सियासत की तासीर अजीब होती है. कभी दोस्त दुश्मन होता है तो कभी दुश्मन दोस्त. राजनीत में पल-पल हवा का रुख बदलता रहता है. आंखों का तारा कब आंखों को चुभने लगे, यह कोई नहीं जानता. राघव चड्ढा के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है. कल तक राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी के यूथ आईकन के रूप में देखे जाते थे. आम आदमी पार्टी को राघव चड्ढा में फ्यूचर का स्टार लीडर नजर आता था. मगर आज हालात ऐसे हो गए कि राघव चड्ढा की आम आदमी पार्टी ने बोलती ही बंद कर दी. आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा के पर कतर दिए. अब वह राज्यसभा में उपनेता पद पर नहीं रहे. उनके बोलने की टाइमिंग पर भी कैंची चल गई है. बीते कुछ समय से राघव चड्ढा अक्सर आम आदमी के मुद्दे संसद में उठाते थे. ये ऐसे मुद्दे होते थे, जो अक्सर संसद में नहीं गूंजते थे. अब सवाल है कि आखिर आम आदमी की बात करते-करते राघव चड्ढा कैसे आम आदमी पार्टी का विलेन बन गए?
सबसे पहले हालिया एक्शन पर नजर डालते हैं. आम आदमी पार्टी (AAP) ने गुरुवार को वह फैसला लिया, जिसकी आशंका जताई जा रही थी. सियासी गलियारों में यह चर्चा आम थी कि राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी में सबकुछ सही नहीं चल रहा. यह बात गुरुवार को सच भी साबित हो गई. राज्यसभा में राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया गया. आम आदमी पार्टी ने उनकी जगह पंजाब के सांसद अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी. पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को खत लिखकर कहा कि अब राघव चड्ढा को पार्टी की तरफ से बोलने का समय न दिया जाए.
आम आदमी पार्टी का कलह
बस यही वो फैसला था, जिसने आम आदमी पार्टी के भीतर के कलह को सरेआम कर दिया. यह कोई संगठनात्मक बदलाव नहीं था. यह राघव चड्ढा पर आम आदमी पार्टी का एक्शन था. यह इस बात का सबूत था कि आम आदमी पार्टी राघव चड्ढा से अब खुश नहीं है. राघव चड्ढा कभी अरविंद केजरीवाल के करीबी माने जाते थे. वह कभी पार्टी की आवाज को प्रमुखता से रखते थे. मगर बीते कुछ समय से उनकी चुप्पी ने आम आदमी पार्टी को इस एक्शन पर मजबूर कर दिया. कभी आम आदमी पार्टी का चमकता सितारा आज पार्टी के लिए ‘विलेन’ बन गया है. सवाल यह है कि आम आदमी के मुद्दे उठाते-उठाते वे पार्टी के लिए कैसे परेशानी का सबब बन गए?

राघव चड्ढा कभी अरविंद केजरीवाल के खास थे. (फाइल फोटो)
राघव चड्ढा के स्टैंड में बदलाव?
बीते कुछ समय से राघव चड्ढा के स्टैंड में बड़ा बदलाव आया है. पहले वह मुखर होकर पार्टी की आवाज उठाते थे. वह पार्टी के मसलों पर मीडिया को ब्रीफ करते थे. पार्टी लाइन की बातें करते थें. पार्टी की हर बात पर पुरजोर आवाज उठाते थे. मगर अचानक कुछ समय से वह पार्टी से इतर जनहित के मुद्दे उठाने लगे थे. वह पार्टी के मसले पर अक्सर चुप रहने लगे थे. राघव चड्ढा ने राज्यसभा में कई ऐसे मुद्दे उठाए जो सीधे आम आदमी से जुड़े थे. मसलन-
- उन्होंने मोबाइल डेटा की एक्सपायरी और रोलओवर की समस्या पर बात की.
- उन्होने एयरपोर्ट पर महंगे खाने-पीने और अतिरिक्त बैगेज चार्ज की ‘लूट’ पर सवाल खड़े किए.
- गिग वर्कर्स यानी जोमैटो, ब्लिंकिट और स्विगी जैसे ऐप्स के डिलीवरी बॉयज की कम मजदूरी का मसला उठाया और 10 मिनट डिलीवरी के दबाव और सामाजिक सुरक्षा की कमी पर जोर दिया.
