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आख‍िर क्‍यों बीजेपी अध्‍यक्ष से पहले द‍िलाई शपथ?

UB India News by UB India News
April 10, 2026
in पटना, बिहार
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आख‍िर क्‍यों बीजेपी अध्‍यक्ष से पहले द‍िलाई शपथ?
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गठबंधन धर्म का निर्वाह करती भाजपा आज राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सम्मानजनक एक्जिट प्लान तैयार कर एक सकारात्मक संदेश देने में कामयाब हुई है। बीजेपी चाहती तो बिहार से चयनित पांच उम्मीदवारों को एक साथ सम्मान देकर अपना राजनीतिक कद बढ़ा सकती थी। लेकिन साथी दल का ख्याल कर भाजपा ने न केवल लव-कुश के बीच बल्कि राज्य के विकास और सुशासन पसंद जनता के बीच भी एक सकारात्मक संदेश देने में कामयाबी हासिल की है।

अटल बिहारी से शुरू हुआ सम्मान
बीजेपी की राजनीति के और राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सम्मान का सिलसिला बड़ा पुराना है। यह सम्मान तो वर्ष 1995 से ही शुरू हो गया था। 1996 में तो अटल जी की सरकार में रेल और कृषि मंत्रालय तक देखा। वर्ष 2000 में तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सीएम के रूप में प्रोजेक्ट किया बल्कि कम विधायक रहने के बावजूद मुख्यमंत्री भी बनाया। तब भाजपा के भीतर भी मतभेद उभर कर आए।

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दरअसल वर्ष 2000 का चुनाव बिहार और झारखंड जब साथ थे तब हुआ। तब 324 विधानसभा सीटों पर चुनाव हुए। भाजपा को 67 सीटें मिली और समता को 34 । फिर भी अटल बिहारी वाजपेयी ने 3 मार्च 2000 को नीतीश कुमार को पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नामित कर उन्हें बड़ा सम्मान दिया था। NDA के पास पूर्ण बहुमत (324 में 151 सीटें) नहीं होने के बावजूद, अटल बिहारी वाजपेयी के कहने पर नीतीश ने शपथ ली। हालांकि, संख्या बल की कमी के कारण 7 दिन बाद ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। और फिर तो डबल इंजन की सरकार 2005 से ले कर आज तक चली तो सीएम नीतीश कुमार ही रहे। इस बीच भले नीतीश कुमार दो बार राजद के साथ मिल कर महागठबंधन की सरकार बनाई।

वर्ष 2020 का विधानसभा
अटल ब‍िहारी वाजपेयी ने जो सम्‍मान का स‍िलस‍िला शुरू क‍िया, उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जारी रखा। वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में एक ऐसी स्थिति आई जहां नीतीश कुमार खुद मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहते थे। तब विधायकों का गणित कुछ इस तरह था। 2020 बिहार विधानसभा चुनाव में कुल 243 सीटों में से एनडीए ने 125 सीटें जीतकर बहुमत हासिल की थी। तब नीतीश कुमार की जदयू को 43 सीटें मिलीं, जबकि भाजपा को 74 सीटों के साथ सबसे बड़ा सहयोगी दल बनी। वही विपक्षी महागठबंधन को 110 सीटें मिलीं, जिसमें राजद ने 75 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया। बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीतीश कुमार के राजनीतिक व्यक्तित्व का सम्मान करते उन्हें मुख्यमंत्री का पद सौंपा और उन्हें मना भी लिया।

शेष अभी भी है सम्मान?
राजनीतिक गलियारों की माने तो राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस्तीफा देने के बाद केवल राज्यसभा पद पर ही नहीं रहेंगे। इस विशाल व्यक्तित्व का सम्मान करने की सोच रही है। कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार को उप राष्ट्रपति, सभापति, केंद्रीय मंत्री या फिर एनडीए के संयोजक पद भी दिया जा सकता है।

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