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अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता आज पाकिस्तान के इस्लामाबाद में…………

UB India News by UB India News
April 12, 2026
in अन्तर्राष्ट्रीय
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अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता आज पाकिस्तान के इस्लामाबाद में…………
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अमेरिका के साथ शांति वार्ता में भाग लेने के लिए ईरान का उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंच गया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बताया कि संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर क़लीबाफ़ के नेतृत्व में और विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची सहित ईरान का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार देर रात इस्लामाबाद पहुंचा। यह प्रतिनिधिमंडल अमेरिका के साथ शांति वार्ता में भाग लेने के लिए वहां पहुंचा है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि रावलपिंडी स्थित पाकिस्तानी वायु सेना के नूर खान एयरबेस पर प्रतिनिधिमंडल का स्वागत पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार, नेशनल असेंबली के अध्यक्ष सरदार अयाज़ सादिक, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने किया।

वहीं, संयुक्त राज्य अमेरिका का प्रतिनिधित्व एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल करेगा, जिसमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर शामिल होंगे। व्हाइट हाउस के अनुसार, वाशिंगटन और तेहरान शनिवार की सुबह स्थानीय समयानुसार इस्लामाबाद में अपनी पहली बैठक में शामिल होंगे।

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क्यों बौखलाया गया है पाकिस्तान……………….

रूस के बड़े हमले से दहल उठी यूक्रेन की राजधानी कीव …………

ट्रंप ने दोहराई घिसी पिटी बातें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरान के साथ होने वाली आगामी वार्ता में उनका मुख्य ध्यान इस बात पर होगा कि तेहरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के समर्थन के साथ या उसके बिना भी होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखा जाएगा।

धमकी और चेतावनी, अमेरिका-ईरान के बीच सुलह करा पाएंगे शहबाज-मुनीर?

अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला कर दिया था, जिसका ईरान ने करारा जवाब दिया। इस युद्ध ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी थी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ईरान ने बंद कर दिया था जिससे कच्चे तेलों और गैस के दाम बढ़ गए थे। आखिरकार अमेरिका और ईरान सीजफायर के लिए राजी हो गए और 40 दिन तक चले युद्ध पर 15 दिनों का विराम लग गया है। इसके बाद दोनों देश शांति वार्ता के लिए राजी हुए हैं, जिसकी मध्यस्थता पाकिस्तान कर रहा है। आज (शनिवार 11 अप्रैल 2026) को दोनों देशों के बीच शांति वार्ता होनी है, दुनिया दोनों पक्षों के बीच संघर्ष समाप्त करने वाले समझौते की उम्मीद लगाए बैठी है।

पाकिस्तान ने शांति वार्ता के लिए मनाया

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बुधवार को दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा करते हुए कहा था कि अमेरिका और ईरान इस्लामाबाद में शांति वार्ता करेंगे। उन्होंने अपने बयान में अमेरिका और ईरान के राष्ट्रपतियों का जिक्र किया था। संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ के नेतृत्व में ईरानी प्रतिनिधिमंडल, विदेश मंत्री अब्बास अरघची के साथ, शनिवार को इस्लामाबाद वार्ता में भाग लेगा, जो उपराष्ट्रपति जे डी वैंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के इस्लामाबाद पहुंचने के बाद शुरू होगी।

ईरानी प्रतिनिधिमंडल का पाकिस्तान में स्वागत

पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने बताया कि ईरान से आए प्रतिनिधिमंडल का आगमन पर उप प्रधानमंत्री/विदेश मंत्री इशाक डार, नेशनल असेंबली के अध्यक्ष अयाज़ सादिक, रक्षा बलों के प्रमुख और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर और गृह मंत्री सैयद मोहसिन रज़ा नक़वी ने स्वागत किया। विदेश कार्यालय ने एक बयान में कहा, “ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ के नेतृत्व में और विदेश मंत्री अब्बास अरघची के साथ ईरान का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल आज इस्लामाबाद वार्ता में भाग लेने के लिए इस्लामाबाद पहुंचा।”

शांति वार्ता से पहले ईरान ने रख दी हैं शर्तें

कुछ रिपोर्टों में ईरानी मीडिया के हवाले से कहा गया है कि यदि युद्धविराम समझौते में तय की गई शर्तें पूरी होती हैं तो प्रतिनिधिमंडल शांति वार्ता में भाग लेगा। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम ने बताया था कि “पूर्व शर्तों” के पूरा होने तक बातचीत शुरू नहीं होगी, जो इस्लामाबाद रवाना होने से पहले ग़ालिबफ़ के संदेश से मिलती-जुलती थी। ग़ालिबफ़ ने X पर एक पोस्ट में कहा, दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से तय किए गए दो उपाय अभी तक लागू नहीं किए गए हैं: लेबनान में युद्धविराम और बातचीत शुरू होने से पहले ईरान की ज़ब्त की गई संपत्तियों की रिहाई। ऐसे में बातचीत शुरू होने से पहले इन दोनों शर्तों को पूरा किया जाना चाहिए।

