भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर टैरिफ मामले में डिप्लोमेसी के धुरंधर साबित हुए हैं. टैरिफ मामले पर वह शुरू से ही साइलेंट रहे. चुपचाप वह बयानबाजी से इतर काम करते रहे. मीटिंग्स और मुलाकातों से उन्होंने भारत और अमेरिका के रिश्तों को पटरी पर ला दिया. इसका नतीजा है कि अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगाए गए टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है. यह ऐलान ठीक उसी समय हुआ, जब जयशंकर अमेरिका की यात्रा पर थे। लेकिन यह अचानक नहीं हुआ। जयशंकर की कई महीनों की मीटिंग्स और बातचीत ने इसकी नींव रखी। आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि कैसे जयशंकर की स्मार्ट डिप्लोमेसी ने यह कमाल किया और भारत को बड़ा फायदा पहुंचाया.

एस जयशंकर ने टैरिफ मामले में अहम भूमिका निभाई है.
- 2-4 फरवरी, 2026 (वाशिंगटन डी.सी.): जयशंकर अभी तीन दिवसीय यात्रा पर अमेरिका में हैं. हालांकि मुख्य एजेंडा क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल है, लेकिन वह नए व्यापार समझौते के ऑपरेशनल डिटेल्स को अंतिम रूप देने के लिए विदेश मंत्री मार्को रुबियो और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय बातचीत कर रहे हैं.
- जनवरी में सबसे अधिक हलचल:
- 13 जनवरी: जयशंकर और रुबियो के बीच फोन कॉल पर बात हुई थी. इस बातचीत में ट्रेड, क्रिटिकल मिनरल्स, न्यूक्लियर, डिफेंस पर चर्चा हुई.
- 25 जनवरी, 2026 (नई दिल्ली): जयशंकर ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और व्यापार समझौते की बातचीत को आगे बढ़ाने पर चर्चा करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और टैरिफ पर भारत के स्टैंड से अवगत कराया.
- भारत ने 27 जनवरी 2026 को यूरोपीय संघ के साथ एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किया. इसमें भी एस जयशंकर की अहम भूमिका रही है. इसने भी ट्रंप पर दबाव बनाने का काम किया.
- 29 जनवरी: अमेरिका जाने से ठीक पहले नई दिल्ली में नए अमेरिकी एंबेसडर सर्जियो गोर से एस जयशंकर की मीटिंग हुई थी. इसमें भी ट्रेड डील और टैरिफ का मुद्दा छाया रहा.
- नवंबर 2025: एस जयशंकर ने कनाडा में जी7 सत्र के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो से मुलाकात की थी. इस दौरान उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की और टैरिफ पर भी बातचीत हुई थी.
- अक्टूबर 2025: आसियान (ASEAN) समिट के इतर कुआलालंपुर में एस जयशंकर और रुबियो के बीच मुलाकात हुई थी. इस मीटिंग में भी दोनों के बीच ट्रेड, टैरिफ, एनर्जी और डिफेंस पर बातचीत हुई थी.
- सितंबर 2025: यूएनजीए बैठक से इतर एस जयशंकर की अमेरिकी समकक्ष रुबियो से मीटिंग हुई थी. इसमें ट्रेड और टैरिफ पर चर्चा हुई थी.
- जून-जुलाई, 2025 (वाशिंगटन डी.सी.): एस जयशंकर क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए गए थे, जहां उन्होंने व्यापक आर्थिक संबंधों पर द्विपक्षीय चर्चा भी की थी.
इस तरह एस जयशंकर ने समय-समय पर भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों में जमी बर्फ को बातचीत करके पिघलाते रहे. पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच अक्टूबर 2025 के बाद 2 अफरवरी 2026 को बातचीत हुई है. कहा जाता है कि इस बातचीत की नींव भी एस जयशंकर की मीटिंग्स ने ही रखी थी. इस तरह देखा जाए तो टैरिफ और ट्रेड डील पर एस जयशंकर ने बीते एक साल में कई बैठकें और कई दौर की अमेरिकी प्रतिनिधियों से बातचीत कीं. इसका नतीजा अब सबके सामने है. अमेरिका ने चीन और पाकिस्तान से भी भारत पर टैरिफ कम कर दिया है.
टेक्सटाइल, लेदर और मरीन प्रोडक्ट्स जैसी इंडस्ट्रीज में ग्रोथ आएगी. बाजार में भी उत्साह देखने को मिलेगा. कुल मिलाकर एस जयशंकर की ‘मीटिंग-मीटिंग’ वाली रणनीति ने भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया. अमेरिका के साथ ताबड़तोड़ बैठकों और बातचीत का नतीजा है कि आज भारत पर पाकिस्तान और चीन से भी कम टैरिफ है. यह भारत की नई डिप्लोमेसी का उदाहरण है, जहां हम अपनी शर्तों पर दुनिया से डील करते हैं. भारत ने बता दिया कि वह दबाव में झुकता नहीं है. बहरहा टैरिफ कम होने से आने वाले समय में यह रिश्ता और मजबूत होगा और भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई मिलेगी.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक, भारत पर अब केवल 18 फीसदी ही टैरिफ लगेगा. वर्तमान टैरिफ स्टेटस के अनुसार, भारत ने पाकिस्तान और चीन को भी पछाड़ दिया है. जी हां, भारत पर अमेरिकी टैरिफ 18 प्रतिशत रहेगा, जबकि इंडोनेशिया और पाकिस्तान पर 19 प्रतिशत, वियतनाम और बांग्लादेश पर 20 प्रतिशत तथा चीन पर 34 प्रतिशत टैरिफ लागू है. पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच 2 फरवरी 2026 को फोन पर बातचीत हुई. यह बातचीत अक्टूबर 2025 के बाद हुई है.






