बिहार में जो नयी सरकार अस्तित्व में आएगी उसमें इस बार भाजपा से अधिक जदयू के मंत्री होंगे। एनडीए से मिल रही खबर के अनुसार यह तय माना जा रहा कि इस बार मुख्यमंत्री की कुर्सी भाजपा के खाते में जानी है।
इस वजह से मंत्रिमंडल का गठन रिवर्स मोड में होना है। पिछले वर्ष नवंबर में बिहार में एनडीए जिस सरकार ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में शपथ ली थी उसमें नीतीश सहित 27 मंत्री थे। नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद संख्या 26 हो गयी है।
वर्तमान में जदयू के आठ विधायक मंत्री
वर्तमान में नीतीश कुमार के नेतृत्व में जो सरकार काम कर रही है उसमें नीतीश को छोड़कर जदयू के आठ मंत्री हैं। इनमें विजय चौधरी, बिजेंद्र प्रसाद यादव, श्रवण कुमार, अशोक चौधरी, लेसी सिंह, मदन सहनी, सुनील कुमार व जमां खान मंत्री हैं। कहा जा रहा कि इस बार संख्या 13-14 तक जा सकती है।
भाजपा के 13 विधायक हैं वर्तमान में मंत्री
अभी जो सरकार बिहार में काम कर रही है उनमें भाजपा के 13 विधायक मंत्री हैं। इनमें दो उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी व विजय कुमार सिन्हा भी शामिल हैं। इनके अतिरिक्त मंगल पांडेय, दुिलीप जायसवाल, रामकृपाल यादव, संजय टाइगर, अरुण शंकर प्रसाद, सुरेंद्र मेहता, नारायण प्रसाद, श्रेयसी सिंह, डॉ. प्रमोद कुमार, रमा निषाद व लखेंद्र कुमार रोशन भाजपा कोटे से मंत्री है। नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद भाजपा के मंत्रियों की संख्या में एक मंत्री के कम होने के बाद अभी 13 मंत्री हैं भाजपा से। भाजपा की संख्या दो से तीन तक कम हो सकती है।
कई मंत्रियों के एक से अधिक विभागों का प्रभार
भाजपा और जदयू दोनों के कोटे से जो मंत्री हैं उनमें कई के पास दो व दो से अधिक विभागों का प्रभार है। नए मंत्रिमंडल में इसका जिम्मा दूसरे मंत्रियों को मिलने की संभावना है।
जिन मंत्रियों के पास एक से अधिक विभाग का प्रभार है उनमें विजय कुमार सिन्हा के पास तीन, विजय कुमार चौधरी के पास चार, बिजेंद्र प्रसाद यादव के पास चार विभाग, श्रवण कुमार के पास दो विभाग, दिलीप कुमार जायसवाल के पास दो विभाग, सुनील कुमार के पास दो विभाग, श्रेयसी सिंह व प्रमोद कुमार के पास दो-दो विभाग का जिम्मा है।
विधानसभा अध्यक्ष भी जदयू को मिलने की संभावना
मंत्रिमंडल का गठन रिवर्स मोड में होने की स्थिति में विधानसभा अध्यक्ष पद जदयू को मिल सकता है। इसकी दावेदारी संभव है।
मंत्रिमंडल के सदस्यों का संख्यात्मक फार्मूला
मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुुल संख्या विधानसभा के कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। बिहार में 243 सदस्यों की संख्या के आधार पर यह 36 .45 आता है। यानी अधिकतम 36 मंत्री ही हो सकते हैं। इस हिसाब से इनका बंटवारा एनडीए के अलग-अलग घटक दलों में उनकी संख्या के आधार पर होगा।