 

इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था

Image Source : AFPइस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था

 

अमेरिका ने शांति वार्ता से पहले दी है चेतावनी

इस बीच, उपराष्ट्रपति वैंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के जल्द ही इस्लामाबाद पहुंचने की उम्मीद थी। खबरों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैंस को बातचीत के संबंध में “कुछ स्पष्ट दिशा-निर्देश” दिए हैं। इस्लामाबाद जाने वाले विमान में सवार होने से पहले वैंस ने मीडिया से कहा, “जैसा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, अगर ईरानी सद्भावना से बातचीत करने को तैयार हैं, तो हम निश्चित रूप से उनका स्वागत करने के लिए तैयार हैं। अगर वे हमें धोखा देने की कोशिश करेंगे, तो उन्हें पता चलेगा कि हमारी वार्ताकार टीम इतनी सहृदय नहीं है।”

शांति वार्ता में लेबनान पर हमले रोकने का भी मुद्दा

ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने लेबनान में ईरान के राजदूत मोहम्मद रजा शिबानी से फोन पर बातचीत की और इससे पहले कहा कि अमेरिका को अपने युद्धविराम संबंधी प्रतिबद्धताओं का पालन करना चाहिए, जिसमें लेबनान को भी शामिल करना शामिल है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने कहा था कि लेबनान पर इजरायली हमले ने शुरुआती युद्धविराम का स्पष्ट उल्लंघन किया है और इससे बातचीत निरर्थक हो जाएगी। ईरान का प्रतिनिधिमंडल लेबनान में इज़राइल के हमलों के कारण ईरानियों की यात्रा पर संदेह जताते हुए सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों के बीच आया है।

अमेरिका-ईरान के बीच सुलह करा पाएगा पाकिस्तान

ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता ईरान पर अमेरिका-इजरायल युद्ध में दो सप्ताह के सीजफायर के बीच हो रही है। पाकिस्तान ने दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने के लिए राजनयिक प्रयास का नेतृत्व किया, जो इस सप्ताह की शुरुआत में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शरीफ की अपील के बाद संभव हो पाया, जिससे युद्ध विराम हो सका। पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने आशा व्यक्त की है कि दोनों पक्ष रचनात्मक रूप से बातचीत करेंगे और उन्होंने पश्चिम एशिया में संघर्ष के स्थायी और टिकाऊ समाधान तक पहुंचने के लिए दोनों पक्षों को सहयोग जारी रखने की पाकिस्तान की इच्छा को दोहराया।

रेड जोन में तब्दील हुआ इस्लामाबाद

वार्ता से पहले इस्लामाबाद में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई  है और पूरा शहर ‘रेड अलर्ट’ पर है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने बताया कि आने वाले प्रतिनिधिमंडलों की बहुस्तरीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 10,000 से अधिक पुलिस और सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है। महत्वपूर्ण इमारतों वाले रेड ज़ोन की सुरक्षा सेना और रेंजर्स द्वारा की जा रही है और केवल अधिकृत अधिकारियों और निवासियों को ही वहां से गुजरने की अनुमति है। आगामी वार्ताओं पर वैश्विक स्तर पर कड़ी नजर रखी जा रही है, क्योंकि उनकी सफलता या विफलता का पश्चिम एशिया की सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा बाजारों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।

 

अमेरिका के साथ शांति वार्ता में भाग लेने के लिए ईरान का उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंच गया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बताया कि संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर क़लीबाफ़ के नेतृत्व में और विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची सहित ईरान का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार देर रात इस्लामाबाद पहुंचा। यह प्रतिनिधिमंडल अमेरिका के साथ शांति वार्ता में भाग लेने के लिए वहां पहुंचा है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि रावलपिंडी स्थित पाकिस्तानी वायु सेना के नूर खान एयरबेस पर प्रतिनिधिमंडल का स्वागत पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार, नेशनल असेंबली के अध्यक्ष सरदार अयाज़ सादिक, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने किया।

वहीं, संयुक्त राज्य अमेरिका का प्रतिनिधित्व एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल करेगा, जिसमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर शामिल होंगे। व्हाइट हाउस के अनुसार, वाशिंगटन और तेहरान शनिवार की सुबह स्थानीय समयानुसार इस्लामाबाद में अपनी पहली बैठक में शामिल होंगे।

ट्रंप ने दोहराई घिसी पिटी बातें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरान के साथ होने वाली आगामी वार्ता में उनका मुख्य ध्यान इस बात पर होगा कि तेहरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के समर्थन के साथ या उसके बिना भी होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखा जाएगा।

धमकी और चेतावनी, अमेरिका-ईरान के बीच सुलह करा पाएंगे शहबाज-मुनीर?

अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला कर दिया था, जिसका ईरान ने करारा जवाब दिया। इस युद्ध ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी थी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ईरान ने बंद कर दिया था जिससे कच्चे तेलों और गैस के दाम बढ़ गए थे। आखिरकार अमेरिका और ईरान सीजफायर के लिए राजी हो गए और 40 दिन तक चले युद्ध पर 15 दिनों का विराम लग गया है। इसके बाद दोनों देश शांति वार्ता के लिए राजी हुए हैं, जिसकी मध्यस्थता पाकिस्तान कर रहा है। आज (शनिवार 11 अप्रैल 2026) को दोनों देशों के बीच शांति वार्ता होनी है, दुनिया दोनों पक्षों के बीच संघर्ष समाप्त करने वाले समझौते की उम्मीद लगाए बैठी है।

पाकिस्तान ने शांति वार्ता के लिए मनाया

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शांति वार्ता से पहले ईरान ने रख दी हैं शर्तें

कुछ रिपोर्टों में ईरानी मीडिया के हवाले से कहा गया है कि यदि युद्धविराम समझौते में तय की गई शर्तें पूरी होती हैं तो प्रतिनिधिमंडल शांति वार्ता में भाग लेगा। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम ने बताया था कि “पूर्व शर्तों” के पूरा होने तक बातचीत शुरू नहीं होगी, जो इस्लामाबाद रवाना होने से पहले ग़ालिबफ़ के संदेश से मिलती-जुलती थी। ग़ालिबफ़ ने X पर एक पोस्ट में कहा, दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से तय किए गए दो उपाय अभी तक लागू नहीं किए गए हैं: लेबनान में युद्धविराम और बातचीत शुरू होने से पहले ईरान की ज़ब्त की गई संपत्तियों की रिहाई। ऐसे में बातचीत शुरू होने से पहले इन दोनों शर्तों को पूरा किया जाना चाहिए।

 

इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था

Image Source : AFPइस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था

 

अमेरिका ने शांति वार्ता से पहले दी है चेतावनी

इस बीच, उपराष्ट्रपति वैंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के जल्द ही इस्लामाबाद पहुंचने की उम्मीद थी। खबरों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैंस को बातचीत के संबंध में “कुछ स्पष्ट दिशा-निर्देश” दिए हैं। इस्लामाबाद जाने वाले विमान में सवार होने से पहले वैंस ने मीडिया से कहा, “जैसा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, अगर ईरानी सद्भावना से बातचीत करने को तैयार हैं, तो हम निश्चित रूप से उनका स्वागत करने के लिए तैयार हैं। अगर वे हमें धोखा देने की कोशिश करेंगे, तो उन्हें पता चलेगा कि हमारी वार्ताकार टीम इतनी सहृदय नहीं है।”

शांति वार्ता में लेबनान पर हमले रोकने का भी मुद्दा

ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने लेबनान में ईरान के राजदूत मोहम्मद रजा शिबानी से फोन पर बातचीत की और इससे पहले कहा कि अमेरिका को अपने युद्धविराम संबंधी प्रतिबद्धताओं का पालन करना चाहिए, जिसमें लेबनान को भी शामिल करना शामिल है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने कहा था कि लेबनान पर इजरायली हमले ने शुरुआती युद्धविराम का स्पष्ट उल्लंघन किया है और इससे बातचीत निरर्थक हो जाएगी। ईरान का प्रतिनिधिमंडल लेबनान में इज़राइल के हमलों के कारण ईरानियों की यात्रा पर संदेह जताते हुए सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों के बीच आया है।

अमेरिका-ईरान के बीच सुलह करा पाएगा पाकिस्तान

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रेड जोन में तब्दील हुआ इस्लामाबाद

वार्ता से पहले इस्लामाबाद में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई  है और पूरा शहर ‘रेड अलर्ट’ पर है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने बताया कि आने वाले प्रतिनिधिमंडलों की बहुस्तरीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 10,000 से अधिक पुलिस और सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है। महत्वपूर्ण इमारतों वाले रेड ज़ोन की सुरक्षा सेना और रेंजर्स द्वारा की जा रही है और केवल अधिकृत अधिकारियों और निवासियों को ही वहां से गुजरने की अनुमति है। आगामी वार्ताओं पर वैश्विक स्तर पर कड़ी नजर रखी जा रही है, क्योंकि उनकी सफलता या विफलता का पश्चिम एशिया की सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा बाजारों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।

 

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