बिहार के स्थापना के 114वें वर्ष पर आयोजित तीन दिवसीय ‘बिहार उत्सव’ में पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में ‘उन्नत बिहार, उज्जवल बिहार’ साकार हुआ है। समारोह में बिहार की समृद्ध विरासत, दमदार वर्तमान और सुनहरे भविष्य की अलग-अलग तस्वीरें लोगों को आकर्षित कर रही हैं। समारोह तीन दिनों तक पटना के गांधी मैदान समेत राज्यभर में मनाया जाएगा। एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक गतिविधियां होंगी। देश के नामचीन कलाकारों के साथ ही राज्य के मशहूर तथा उभरते हुए प्रदर्श कला के कलाकारों को मंच मिलेगा।
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रविवार को बिहार दिवस के मौके पर दिनभर मुख्य समारोह स्थल पहुंचे लोगों का उत्साह चरम पर दिखा। पूरा बिहार अपने गौरवशाली विरासत का याद कर रहा है। सुदूर गांवों से लेकर विदेशों में बसे बिहारी अपने भविष्य की नई उड़ान भरने का संकल्प लेते दिखे। राजधानी के गांधी मैदान से लेकर जिलों तक सुबह से ही सांस्कृतिक गतिविधियां शुरू हो गईं। जिलों में स्कूली बच्चों की प्रभातफेरी निकली। लोगों का उत्साह चरम पर दिखा। मुख्य मंच से पार्श्व गायिका सोना महापात्रा की गायकी ने लोगों को झुमाया। सोमवार को शान और मंगलवार को पापोन लोगों को मुख्य मंच से अपनी गायकी से झुमायेंगे। गांधी मैदान के 15 लाख वर्गफीट क्षेत्र में 37 विभागों के पैवेलियन हैं। 6 महत्वपूर्ण मंच बने हैं। इसमें गांधी मैदान में मुख्य मंच के अलावा साइड मंच, शिक्षा विभाग का मंच, लोक कलाकारों के लिए सांस्कृतिक मंच के अलावा श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल और रवींद्र भवन का मंच शामिल है। बिहार दिवस कार्यक्रम का नोडल विभाग शिक्षा विभाग ने दो हजार अधिकारियों, कर्मियों से लेकर शिक्षकों की टीम को गांधी मैदान में तैनात किया है।
सभी 38 जिलों से 456 बच्चे यहां बुलाये गये हैं। इसमें हर जिले से 6 बच्चे और 6 बच्चियां हैं। यहां मॉडल स्कूल की झलक दिख रही है। बच्चों की एक से बढ़ कर एक गतिविधियां दिख रहीं हैं। दानापुर के धनेश्वरी हाईस्कूल की बच्चियों का बैंड आकर्षण का केंद्र हैं। पटना सिटी के स्कूल के बच्चों का बैंड भी लोगों का लुभा रहा है।
तीन दिवसीय बिहार दिवस कार्यक्रम में शिक्षा, सहकारिता, कृषि, खेल, आपदा प्रबंधन और ग्रामीण विकास सहित लगभग सभी विभागों के स्टॉल लगे हुए हैं। लजीज बिहारी व्यंजन से सजा अलग फूड कोट हैं। विभिन्न विभागों के स्टॉल और प्रदर्शन में बिहारी अस्मिता और विकास की झलक दिख रही है।
गांधी मैदान में मुख्य समारोह का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दीप प्रज्ज्वल कर तथा गुब्बारा उड़ाकर किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भेजे पत्र में बिहार के समृद्ध इतिहास, सामर्थ्य और परंपराओं का उत्सव मनाने का दिन बताया। उन्होंने लिखा है कि बिहार की धरती ने प्राचीन काल से ही ज्ञान, आध्यात्मिकता और नैतिक मूल्यों के माध्यम से समाज को समृद्ध किया है। आज का बिहार अपने अतीत से प्रेरणा लेकर आत्मविश्वास के साथ भविष्य की ओर अग्रसर है।
वहीं, गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि बिहार प्रगति व उन्नति का नया कीर्तिमान बना रहा है। दूसरी तरफ, राजद, कांग्रेस सहित सभी दलों के नेताओं ने बिहार के विकसित राज्य बनने की कामना की है।
