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नीतीश कुमार की व‍िदाई में अभी ‘खेला’ बाकी हैं !

UB India News by UB India News
March 26, 2026
in पटना, बिहार
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‘समृद्धि यात्रा’ का 5वां दिन, आज सहरसा-खगड़िया में रहेंगे CM नीतीश , 300 करोड़ की योजनाओं का उद्घाटन-शिलान्यास ………
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नीतीश कुमार राज्यसभा के सदस्य चुने जा चुके हैं, लेकिन फिर भी मुख्यमंत्री के पद पर बने हुए हैं। वे बिहार और मुख्यमंत्री पद के मोहपाश से मुक्त क्यों नहीं हो पा रहे हैं? क्या बिहार में ‘सत्ता का खेल’ अभी बाकी है? नीतीश के रुख को देखकर तो यही लग रहा है कि उनकी बिहार से विदाई इतनी सामान्य नहीं है, जितनी दिखाई दे रही है।

नीतीश कुमार राजनीति के एक अनुभवी सौदेबाज हैं। उनकी पार्टी जनता दल यूनाईटेड (जेडीयू) के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि नीतीश कुमार ने बीजेपी को साफ संकेत दे दिया है कि वे सब सहज ही स्वीकार नहीं कर लेंगे। वे एक कड़े और अनुभवी सौदेबाज हैं।

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CM पद छोड़ने की क्यों नहीं कोई जल्दी?

राज्यसभा के लिए चुने जाने के बावजूद नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने में कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई है। इससे बिहार की राजनीति में सस्पेंस गहरा गया है। लगता है कि बीजेपी अब उनके अगले कदम का इंतजार कर रही है। हालांकि जेडीयू के अंदरखाने में सत्ता संतुलन को बदलने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

क्या विदाई से पहले हो रहा शक्ति प्रदर्शन?

राज्यसभा चुनाव हुए एक सप्ताह बीत गया लेकिन नीतीश कुमार की सक्रियता देखकर ऐसा लग रहा है कि वे बिहार से नहीं जा रहे हैं। उनकी ‘समृद्धि यात्रा’ की पांचवां चरण जारी है। वे जिलों में अलग-अलग परियोजनाओं का उद्घाटन कर रहे हैं। भले ही उनकी इस यात्रा को उनका लंबा विदाई अभियान मान लिया जाए, लेकिन वे राजनीतिक तौर पर भी निरंतर सक्रिय बने हुए हैं। उनका रुख यही संदेश दे रहा है कि उनकी बिहार में जमीनी पकड़ अब भी मजबूत है और वे फिलहाल खेल से बाहर नहीं हुए हैं।

सारी संभावनाएं खुलीं

नीतीश को राज्यसभा सांसद बनने के बाद तकनीकी रूप से बिहार विधान परिषद के एमएलसी का पद छोड़ देना चाहिए था, लेकिन उन्होंने अब तक ऐसा नहीं किया। राज्यसभा चुनाव 17 मार्च को हुए थे। इसके बाद उन्हें 14 दिन के अंदर इस्तीफा देना होगा। क्या नीतीश इस्तीफा न देकर यह दिखाना चाहते हैं कि अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है, और सारी संभावनाएं खुली हुई हैं।

क्या बीजेपी बन सकी सीनियर पार्टनर?

नीतीश के मुख्यमंत्री पद छोड़ने पर यह पद बीजेपी को मिल सकता है। हालांकि यह मामला इतना भी सीधा नहीं है। पिछले साल विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने के बावजूद एनडीए के घटक दल बीजेपी और जेडीयू के बीच मंत्रालयों के बंटवारे में काफी समय लगा था। बीजेपी ने विधानसभा स्पीकर का पद, गृह विभाग और उप मुख्यमंत्री के दो पद अपने पास रखकर यह स्पष्ट कर दिया था कि वह अब बिहार एनडीए में जूनियर पार्टनर नहीं है।

सत्ता संतुलन बनाने की तैयारी

जेडीयू के कुछ नेताओं का मत है कि नीतीश कुमार पूरा सत्ता संतुलन बदलने की तैयारी में हैं। इसका मतलब है कि जो ताकत बीजेपी ने हासिल की थी, वे उसे वापस लेने की कोशिश कर रहे हैं। यानी वे जेडीयू को फिर से प्रमुख भूमिका में लाना चाहते हैं।

किसे मिलेंगे डिप्टी सीएम के पद?

डिप्टी सीएम के पदों को लेकर भी अलग-अलग चर्चाएं चल रही हैं। पहले चर्चा थी कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को उप मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। लेकिन अब संकेत मिल रहे हैं कि जेडीयू डिप्टी सीएम के दोनों पद अपने पास रखना चाहती है। इससे बीजेपी के लिए मुख्यमंत्री पद लेना मुश्किल हो सकता है। यदि बीजेपी पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) के किसी नेता को मुख्यमंत्री बनाती है, तो उसे अपने पारंपरिक सवर्ण वोट बैंक को संतुलित करने के लिए उप मुख्यमंत्री की जरूरत पड़ेगी। बताया जाता है कि डिप्टी सीएम पद को लेकर विवाद बन सकता है।

मामला सिर्फ सम्मानजनक हिस्सेदारी का नहीं

नीतीश की पार्टी जेडीयू के अंदर भी खींचतान चल रही है। पार्टी के अंदर दो खेमे सक्रिय हैं। इनमें से एक खेमा पुराने समाजवादी नेताओं का है और दूसरा बीजेपी ने नजदीकी रखने वाले नेताओं का है। जेडीयू में पूर्व में संजय झा और ललन सिंह जैसे नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही थी, लेकिन अब विजय कुमार चौधरी और उन जैसे नेताओं का भी प्रभाव बढ़ता हुआ नजर आ रहा है।

पर्दे के पीछे जारी है खेल

बताया जाता है कि बिहार में फिलहाल पर्दे के पीछे खेल चल रहा है। बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में जेडीयू के 84 विधायक हैं। यह संख्या बल 2020 के मुकाबले काफी ज्यादा है। ऐसे में नीतीश कुमार बिहार की सरकार में सिर्फ सम्मानजनक हिस्सेदारी नहीं चाहते, वे ऐसी स्थायी व्यवस्था चाहते हैं जिससे भविष्य में जेडीयू कमजोर न पड़े।

क्या फिर सरप्राइज देंगे नीतीश कुमार?

यदि बिहार की मौजूदा राजनीतिक स्थितियों को देखें तो यह साफ है कि नीतीश कुमार अभी भी यहां की राजनीति के केंद्र में हैं। उन्होंने इस्तीफा न देकर अपने सारे विकल्प खुले रखे हैं। बीजेपी और जेडीयू के बीच सत्ता संतुलन को लेकर बड़ा खेल चल रहा है। संभव है कि नीतीश कुमार एक बार फिर बिहार की राजनीति में जल्द ही कोई सरप्राइज दे दें।

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