भारत निर्वाचन आयोग ने राज्यसभा में 37 सीटों के चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया है।चुनाव आयोग ने चुनावों के लिए 26 फरवरी को नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। 16 मार्च को सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक मतदान होगा और उसी दिन शाम पांच बजे से मतगणना की जाएगी।
9 अप्रैल को बिहार के 5 राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, जिनमें अमरेंद्र धारी सिंह, प्रेमचंद गुप्ता, उपेंद्र कुशवाहा, रामनाथ ठाकुर और हरिवंश नारायण सिंह शामिल हैं।
राज्यसभा में 2026 एक बड़ा बदलाव का साल साबित होने वाला है. पूरे साल में करीब 72 से 75 सीटें खाली हो रही हैं, जो अप्रैल, जून, जुलाई और नवंबर में रिटायरमेंट से होंगी. अभी फरवरी 2026 में राज्यसभा की कुल 245 सीटों में बीजेपी की 103 हैं, कांग्रेस की 27, तृणमूल कांग्रेस (TMC) की 12, AAP की 10, DMK की 10, BJD की 7, YSRCP की 5 और AIADMK की 7 सीटें हैं. नॉमिनेटेड 7 हैं और कुल NDA की ताकत 121 के आसपास है, जबकि INDIA ब्लॉक के पास 80 सीटें हैं. लेकिन आने वाले चुनावों से यह आंकड़ा काफी हिलने वाला है.
NDA को 7 से 9 सीटों का फायदा होने की उम्मीद है, जिससे उनकी ताकत 145 तक पहुंच सकती है. वहीं, INDIA ब्लॉक को 5 सीटों का नुकसान हो सकता है, जो उनकी संख्या को 75 के आसपास ला देगा.
राज्यसभा की किन 37 सीटों पर होंगे चुनाव?
सबसे पहले 16 मार्च 2026 को 37 सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं, जो 10 राज्यों से हैं. महाराष्ट्र से 7, ओडिशा से 4, तमिलनाडु से 6, पश्चिम बंगाल से 5, असम से 3, बिहार से 5, छत्तीसगढ़ से 2, हरियाणा से 2, हिमाचल प्रदेश से 1 और तेलंगाना से 2. ये सीटें अप्रैल में खाली हो रही हैं. साल के बाकी चुनावों में और 35-38 सीटें शामिल होंगी, जो कुल 22 राज्यों से हैं, जैसे उत्तर प्रदेश से 10, कर्नाटक से 4, गुजरात से 4, आंध्र प्रदेश से 4 सीटें.
बीजेपी को कहां-कहां फायदा मिलेगा?
हाल के विधानसभा चुनावों ने NDA की पोजिशन मजबूत की है. मसलन, महाराष्ट्र में NDA के 228 विधायक हैं (बीजेपी 131, शिवसेना-शिंदे 57, NCP-अजित 40), जो 7 सीटों में से 4-5 जीत सकता है यानी पहले से ज्यादा. बिहार में NDA को एक एक्स्ट्रा सीट मिल सकती है, जहां पहले से 3 थे, अब 4. आंध्र प्रदेश में 3 गेन, गुजरात में 1, ओडिशा में 2, राजस्थान में 1. ये गेन विधानसभा स्ट्रेंथ से आते हैं, जैसे महाराष्ट्र में NDA ने 2025 चुनाव जीता, बिहार में NDA मजबूत, हरियाणा में बीजेपी, झारखंड में बीजेपी. हालांकि, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में 1-1 सीट का नुकसान हो सकता है.
राज्यसभा की सीटों में विधानसभा की ताकत का पूरा गणित क्या है?
राज्यसभा के सदस्य (सांसद) राज्य की विधानसभा के चुने हुए विधायकों की वोटिंग से चुने जाते हैं. यानी, केंद्र में कौन सी पार्टी मजबूत होगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि हर राज्य की विधानसभा में किस पार्टी के कितने विधायक हैं. अगर विधानसभा में आपकी पार्टी की ताकत बढ़ती है, तो राज्यसभा में भी आपकी सीटें बढ़ती हैं.