गांधी मैदान में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने बिहार दिवस समारोह-2026 के उद्घाटन से पहले गांधी मैदान में बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा संचालित योजनाओं पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ उदयकांत ने पुष्प गुच्छ भेंटकर मुख्यमंत्री का स्वागत किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग के पवेलियन में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए संवर्द्धन कक्ष, विज्ञान प्रयोगशाला, कला कक्ष, स्मार्ट क्लास, व्यावसायिक शिक्षा कक्ष, अटल टिंकरिंग लैब, आईसीटी कक्ष, ईको क्लब बाल संसद, खेल कक्ष, निपुण कक्ष, बाल वाटिका आदि का जायजा लिया। इस वर्ष बिहार दिवस की थीम है, उन्नत बिहार-उज्ज्वल बिहार। उद्घाटन समारोह के मौके पर सीएम के साथ डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, मंत्री विजय चौधरी, बिजेन्द्र प्रसाद यादव, सुनील कुमार, अशोक चौधरी, रामकृपाल यादव और लखेन्द्र पासवान, दीपक प्रकाश समेत तमाम आलाधिकारी मौजूद रहे।
गांधी मैदान में साकार हुआ ‘उन्नत बिहार, उज्ज्वल बिहार’
बिहार की स्थापना के 114वें वर्ष पर आयोजित तीन दिवसीय ‘बिहार उत्सव’ में ऐतिहासिक गांधी मैदान में ‘उन्नत बिहार, उज्जवल बिहार’ साकार हुआ है। रविवार को बिहार दिवस के मौके पर दिनभर मुख्य समारोह स्थल पहुंचे लोगों का उत्साह चरम पर दिखा। गांधी मैदान के 15 लाख वर्गफीट क्षेत्र में 37 विभागों के पैवेलियन हैं। 6 महत्वपूर्ण मंच बने हैं।
लहठी और सुजनी कला बना आकर्षण का केंद्र
पटना। बिहार दिवस पर गांधी मैदान में समाज कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विकास निगम के पवेलियन में लहठी और सुजनी कला मुख्य आकर्षण का केंद्र है। पवेलियन में आमलोगों को राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, सेवाओं एवं उपलब्धियों की जानकारी दी जा रही है। तीन दिवसीय समारोह में बिहार की पारंपरिक कला लहठी, हस्तकरघा, मिथिला पेटिंग, एप्लिक, सुजनी कला हस्तनिर्मित आभूषण, रेडीमेड परिधान ब्लॉक प्रिंट, महिला हेल्पलाइन 181 तथा शी-बॉक्स परामर्श केंद्र, पालना घर आदि स्टॉल मौजूद है। विभाग के तहत संचालित संस्था आशा किरण के बच्चों (18 वर्ष के नीचे ) की ओर से बनाई गई कलाकृतियों का प्रदर्शन किया जा रहा है। समारोह में विभाग की ओर से समाज कल्याण निदेशालय, आईसीडीएस निदेशालय, राज्य आयुक्त निशक्तता (दिव्यांगजन) कार्यालय, दिव्यांगजन सशक्तिकरण निदेशालय, आदि शामिल है। महिला एवं बाल विकास निगम की ओर से राज्य की विकास यात्रा, विशेषकर महिलाओं, बच्चों एवं कमजोर वर्गों के सशक्तिकरण से जुड़े प्रयासों को प्रभावी रूप से प्रदर्शित किया जा रहा है।
सोना मोहपात्रा की जादुई आवाज से पटनावासियों की शाम सुरमयी
बिहार दिवस पर पटना के गांधी मैदान में सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका सोना मोहपात्रा ने अपनी गायकी से बिहार दिवस की शाम को सुरमयी बना दिया। जैसे ही सोना मोहपात्रा मंच पर आईं, पूरा मैदान ‘बिहार दिवस’ के नारों और तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। लोग खड़े होकर बड़ी देर तक ताली बजाते रहे।
उन्होंने अपनी गायकी के जादू से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। सुरों के समंदर में डूबे श्रोताओं ने भी अपनी तालियों की गड़गड़ाहट से उत्साह बढ़ाते रहे। कार्यक्रम की लोकप्रियता का आलम यह था कि गांधी मैदान में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा और देर रात तक दर्शक अपनी जगह पर जमे रहे। उन्होंने अपने प्रसिद्ध गीत ‘मुझे क्या बेचेगा रुपईया’ जैसे ही गाना शुरू किया, लोग आत्मविश्वास से भर गए। गीत के माध्यम से उन्होंने महिला सशक्तीकरण का पुरजोर संदेश दिया। उनकी ‘मेरे रश्के कमर’ गीत की प्रस्तुति ने युवाओं में जोश भर दिया। युवा झूमने के लि मजबूर हो गए।
सोना ने अपनी बेबाक आवाज और अनूठी गायकी शैली से आधुनिक और लोक संगीत का एक अद्भुत मिश्रण पेश किया। भारी भीड़ के बीच सोना की हाई-वोल्टेज ऊर्जा ने माहौल को जादुई बना दिया।
