5 मार्च 2026- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विधानसभा में राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल करने पहुंचे थे। इस दौरान जेडीयू के सभी दिग्गज नेता मौजूद थे। नामांकन के बाद एक संवैधानिक पद पर आसीन भाजपा के बड़े नेता ने विधानमंडल परिसर में एक नए स्ट्रक्चर के उद्घाटन का मुद्दा उनसे छेड़ा।
इस पर मुख्यमंत्री ने जवाब दिया, “निश्चिंत रहिए, सब होगा। हम अभी एक महीना पांच दिन बिहार में हैं न जी।”
9 अप्रैल को उन पांच राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, जिनकी सीटों पर 16 मार्च को चुनाव हुआ था और नीतीश कुमार विजयी घोषित हुए थे।

अब NDA सूत्रों की मानें तो 12 अप्रैल को नीतीश बिहार से दिल्ली का रुख कर सकते हैं। 13 अप्रैल को बतौर राज्यसभा सदस्य की सदस्यता लेने के बाद नीतीश बिहार लौटेंगे और 14-15 अप्रैल को इस्तीफा देंगे।
इसी दिन NDA के विधानमंडल दल की बैठक के बाद बिहार के नए CM की घोषणा हो सकती है। हालांकि आधिकारिक तौर पर कोई नेता नई सरकार के गठन पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
अब NDA के दो बड़े नेता का बयान पढ़िए
अमित शाह से मुलाकात के बाद BJP के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी-
पहले राज्यसभा का विधिवत शपथ ग्रहण कार्यक्रम होगा। इसके बाद अगर नई परिस्थिति बनती है तो NDA के सभी बड़े नेता बैठकर आगे का फैसला लेंगे। तब तक नीतीश कुमार बिहार के CM हैं और वही CM बने रहेंगे।
हाजीपुर में LJP (R) सुप्रीमो चिराग पासवान-
मैं मुख्यमंत्री पद की दौड़ में नहीं हूं। कभी रहूंगा भी नहीं। मेरी इच्छा है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी का हो। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में मुख्यमंत्री पद को लेकर सब कुछ तय हो चुका है। जल्द ही बिहार के अगले मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा की जाएगी।
अब अगले एक सप्ताह तक CM का संभावित शेड्यूल जानिए
- 26 मार्च– नालंदा और पटना में CM नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा का समापन होगा।
- 27 मार्च– पटना में आयोजित रामनवमी कार्यक्रम में शामिल होंगे।
- 31 मार्च– नालंदा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति के साथ शामिल होंगे।
- 4 अप्रैल– मोतिहारी सेंट्रल यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति के साथ शामिल होंगे।

30 मार्च को 20 साल के सफर का होगा अंत
नीतीश कुमार को हर हाल में 30 मार्च से पहले बिहार विधान परिषद से इस्तीफा देना होगा। पब्लिक रिप्रजेंटेटिव एक्ट 1951 के अनुच्छेद 101(2) के तहत प्रॉहिबिशन ऑफ साइमल्टेनियस मेंबरशिप 1950 के तहत हर हाल में 14 दिन के भीतर उन्हें एक सीट से इस्तीफा देना होगा। अगर वे विधान परिषद की सीट से इस्तीफा नहीं देते हैं तो उनकी राज्यसभा की जीती सीट खुद-ब-खुद खाली हो जाएगी।
नीतीश कुमार 2006 में पहली बार विधान परिषद के सदस्य चुने गए थे। इसके बाद से 2026 तक 10 बार वे लगातार CM पद की शपथ ले चुके हैं, लेकिन CM रहते हुए कभी विधानसभा का चुनाव नहीं लड़े। वे विधान परिषद के रास्ते ही पॉलिटिक्स करते रहे। अब जब वे राज्यसभा सांसद निर्वाचित हो गए हैं तो 20 साल के उनके इस सफर का अंत हो जाएगा।
नीतीश राज्यसभा चुनाव जीत चुके हैं। उनके बेटे निशांत कुमार भी पॉलिटिकल तौर पर एक्टिव हो गए हैं। दूसरी तरफ राज्यसभा का चुनाव जीतने के बाद भी CM लगातार अपने कार्यक्रमों में व्यस्त हैं। न तो जदयू की तरफ से और न ही बीजेपी की तरफ से पावर शिफ्टिंग पर किसी तरह का कोई बयान दिया जा रहा है।
बिहार में पहली बार BJP राज की होगी शुरुआत
NDA सूत्रों की मानें तो पहली बार बिहार में BJP का CM बनना तय है। नए CM का नाम भी अन्य राज्यों की तरफ पर्ची ही तय करेगा। NDA के विधायक दल की बैठक से पहले BJP दफ्तर में विधानमंडल दल के नेताओं की बैठक होगी। जिस दिन CM नीतीश कुमार इस्तीफा देंगे उसी दिन यह बैठक होगी। इसमें केंद्रीय पर्यवेक्षक सेंट्रल लीडरशिप के फैसले से राज्य के नेताओं को अवगत कराएंगे।
सियासी गलियारों में CM पद के लिए कई नामों की चर्चा है। रेस में सबसे आगे सम्राट चौधरी का नाम है। इसके अलावा संजीव चौरसिया, नित्यानंद राय और मंगल पांडेय के नाम भी चल रहे हैं। हालांकि इन सब के बीच एक चर्चा इस बात की भी हो रही है कि पार्टी किसी नए EBC नेता पर भी दांव लगा सकती है। इसके लिए पार्टी के अलावा संघ से भी चर्चा की जा रही है।







