ADVERTISEMENT
Friday, July 3, 2026
No Result
View All Result
  • Login
  • Register
No Result
View All Result
UB INDIA NEWS
No Result
View All Result

कर्ज का बोझ, वेतन का इंतजार! बिहार को नया CM तो मिल जाएगा, पर मुंह बाए सामने खड़ी हैं ये चुनौतियां

UB India News by UB India News
April 15, 2026
in पटना, बिहार
0
बिहार में कौन होगा अगला मुख्यमंत्री?
  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link

बिहार में इन दिनों सरकारी खजाने को लेकर गंभीर स्थिति बनती दिख रही है.राज्य के कई हिस्सों से ऐसी खबरें आ रही हैं कि बड़ी संख्या में कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है और ठेकेदारों का भुगतान भी अटका हुआ है.

बिहार को आज नया मुख्यमंत्री मिल जाएगा. वो सम्राट चौधरी होंगे, विजय सिन्हा या श्रेयसी सिंह, ये तो वक्त ही बताएगा,पर नए मुख्यमंत्री के लिए अभी से चुनौतियां सामने खड़ी हैं. शपथ के बाद कुर्सी संभालते ही नए सीएम के लिए वेतन, कर्ज का बोझ सबसे पहले है, जिनसे उन्हें पार पाना होगा. बिहार में इन दिनों सरकारी खजाने को लेकर गंभीर स्थिति बनती दिख रही है.राज्य के कई हिस्सों से ऐसी खबरें आ रही हैं कि बड़ी संख्या में कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है और ठेकेदारों का भुगतान भी अटका हुआ है.अप्रैल के लगभग दो हफ्ते बीत जाने के बाद भी करीब पांच लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारियों को मार्च महीने का वेतन या भुगतान नहीं मिल सका है.अनुमान है कि केवल वेतन और पेंशन के मद में ही सरकार को हर महीने करीब 9 से 10 हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था करनी होती है. यह स्थिति सामान्य देरी नहीं, बल्कि गहरे वित्तीय दबाव की ओर इशारा करती है.

RELATED POSTS

बांकीपुर विधानसभा सीट को लेकर सियासी हलचल……

श्रावणी मेला में कांवरियों को सभी आवश्यक सुविधाएं मिलेंगी………….

सैलरी को लेकर फंसेगा पेच

यह समस्या किसी एक जिले या विभाग तक सीमित नहीं है. सहरसा, मधुबनी, बांका, गोपालगंज, सीतामढ़ी और पूर्वी चंपारण जैसे जिलों में बड़ी संख्या में कर्मचारियों को वेतन का इंतजार करना पड़ रहा है. शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय प्रशासन से जुड़े कर्मचारियों पर इसका सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है.बिहार में केवल शिक्षा विभाग में ही लगभग 4 लाख शिक्षक और कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि स्वास्थ्य और अन्य विभागों को मिलाकर कुल सरकारी कर्मियों की संख्या लगभग 5 से 5.5 लाख के बीच बताई जाती है. वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों की रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित हो रही हैं, बैंक की किस्त और बच्चों की पढ़ाई तक पर असर पड़ रहा है, जिससे उनके बीच असंतोष बढ़ता दिख रहा है.

सिर्फ कर्मचारियों का वेतन ही नहीं, बल्कि ठेकेदारों का भुगतान भी लंबे समय से लंबित है.सड़क, भवन, सिंचाई और ग्रामीण विकास से जुड़े ठेकेदारों को समय पर पैसा नहीं मिलने के कारण कई परियोजनाओं की रफ्तार धीमी पड़ गई है.अनुमान है कि विभिन्न विभागों में ठेकेदारों का करीब 12 से 15 हजार करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है. ग्रामीण कार्य विभाग और पथ निर्माण विभाग की कई योजनाओं में ठेकेदारों ने काम की गति कम कर दी है, क्योंकि उन्हें पुराने बिल का भुगतान नहीं मिला है.कुछ जिलों में तो निर्माण कार्य अस्थायी रूप से रोकने की स्थिति भी बन गई है, जिससे विकास कार्यों पर सीधा असर पड़ रहा है.

कई कारण एक साथ काम कर रहे

इस पूरे हालात के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं.सबसे बड़ा कारण है राज्य की सीमित आमदनी.बिहार का कुल वार्षिक बजट वित्तीय वर्ष 2024-25 में करीब 2.78 लाख करोड़ रुपये का है, लेकिन इसमें से राज्य की अपनी आय यानी टैक्स और अन्य स्रोतों से मिलने वाली राशि केवल 60 से 65 हजार करोड़ रुपये के आसपास है. बाकी राशि केंद्र सरकार से मिलने वाले हिस्से और अनुदान पर निर्भर रहती है.इसका मतलब यह है कि राज्य की कुल आय का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा बाहरी स्रोतों पर निर्भर है. जब केंद्र से पैसा समय पर नहीं आता या अपेक्षा से कम आता है, तो खजाने पर दबाव तुरंत बढ़ जाता है.