राज्यसभा की सीटें हर राज्य में तय होती हैं. जैसे महाराष्ट्र से 19 सीटें, लेकिन चुनाव साल दर साल कुछ सीटों पर होते हैं, जब पुराने सदस्य रिटायर होते हैं. चुनाव में जीतने के लिए, हर उम्मीदवार को एक निश्चित संख्या में वोट चाहिए, जिसे ‘क्वोटा’ कहते हैं.
यह कोटा कैसे निकालते हैं?
फॉर्मूला बहुत सिंपल है: कोटा = (कुल विधायक) / (सीटें +1) +1.
राज्यसभा के सदस्य विधानसभा के इलेक्टेड मेंबर्स चुनते हैं, इसलिए हर राज्य में विधायकों की संख्या से कोटा तय होता है. यह इसलिए है कि हर सीट के लिए वोट्स बराबर बंटें और कोई पार्टी ज्यादा वोट्स से ज्यादा सीटें जीत सके. अगर किसी उम्मीदवार को कोटा से एक वोट भी कम मिला, तो वो हार जाता है.
बिहार के उदाहरण से समझें: बिहार में कुल 243 विधायक हैं और 5 सीटों पर चुनाव होना है. क्वोटा: 243 ÷ (5 + 1 = 6) = 40.5, फिर +1 = 41.5, लेकिन राउंडिंग से 42 वोट प्रति सीट. NDA के पास 202 विधायक हैं, तो 202 ÷ 42 ≈ 4.81 यानी 4 सीटें. पहले NDA की ताकत कम थी, तो 120 ÷ 42 ≈ 2.85 यानी सिर्फ 2-3 सीटें. लेकिन बिहार में NDA ने हाल के चुनावों में मजबूत पकड़ बनाई, इसलिए राज्यसभा में गेन मिलेगा. अगर कोई विधायक क्रॉस-वोट करे या इंडिपेंडेंट सपोर्ट करे, तो 5वीं सीट भी NDA को मिल सकती है.
कौन सी पार्टियां घाटे या फायदे में रहेंगी?
कांग्रेस और INDIA ब्लॉक को सबसे ज्यादा नुकसान होगा क्योंकि 5 से 6 सीटें कम हो सकती हैं. जैसे गुजरात में कांग्रेस की 1 सीट खत्म हो सकती है, पश्चिम बंगाल में तृणमूल को लॉस, कर्नाटक में कांग्रेस को 1 कम. BJD ओडिशा में 1-2 कम, YSRCP आंध्र में 3 कम, CPI(M) पश्चिम बंगाल से 1 कम. ये पार्टियां जहां विधानसभा में कमजोर हुईं, वहां सीटें गंवाएंगी.
वहीं, फायदे वाली पार्टियां NDA दल की हो सकती हैं. इनमें बीजेपी को 7-9 सीटों का फायदा हो सकता है यानी कुल NDA 145 तक पहुंच सकती है. कांग्रेस को DMK तमिलनाडु में 1-2 एक्स्ट्रा सीट का फायदा हो सकता है, लेकिन ओवरऑल INDIA गठबंधन डाउन रहेगा.
किन बड़े नेताओं की राज्यसभा में वापसी मुश्किल हैं?
बड़े नेताओं की वापसी मुश्किल लग रही है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (कर्नाटक) के लिए री-इलेक्शन की कोशिश हो रही है, लेकिन स्पेकुलेशन है कि वह नहीं लौटेंगे. दिग्विजय सिंह (मध्य प्रदेश) को कमलनाथ की जगह थर्ड टर्म नहीं मिलेगा. एचडी देवगौड़ा (कर्नाटक) JDS के पास नंबर नहीं है इसलिए रिटायरमेंट संभव है. शरद पवार (महाराष्ट्र) टर्म एंड, NCP(SP) कमजोर, रणजन गोगोई (नॉमिनेटेड) मार्च में रिटायर, परिमल नथवानी (आंध्र) बीजेपी सेकंड टर्म नहीं देगी, बिकाश रंजन भट्टाचार्य CPI(M). ये सब स्पेकुलेशन हैं, लेकिन पार्टी स्ट्रेंथ से वापसी टफ लग रही है.
