर्ष भी यात्रा नया आयाम स्थापित करेगी। हमारी सरकार यात्रा को सुगम बनाने में सदैव प्रयासरत है।