ईरान-अमेरिका युद्ध को लेकर जब इस्लामाबाद में वार्ता हुई, तो उम्मीद की जा रही थी कि कुछ तो हल निकलेगा लेकिन ये प्रयास पूरी तरह से विफल निकल गया. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पाकिस्तान से बिना किसी समझौते के लौट आए. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान को अपना अंतिम और सबसे अच्छा प्रस्ताव दे दिया है. वांस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि हमने 21 घंटे तक अच्छी नीयत से बातचीत की. अब फैसला ईरान को करना है कि वह प्रस्ताव स्वीकार करता है या नहीं. अब सवाल ये कि अगर दो हफ्ते के सीजफायर का समय गुजर गया, तो ट्रंप के पास विकल्प क्या होंगे?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर जस्ट द न्यूज का आर्टिकल शेयर करते हुए अपना रिएक्शन शेयर कर दिया है.
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर दिए विकल्प.
उनका इशारा ईरान को लेकर वेनेजुएला वाली नीति की तरह है. अमेरिका ने निकोलस मादुरो को पकड़ने से पहले नौसैनिक घेराबंदी लगाकर उस देश की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह तोड़ दिया था. तेल की आमदनी बंद कर दी गई थी. अब अगर ईरान शनिवार को दिए गए अंतिम समझौते को मानने से इनकार कर देता है, तो ट्रंप दो रास्ते चुन सकते है-‘
- उनके पास पहला रास्ता तो ये है कि वो तेहरान को पाषाण युग में वापस भेजने के लिए बमबारी कर सकते हैं, जैसा उन्होंने वादा किया था.
- दूसरा ये कि वो फिर वेनेजुएला वाली उसी सफल रणनीति को दोहरा सकते हैं और ईरान की अर्थव्यवस्था को नौसैनिक घेराबंदी से घुटने पर ला सकते हैं.
फारस की खाड़ी में पहुंचा अमेरिकी युद्धपोत
लेक्सिंगटन इंस्टीट्यूट की राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ रेबेका ग्रांट ने कहा कि अमेरिकी नौसेना के लिए होर्मुज में आने-जाने वाले हर जहाज पर पूरी निगरानी रखना बहुत आसान है. पिछले 24 घंटे में 10 जहाज गुजरे हैं, उनमें एक रूसी टैंकर भी था. चीन और भारत को तेल पहुंच रहा है. अगर ईरान जिद पर अड़ा रहा तो अमेरिकी नौसेना खर्ग द्वीप और ओमान के पास संकरे रास्ते पर पूरी नजर रख सकती है. कोई भी जहाज बिना अमेरिकी नौसेना की अनुमति के नहीं गुजर सकेगा. इससे चीन-भारत पर भी दबाव बढ़ेगा क्योंकि दोनों देश ईरान से तेल खरीदते हैं. मजेदार बात यह है कि वेनेजुएला घेराबंदी का नेतृत्व करने वाला विशाल युद्धपोत यूएसएस जेराल्ड फोर्ड अब फारस की खाड़ी में पहुंच गया है. कुछ दिन पहले इसमें आग लगने से मरम्मत और आराम के लिए रुका था. अब यह यूएसएस अब्राहम लिंकन और दूसरे बड़े युद्धपोतों के साथ तैनात है. विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप आसानी से ईरान के होर्मुज पर नियंत्रण हासिल कर सकते हैं.
खर्ग द्वीप होगा ट्रंप के एजेंडे में
ट्रंप का मुख्य लक्ष्य था कि ईरान अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को पूरी तरह छोड़ दे, लेकिन वेंस ने कहा कि अभी तक ऐसा नहीं हुआ है. अस्थायी युद्धविराम का समय खत्म हो रहा है. ट्रंप प्रशासन पहले से ही कई विकल्प तैयार कर चुका है. रिटायर्ड जनरल जैक कीन ने पिछले हफ्ते ही सुझाव दिया था कि अगर युद्ध फिर शुरू हो तो ईरान के खर्ग द्वीप पर कब्जा किया जा सकता है या उसे नष्ट किया जा सकता है. उन्होंने लिखा कि नौसेना घेराबंदी लगाकर ईरान की तेल निर्यात लाइन बंद कर दी जाए तो उसकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाएगी, यही सबसे बड़ा दबाव होगा.