कुल मिलाकर, 2026 राज्यसभा में NDA और मजबूत होगा, जो विधेयकों पास करने में आसानी देगा. विपक्ष को रणनीति बदलनी पड़ेगी.
अब समझिए बिहार में क्या हो सकता है राज्यसभा सीटों का गणित
राज्यसभा चुनाव में 1 सीट के लिए इस बार कम से कम 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। दरअसल इसके लिए फॉर्मूला ये है कि जितनी सीटों पर चुनाव होना है, उनमें एक जोड़कर इसे विधानसभा की कुल सीटों से डिवाइड किया जाता है। इस लिहाज से विधानसभा की कुल 243 सीटों को 6 से भाग दिया जाए तो 40.5 आता है यानि कि 41 विधायक।
इस नंबर के लिहाज से राजद के लिए अपने एक नेता को भी राज्यसभा भेजना मुश्किल होगा। जदयू के पास 85 विधायक हैं, यानी वो अपनी दो सीटें बचा लेंगी। बीजेपी के पास 89 विधायक हैं, ऐसे में राजद की दो सीटों पर बीजेपी अपने प्रत्याशी को जिताने में सफल रहेगी।

नितिन नवीन नहीं जाएंगे राज्यसभा!
पटना के बांकीपुर के विधायक व पूर्व मंत्री नितिन नवीन अब बीजेपी के शीर्ष नेता हैं। उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। दरअसल, नितिन नवीन के राज्यसभा नहीं जाने की चर्चा को बल उनको दिल्ली में मिले बंगले से मिल रही है। दिल्ली के VVIP इलाके में 1 मोतीलाल नेहरू मार्ग पर टाइप-8 सरकारी आवास दिया गया है। केंद्र सरकार के आवास का अलॉटमेंट डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट के नियमों के तहत होता है।
- डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट के नियमों के मुताबिक, किसी राष्ट्रीय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को, यदि वह केंद्रीय मंत्री, लोकसभा सांसद या राज्यसभा सांसद नहीं है, तो टाइप-8 बंगला दिया जाता है।
- नितिन नवीन अभी बिहार में विधायक हैं और वह इस मानक पर पूरी तरह फिट बैठते हैं।
- वह अप्रैल में इस बंगले में शिफ्ट होंगे। इसी समय बिहार की 5 सहित राज्यसभा की 71 सीटों पर चुनाव होगा। इसका मतलब हुआ कि वह राज्यसभा नहीं जा रहे हैं।
भोजपुरी सिंगर पवन सिंह को भाजपा दे सकती है बड़ा इनाम?
बीजेपी नेता फिलहाल इस सवाल को बहुत जल्द पूछा गया बता रहे हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान पवन सिंह और बीजेपी का रिश्ता बिगड़ गया था। विधानसभा चुनाव 2025 से पहले वह भाजपा में शामिल हुए। पार्टी के लिए धुआंधार प्रचार किया। ऐसे में ये तय माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें कोई बड़ा पद देकर इनाम दे सकती है।
चुनाव से ठीक पहले बीजेपी के सीनियर लीडर और सांसद मनोज तिवारी ने कहा था, ‘पवन सिंह के लिए सबकुछ तय है। हालांकि न पार्टी नेता और न पवन सिंह इस पर अभी तक कुछ भी स्पष्ट बोले हैं।’

जदयू कोटे में संशय बरकरार, रिपीट हो सकते हैं हरिवंश और ठाकुर
जदयू के जिन दो नेताओं का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर का नाम है। दोनों पार्टी के सीनियर लीडर हैं। नीतीश कुमार के करीबी माने जाते हैं। पार्टी की तरफ से दोनों को दो-दो बार राज्यसभा भेजा जा चुका है।
