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NEET छात्रा रेप-मौत केस-SI रौशनी और दारोगा हेमंत झा सस्पेंड ,FSL रिपोर्ट ने बदल दी पूरी कहानी

UB India News by UB India News
January 26, 2026
in TAZA KHABR, अपराध, पटना, महिला युग
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NEET छात्रा रेप-मौत केस-SI रौशनी और दारोगा हेमंत झा सस्पेंड ,FSL रिपोर्ट ने बदल दी पूरी कहानी
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पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET छात्रा के साथ रेप-मौत मामले में पुलिस ने चित्रगुप्त नगर थानेदार रौशनी कुमारी और कदमकुंआ के दारोगा हेमंत झा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। अधिकारियों ने ये माना है कि केस में निचले स्तर पर लापरवाही बरती गई है, जिसके बाद देर रात यह कार्रवाई हुई है। आरोप है कि घटना के पहले दिन से ही चित्रगुप्त नगर SHO को पूरी जानकारी थी, लेकिन वो इसे इग्नोर करती रही। अब रेप-मर्डर केस की जांच में CID की एंट्री हो गई है। रविवार सुबह CID की टीम शंभू गर्ल्स हॉस्टल पहुंची और जांच शुरू कर दी है।

थाना प्रभारी ने वरीय अधिकारियों को मिस लीड किया

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यहां तक कि 3 दिन के बाद कार्रवाई शुरू की और वरीय अधिकारियों को भी मिस लीड किया। जिससे इन्वेस्टिगेशन में काफी परेशानी हुई। इधर, फॉरेंसिंक टीम ने शनिवार को SIT को अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी, जिसमें छात्रा के कपड़ों से स्पर्म मिलने की बात कही गई है। फॉरेंसिंक रिपोर्ट में भी रेप की पुष्टि हुई है। वहीं रेप की पुष्टि होने के बाद मृतका के परिजन दोपहर 3 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।

शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट परीक्षा की तैयारी कर रही जहानाबाद की एक छात्रा की मौत के मामले में फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है. जांच में मृतका के अंतर्वस्त्र पर मानव शुक्राणु (semen) के अवशेष पाए गए हैं, जिससे अब संभव यौन शोषण का मामला और मजबूती से सामने आया है. एसआईटी अब यौन उत्पीड़न के सबूतों की डीएनए प्रोफाइलिंग करवा रही है, ताकि उसे गिरफ्तार अभियुक्तों और अन्य संदिग्धों के साथ मिलाया जा सके. पटना पुलिस के अनुसार, ये कपड़े मृतका के परिवार ने 10 जनवरी को पुलिस को दिए थे और उसके बाद एफएसएल को भेजे गए थे. लेकिन इस भयंकर खुलासे के बाद भी पुलिस की चुप्पी और देरी सवालों को बढ़ा रही है.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पहले ही जताई थी यौन हिंसा की आशंका

बता दें कि इससे पहले ही पीएमसीएच के मेडिकल बोर्ड की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया था कि यौन हिंसा को पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता. मृतका के शरीर पर कई जगह जख्म और निजी अंगों में चोट के निशान मिले थे जो यौन उत्पीड़न की दिशा में संकेत देते हैं. इसके बाद यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट पटना के AIIMS को भेजी गई थी ताकि विशेषज्ञों की राय से पुष्टि की जा सके. लेकिन नौ दिन गुजरने के बावजूद AIIMS की अंतिम रिपोर्ट अभी तक एसआईटी को नहीं मिली है. AIIMS के चिकित्सकों ने बताया कि उन्हें पूरी मेडिकल फाइल नहीं दी गई है, जिसके कारण वे समीक्षा पूरी नहीं कर पा रहे हैं.

एसआईटी जांच में अस्पताल और पुलिस पर भी उठे हैं सवाल

विशेष जांच टीम (SIT) ने राजेंद्र नगर के एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों और कर्मचारियों से दोबारा पूछताछ की है. पुलिस यह जानना चाहती है कि जब छात्रा पहली बार अस्पताल लाई गई थी तब उसके सिर पर चोट पहले से थी या गिरने के कारण आई थी. इसके अतिरिक्त, पुलिस 6 जनवरी के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अस्पताल के गेट पर कोई घटना हुई थी या नहीं. इस बीच यह सवाल उठ रहा है कि शुरू से ही मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया. घटना के कुछ दिनों तक हॉस्टल को सील नहीं किया गया और पोस्टमार्टम के निर्देश मिलने में देर हुई, जिससे प्रथम दौर की जांच पर भी संदेह उत्पन्न हुआ.

पटना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

यह मामला अब मीडिया और जनता की नज़र में सिर्फ एक जांच केस नहीं रहा. जांच में हो रही देरी, गलत बयानों और शुरुआती जांच में आत्महत्या की थ्योरी देने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठ रहे हैं. परिवार ने आरोप लगाया है कि शुरुआत में पुलिस मामले को आत्महत्या या दुर्घटना का रूप देने की कोशिश में थी और यौन शोषण के एंगल को दबाने की कोशिश की गई. एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया था कि प्रारंभिक मेडिकल रिपोर्ट पर पुलिस ने यह दावा भी किया कि छात्रा नींद की गोलियां लेने और टाइफायड से पीड़ित होने के कारण गंभीर हालत में थी. लेकिन पोस्टमार्टम और FSL के परिणामों ने इस दावे को खोखला साबित कर दिया है.

बता दें कि इस घटना ने आम जनमानस में भारी आक्रोश पैदा किया है. छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और गृहणियों ने पुलिस कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की कड़ी मांग की है. हालांकि प्रशासन ने एक विशेष जांच टीम गठित कर दी है, लेकिन पुलिस की जवाबदेही, जवाब देने की देरी और ट्रांसपेरेंसी की कमी को लेकर जनता का भरोसा कम होता जा रहा है. इस बीच अब एसआईटी अब तीन मुख्य कड़ियों को जोड़ने पर काम कर रही है- FSL रिपोर्ट के सबूत, AIIMS की चिकित्सा समीक्षा और अस्पताल में होने वाली प्रक्रियाओं की सत्यता. जैसे ही AIIMS की फाइनल रिपोर्ट मिलेगी, एसआईटी संभावित आरोपियों के खिलाफ डीएनए मैचिंग समेत आगे की कार्रवाई का ऐलान कर सकती है.

 

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