ईरान-अमेरिका युद्ध को लेकर जब इस्लामाबाद में वार्ता हुई, तो उम्मीद की जा रही थी कि कुछ तो हल निकलेगा लेकिन ये प्रयास पूरी तरह से विफल निकल गया. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पाकिस्तान से बिना किसी समझौते के लौट आए. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान को अपना अंतिम और सबसे अच्छा प्रस्ताव दे दिया है. वांस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि हमने 21 घंटे तक अच्छी नीयत से बातचीत की. अब फैसला ईरान को करना है कि वह प्रस्ताव स्वीकार करता है या नहीं. अब सवाल ये कि अगर दो हफ्ते के सीजफायर का समय गुजर गया, तो ट्रंप के पास विकल्प क्या होंगे?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर जस्ट द न्यूज का आर्टिकल शेयर करते हुए अपना रिएक्शन शेयर कर दिया है.
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर दिए विकल्प.
उनका इशारा ईरान को लेकर वेनेजुएला वाली नीति की तरह है. अमेरिका ने निकोलस मादुरो को पकड़ने से पहले नौसैनिक घेराबंदी लगाकर उस देश की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह तोड़ दिया था. तेल की आमदनी बंद कर दी गई थी. अब अगर ईरान शनिवार को दिए गए अंतिम समझौते को मानने से इनकार कर देता है, तो ट्रंप दो रास्ते चुन सकते है-‘
- उनके पास पहला रास्ता तो ये है कि वो तेहरान को पाषाण युग में वापस भेजने के लिए बमबारी कर सकते हैं, जैसा उन्होंने वादा किया था.
- दूसरा ये कि वो फिर वेनेजुएला वाली उसी सफल रणनीति को दोहरा सकते हैं और ईरान की अर्थव्यवस्था को नौसैनिक घेराबंदी से घुटने पर ला सकते हैं.
फारस की खाड़ी में पहुंचा अमेरिकी युद्धपोत
लेक्सिंगटन इंस्टीट्यूट की राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ रेबेका ग्रांट ने कहा कि अमेरिकी नौसेना के लिए होर्मुज में आने-जाने वाले हर जहाज पर पूरी निगरानी रखना बहुत आसान है. पिछले 24 घंटे में 10 जहाज गुजरे हैं, उनमें एक रूसी टैंकर भी था. चीन और भारत को तेल पहुंच रहा है. अगर ईरान जिद पर अड़ा रहा तो अमेरिकी नौसेना खर्ग द्वीप और ओमान के पास संकरे रास्ते पर पूरी नजर रख सकती है. कोई भी जहाज बिना अमेरिकी नौसेना की अनुमति के नहीं गुजर सकेगा. इससे चीन-भारत पर भी दबाव बढ़ेगा क्योंकि दोनों देश ईरान से तेल खरीदते हैं. मजेदार बात यह है कि वेनेजुएला घेराबंदी का नेतृत्व करने वाला विशाल युद्धपोत यूएसएस जेराल्ड फोर्ड अब फारस की खाड़ी में पहुंच गया है. कुछ दिन पहले इसमें आग लगने से मरम्मत और आराम के लिए रुका था. अब यह यूएसएस अब्राहम लिंकन और दूसरे बड़े युद्धपोतों के साथ तैनात है. विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप आसानी से ईरान के होर्मुज पर नियंत्रण हासिल कर सकते हैं.
खर्ग द्वीप होगा ट्रंप के एजेंडे में
ट्रंप का मुख्य लक्ष्य था कि ईरान अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को पूरी तरह छोड़ दे, लेकिन वेंस ने कहा कि अभी तक ऐसा नहीं हुआ है. अस्थायी युद्धविराम का समय खत्म हो रहा है. ट्रंप प्रशासन पहले से ही कई विकल्प तैयार कर चुका है. रिटायर्ड जनरल जैक कीन ने पिछले हफ्ते ही सुझाव दिया था कि अगर युद्ध फिर शुरू हो तो ईरान के खर्ग द्वीप पर कब्जा किया जा सकता है या उसे नष्ट किया जा सकता है. उन्होंने लिखा कि नौसेना घेराबंदी लगाकर ईरान की तेल निर्यात लाइन बंद कर दी जाए तो उसकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाएगी, यही सबसे बड़ा दबाव होगा.