नीतीश कुमार ने दो बार से ज्यादा किसी नेता को बहुत कम बार राज्यसभा भेजा है। ऐसे में अभी तक संशय बरकरार है, लेकिन बड़े पद पर होने और सीएम के करीबी होने के कारण चर्चा है कि इन्हें एक बार फिर से रिपीट किया जा सकता है।

बेटे के खातिर उपेंद्र कुशवाहा का राज्यसभा में रिपीट होना मुश्किल
लोकसभा चुनाव 2024 के समय उपेंद्र कुशवाहा से लोकसभा की एक सीट और विधान परिषद की एक सीट देने का वादा किया गया था। लोकसभा का चुनाव उपेंद्र कुशवाहा काराकाट से लड़े, लेकिन हार गए। इसके लिए पवन सिंह फैक्टर को सबसे बड़ा कारण माना गया।
इसके बाद डैमेज कंट्रोल के लिए उन्हें विधान परिषद भेजने की बात कही गई, लेकिन जदयू इसके लिए राजी नहीं हुई। इसके बाद उपेंद्र कुशवाहा की नाराजगी की बातें सामने आईं। सामने विधानसभा चुनाव था, ऐसे में आनन-फानन में 2 जुलाई 2024 को सम्राट चौधरी ने बीजेपी की तरफ से उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा भेजने की घोषणा की। इसके बाद विवेक ठाकुर की जगह इन्हें राज्यसभा सांसद बनाया गया था।
अब विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने अपने बेटे को सीधे मंत्री बनाकर लॉन्च कर दिया है। मंगल पांडेय की जगह उनका विधान परिषद जाना तय माना जा रहा है। ऐसे में पत्नी विधायक, बेटा मंत्री और कुशवाहा को राज्यसभा भेजकर परिवारवाद को बढ़ावा देने की तोहमत से बीजेपी बचेगी। ये तय माना जा रहा है कि कुशवाहा अपने बेटे को जरूर सेट कर लिए, लेकिन अप्रैल बाद वे किसी सदन के सदस्य नहीं होंगे।
तेजस्वी के नेतृत्व की परीक्षा के साथ महागठबंधन की एकजुटता भी आएगी सामने
विपक्ष की सभी पार्टियों के विधायकों को मिला दें तो ये संख्या ठीक 41 होती है। यानि कि विपक्ष के सभी विधायक मिलकर 1 नेता को राज्यसभा भेज सकते हैं। विपक्ष में सबसे ज्यादा 25 विधायक राजद के हैं। इसके बाद 6 विधायक कांग्रेस के हैं। लेफ्ट के 3, आईआईपी के 1 हैं। AIMIM के 5 और BSP के 1 विधायक हैं। तेजस्वी यादव महागठबंधन के नेता हैं। इस लिहाज से वे अपने सहयोगियों को मना कर राजद के एक नेता को राज्यसभा भेज सकते हैं।
2030 तक राज्यसभा से साफ हो सकता है महागठबंधन
विधानसभा चुनाव में करारी हार का खामियाजा महागठबंधन की पार्टियों को राज्यसभा में भी भुगतना पड़ सकता है। अगले विधानसभा चुनाव यानि 2030 तक राज्यसभा में महागठबंधन का सफाया हो सकता है। बिहार से कुल 16 राज्यसभा सीटों में से राजद के पास वर्तमान में पांच सीटें हैं और कांग्रेस के पास एक सीट है।
2026 के बाद बिहार से राज्यसभा का अगला चुनाव 2028 की शुरुआत में होगा। इसमें राजद के फैयाज अहमद, भाजपा के सतीश चंद्र दुबे, मनन कुमार मिश्रा और शंभू शरण पटेल के साथ जदयू के खीरू महतो का कार्यकाल सात जुलाई, 2028 को पूरा होगा।
इसके बाद 2030 की शुरुआत में चुनाव होना है, तब बीजेपी के धर्मशीला गुप्ता, भीम सिंह और जदयू के संजय कुमार झा के साथ राजद के मनोज कुमार झा और संजय यादव के साथ कांग्रेस के अखिलेश प्रसाद का कार्यकाल पूरा होगा। इन सभी चुनावों में महागठबंधन की हार तय मानी जा रही है, क्योंकि इनके पास जीत के लिए नंबर्स ही नहीं है।







