NEET छात्रा की मौत को लेकर पटना में प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया है। AISA और APWA की महिला कार्यकर्ता गांधी मैदान से विधानसभा घेरने निकली थीं।
करीब 2 घंटे चले प्रदर्शन को पुलिस ने डाकबंगला चौराहे पर रोका। यहां महिलाएं सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रही थीं। ‘सरकारी नारा बेटी बचाओ, सरकारी मंशा बलात्कारी बचाओ।’ ‘NDA की ये सरकार नहीं चलेगी अबकी बार, JDU की ये सरकार नहीं चलेगी अबकी बार।’
इससे पहले DSP कृष्ण मुरारी बैरिकेडिंग को तोड़ने से रोकने के लिए खड़े दिखाई दिए। उन्होंने महिलाओं को समझाया कि वे लौट जाए। महिलाएं बैरिकैडिंग तोड़कर आगे बढ़ना चाह रही थीं। पुलिस ने वाटर कैनन की गाड़ी बुलाई थी।
इससे पहले गांधी मैदान से निकली महिलाओं को पुलिस ने जेपी गोलबंर पर बैरिकेडिंग कर के रोका था। महिलाएं पुलिस से भिड़ गईं। बैरिकेडिंग तोड़कर डाकबंगला की ओर बढ़ गईं।
ये मार्च राज्य में महिलाओं, छात्राओं और बच्चियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा और प्रशासनिक संरक्षण में हो रहे अपराधों के खिलाफ है।
दरअसल ‘बेटी बचाओ न्याय यात्रा’ की शुरुआत 4 फरवरी से जहानाबाद से की गई, जिसका समापन सोमवार को पटना में हुआ।
यात्रा NEET स्टूडेंट के गांव से शुरू होकर नालंदा, नवादा, गया और अरवल से होते हुए सोमवार को पटना पहुंची थी।
एक नजर में अब तक का अपडेट
- गांधी मैदान से 12.30 बजे मार्च की शुरुआत हुई।
- जेपी गोलंबर पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रोका।
- यहां से आगे निकल रही महिलाओं पर लाठीचार्ज किया गया।
- लाठीचार्ज के बाद भी महिलाएं बैरिकेडिंग तोड़कर डाकबंगला की ओर बढ़ीं।
- डाकबंगला चौराहे पर भी पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रोका।
- महिलाएं अब यहां से विधानसभा के लिए जाना चाह रही हैं।
- पुलिस के अधिकारी समझाने की कोशिश कर रहे हैं। वाटर कैनन की गाड़ी बुलाई है।
सरकार में बलात्कारियों का मनोबल बढ़ा
AIPWA की महासचिव मीना तिवारी ने कहा, हमने 4 फरवरी से बेटी बचाओ न्याय यात्रा की शुरुआत की थी। इस दौरान लोगों का काफी गुस्सा हमें सरकार के प्रति देखने को मिला। अभी सरकार आए 3 महीने भी नहीं हुए हैं और अपराधी, बलात्कारी का मनोबल बढ़ गया है। हमारी मांग है कि CBI की जांच कोर्ट की निगरानी में हो।
चुनाव के बाद बिहार में छात्राओं, कामकाजी महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ हिंसा में चिंताजनक वृद्धि हुई है, जो राज्य की कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा तंत्र की गंभीर विफलता को उजागर करती है।
पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल और परफेक्ट गर्ल्स हॉस्टल से जुड़े मामलों पर पुलिस-प्रशासन ने परिजनों को ही निशाना बनाया। परिजनों पर दबाव, बयान बदलवाने की कोशिश, CCTV फुटेज छिपाना, फॉरेंसिक जांच से बचना और मीडिया पर दबाव बनाना यह दर्शाता है कि राज्य तंत्र सच्चाई को दबाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
जन दबाव के बाद CBI जांच की अनुशंसा हुई है, लेकिन न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट के सीटिंग जज की निगरानी में जांच कराना जरूरी है।
- सोहिला गुप्ता ने कहा- नीतीश सरकार सिर्फ नारे देती हैAIPWA की राज्य अध्यक्ष सोहिला गुप्ता ने कहा कि हाथी के दांत दिखाने के और, खाने के और होते हैं। मौजूदा नीतीश सरकार बस बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देती है। आज बिहार का ऐसा कोई कोना नहीं बचा होगा जहां किसी भी बिरादरी की लड़की सेफ हो। दूध मुही बच्ची, कैंसर की मरीज, पागल औरत, नीट छात्रा, कोई सुरक्षित नहीं है।