- पैटरनिटी लीव यानी पितृत्व अवकाश को अधिकार बनाने, खाने में मिलावट, फ्लाइट डिले, पेपर लीक और टोल प्लाजा की लूट जैसे मुद्दे भी उठाए.
आम आदमी पार्टी को नहीं पसंद आया राघव का यह स्टैंड
इन मुद्दों के वीडियो वायरल हुए और आम लोग इनसे जुड़ गए. राघव चड्ढा की छवि बदलती गई. आम लोगों में लगा कि उनकी बात कहने वाला संसद में कोई है. उनका कहना था कि वह आम आदमी की बात करते हैं जो उनकी पार्टी का भी मूल मंत्र है. मगर आम आदमी पार्टी को यह पसंद नहीं आया. आम आदमी पार्टी का कहना है कि राघव चड्ढा पार्टी के मुद्दे नहीं उठाते. वह भाजपा या पीएम मोदी के खिलाफ सख्ती से नहीं बोलते. हालांकि, यह हकीकत है कि आम आदमी पार्टी की नाराजगी का सबसे बड़ा कारण राघव चड्ढा की ‘चुप्पी’ है. वह भी उस मसले पर जो मसला सीधे अरविंद केजरीवाल से जुड़ा है.
इन मुद्दों के वीडियो वायरल हुए और आम लोग इनसे जुड़ गए. राघव चड्ढा की छवि बदलती गई. आम लोगों में लगा कि उनकी बात कहने वाला संसद में कोई है. उनका कहना था कि वह आम आदमी की बात करते हैं जो उनकी पार्टी का भी मूल मंत्र है. मगर आम आदमी पार्टी को यह पसंद नहीं आया. आम आदमी पार्टी का कहना है कि राघव चड्ढा पार्टी के मुद्दे नहीं उठाते. वह भाजपा या पीएम मोदी के खिलाफ सख्ती से नहीं बोलते. हालांकि, यह हकीकत है कि आम आदमी पार्टी की नाराजगी का सबसे बड़ा कारण राघव चड्ढा की ‘चुप्पी’ है. वह भी उस मसले पर जो मसला सीधे अरविंद केजरीवाल से जुड़ा है.

एक्शन का सबसे बड़ा कारण
जी हां, जब अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया शराब नीति मामले में गिरफ्तार हुए थे, तब राघव चड्ढा लंदन में थे. वापस आने के बाद भी उन्होंने पार्टी के लिए ज्यादा कुछ न बोला और न किया. ऐसा आम आदमी पार्टी का कहना है. इसके अलावा, जब राउज एवेन्यू कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और मिीष सिसोदिया को बरी किया, तब भी राघव चड्ढा चुप रहे. वे पार्टी ऑफिस में अरविंद केजरीवाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं पहुंचे. न ही कोई बयान दिया. जबकि इस मामले पर आम आदमी पार्टी के सभी नेता अपने-अपने तरह से बयान देते दिखे. इन सबके बाद पार्टी को लगने लगा कि राघव चड्ढा अब आम आदमी पार्टी का स्टैंड नहीं लेते हैं. वह केवल अपना चेहरा चमका रहे हैं. पार्टी से उनका कोई लेना-देना नहीं.
आप के आरोप और राघव का पलटवार
तभी तो अतिशी से लेकर संजय सिंह तक ने कहा कि राघव चड्ढा भाजपा से डरते हैं. वे ‘रियल इश्यू’ नहीं उठाते, सिर्फ ‘सॉफ्ट इश्यू’ जैसे एयरपोर्ट का चाय-समोसा महंगा होने पर बोलते हैं. पार्टी का आरोप है कि राघव चड्ढा पार्टी लाइन नहीं फॉलो करते. आरोप है कि राघव चड्ढा ने इम्पीचमेंट मोशन पर भी साइन नहीं किए और पंजाब चुनावों से पहले पंजाब के मुद्दे भी नहीं उठाए. हालांकि, राघव चड्ढा का कहना है कि वह संसद में आम आदमी के मुद्दे उठाते रहे हैं. उन्होंने एक वीडियो शेयर कर कहा कि क्या आम आदमी के मुद्दे उठाना कोई गुनाह है? क्या मैंने कुछ अपराध किया है? उन्होंने आगे कहा कि उनकी चुप्पी को हार मत समझा जाए. वह चुप हुए हैं, मगर हारे नहीं हैं.