स्वर कोकिला शारदा सिन्हा को किया याद : इस विशेष शाम के दौरान बिहार की कोकिला स्वर्गीय शारदा सिन्हा को मंच से सम्मान के साथ याद किया गया। उनकी कमी को महसूस करते हुए कलाकारों और आयोजकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। दर्शकों की नम आंखों ने यह स्पष्ट कर दिया कि बिहार के लोक संगीत के इतिहास में शारदा सिन्हा का स्थान सदैव सर्वोच्च रहेगा। कलाकारों और आयोजकों ने कहा शारदा सिन्हा का स्थान कोई नहीं भर सकता। उनकी आवाज में जादू थी जो हर किसी के पास नहीं हो सकती।
सत्येंद्र संगीत ने लोक धुनों से बांधा समा
शाम की शुरुआत लोक गायक सत्येंद्र कुमार संगीत की प्रस्तुति से हुई। चैती छठ पर उन्होंने ‘पटना के घाट पर देबो अरघिया’ गीत की शानदार प्रस्तुति दी। माटी को सोना करदे, ए राजाजी एकरे त रहल ह जरूरत ने भी श्रोताओ को खूब झूमाया। उन्होंने माटी की खुशबू बिखेरते हुए पारंपरिक लोक गीतों की ऐसी झड़ी लगाई कि दर्शक झूमने पर मजबूर हो गए। ढोलक और हारमोनियम की थाप पर उनके गाए गीतों ने बिहार की सांस्कृतिक जड़ों को जीवंत कर दिया।
संगीत और नृत्य के रंग में रंगा एसकेएम हॉल
बिहार दिवस पर श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में रविवार को विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयेाजन हुआ। इसमें बिहार की सांस्कृतिक विरासत दर्शकों के बीच जीवंत किया गया।
मुख्य आकर्षण सुप्रसिद्ध नृत्यांगना प्राची पल्ल्वी साहू की समकालीन नृत्य प्रस्तुति रही, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने ‘मोहे रंग दो लाल, आमी जे तोमार, घूमर व दिवानी मस्तानी पर आकर्षक प्रस्तुति दी। सांस्कृतिक उत्सव में सुप्रसिद्ध नृत्यांगना नीलम चौधरी और उनकी संस्था ‘निनाद’ के कलाकारों ने कथक शैली में ‘अम्बापाली’ नृत्य नाटिका की मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुति दी। इस गौरवशाली मंच से वैशाली की नगरवधू अम्बापाली के अंतर्द्वंद, उनके शौर्य और फिर बुद्ध की शरण में जाने के आध्यात्मिक परिवर्तन को शास्त्रीय नृत्य की भाषा में खूबसूरती से पिरोया गया। उन्होंने भावपूर्ण अभिनय और सधे हुए पद संचालन से अम्बापाली के चरित्र के विभिन्न आयामों को जीवंत कर दिया। नृत्य, लय और संगीत के सटीक समन्वय ने दर्शकों को प्राचीन काल के परिवेश में पहुंचा दिया। निनाद संस्था के अन्य नर्तक-नर्तकियों के साथ मिलकर दी गई इस सामूहिक प्रस्तुति ने हॉल में मौजूद कला प्रेमियों को भाव-विभोर कर दिया। रमिंदर खुराना का ओडिशी नृत्य ने अनेकता में एकता का संदेश दिया।
नई पीढ़ी ने किया विरासत का दीदार
बिहार दिवस के अवसर पर रविवार को गांधी मैदान में बिहार की प्राचीन विरासत को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। छुट्टी का दिन होने और स्कूल बंद होने के कारण लोग बाल-बच्चों के साथ सपरिवार गांधी मैदान पहुंचे। गांधी मैदान में कौशल विकास मिशन के तहत युवाओं को स्वरोजगार से संबंधित योजनाओं की जानकारी दी जा रही है।
पर्यटन विभाग के स्टॉल पर बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों की जानकारी मिल रही है। वहां राजगीर के जू सफरी, जंगल सफरी, ग्लास ब्रिज और बापू टावर की प्रतिकृति बनाई गई है। वहां लोग सेल्फी लेते दिखे। व्यंजन मेला का शुभारंभ पर्यटन मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने किया। उनके साथ डीजीएम चंदन चौहान, संयुक्त निदेशक राजेश रंजन ने सभी स्टॉल का भ्रमण किया। राज्य के लगभग सभी जिले की प्रसिद्ध मिठाइयों और व्यंजनों का स्वाद अलग-अलग स्टॉल पर लेागों को मिल रहा है। इनमें सीतामढ़ी का खीरमोहन, बालूशाही, सिलाव का खाजा, आरा का खुरमा, मिथिला के केला का जलेबी, खगड़िया का पेड़ा, आदि लोगों के बीच खास आकर्षण रहा।