दूसरा बड़ा कारण हाल के समय में बढ़ा सरकारी खर्च है.सरकार की सामाजिक योजनाओं पर खर्च लगातार बढ़ रहा है.उदाहरण के तौर पर महिलाओं को आर्थिक सहायता, छात्रवृत्ति, पेंशन और मुफ्त राशन जैसी योजनाओं पर हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं. केवल सामाजिक सुरक्षा और कल्याण योजनाओं पर ही राज्य सरकार का वार्षिक खर्च 35 से 40 हजार करोड़ रुपये के आसपास पहुंच चुका है. अगर एक साथ बड़ी राशि जारी करनी पड़े, तो खजाने का संतुलन बिगड़ जाता है.अगर आय के स्रोत मजबूत नहीं हों, तो ऐसी योजनाएं वित्तीय दबाव को और बढ़ा सकती हैं.

राज्य पर कर्ज का बोझ भी लगातार बढ़ रहा

इसके अलावा राज्य पर कर्ज का बोझ भी लगातार बढ़ रहा है. बिहार सरकार पर कुल सार्वजनिक कर्ज अब 3.5 से 4 लाख करोड़ रुपये के बीच पहुंच चुका है.हर साल सरकार को केवल ब्याज और किस्त चुकाने में ही लगभग 30 से 35 हजार करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं. इसका मतलब यह है कि बजट का बड़ा हिस्सा पुराने कर्ज को चुकाने में चला जाता है और विकास कार्यों तथा कर्मचारियों के भुगतान के लिए पैसा कम बचता है.कई बार पुराने कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज लेना पड़ता है, जिससे स्थिति और जटिल हो जाती है.

इन सभी कारणों का असर अब साफ तौर पर दिखने लगा है.वेतन में देरी, ठेकेदारों का भुगतान अटकना और योजनाओं की रफ्तार धीमी पड़ना इस बात के संकेत हैं कि वित्तीय स्थिति सामान्य नहीं है.अगर समय रहते सरकार ने अपनी आय बढ़ाने, खर्च को संतुलित करने और वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने के ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले महीनों में यह दबाव और बढ़ सकता है. बिहार के सामने यह एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है.अगले मुख्यमंत्री को राजस्व बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और खर्च की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने जैसे फैसले लेने होंगे, ताकि खजाने पर दबाव कम हो और राज्य की विकास गति प्रभावित न हो.

 

  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link
UB India News

UB India News

Related Posts

बांकीपुर विधानसभा सीट को लेकर सियासी हलचल……

बांकीपुर विधानसभा सीट को लेकर सियासी हलचल……

by UB India News
July 3, 2026
0

बिहार में बीजेपी की परंपरागत सीट रही बांकीपुर विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव का ऐलान हो चुका है। इस सीट...

श्रावणी मेला में कांवरियों को सभी आवश्यक सुविधाएं मिलेंगी………….

श्रावणी मेला में कांवरियों को सभी आवश्यक सुविधाएं मिलेंगी………….

by UB India News
July 3, 2026
0

पर्यटन सचिव श्री लोकेश कुमार सिंह ने शुक्रवार को मुख्य सचिवालय स्थित पर्यटन विभाग कार्यालय में 30 जुलाई-28 अगस्त के...

मोदी सरकार के सम्भावित कैबिनेट विस्तार को लेकर बिहार में चर्चा जोरों पर …………….

मोदी सरकार के सम्भावित कैबिनेट विस्तार को लेकर बिहार में चर्चा जोरों पर …………….

by UB India News
July 3, 2026
0

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैबिनेट की सूरत पूरी तरह नहीं पर बदलने वाली है। पीएम मोदी के आसपास बैठने वाले...

स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की पीएमसीएच में दूसरी बड़ी कार्रवाई………………..

स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की पीएमसीएच में दूसरी बड़ी कार्रवाई………………..

by UB India News
July 3, 2026
0

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार एक्शन मोड में आ गए. वह लगातार हॉस्पिटल्स की व्यवस्थाओं को जायजा लेते दिखाई...

जब सत्ता के दो मंत्री आमने-सामने हों, तो सवाल केवल भरत तिवारी का नहीं, व्यवस्था की विश्वसनीयता का भी है………………

जब सत्ता के दो मंत्री आमने-सामने हों, तो सवाल केवल भरत तिवारी का नहीं, व्यवस्था की विश्वसनीयता का भी है………………

by UB India News
July 3, 2026
0

बिहार के भोजपुर में भरत तिवारी एनकाउंटर का मामला अब केवल एक पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है।...

Next Post
PM मोदी ने 5 देशों को क्‍यों घुमाया फोन……………………

देश की महिलाओं के नाम PM मोदी का खुला पत्र , कहा- लोकतंत्र होगा मजबूत................

बाबा साहेब की 135वीं जयंती: राष्ट्रपति, PM मोदी समेत अन्य हस्तियों ने डॉ आंबेडकर को नमन किया

बाबा साहेब की 135वीं जयंती: राष्ट्रपति, PM मोदी समेत अन्य हस्तियों ने डॉ आंबेडकर को नमन किया

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • front
  • Home
Contect Us - ubindianews@gmail.com

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • front
  • Home

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Send this to a friend