पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET छात्रा के साथ रेप-मौत मामले में पुलिस ने चित्रगुप्त नगर थानेदार रौशनी कुमारी और कदमकुंआ के दारोगा हेमंत झा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। अधिकारियों ने ये माना है कि केस में निचले स्तर पर लापरवाही बरती गई है, जिसके बाद देर रात यह कार्रवाई हुई है। आरोप है कि घटना के पहले दिन से ही चित्रगुप्त नगर SHO को पूरी जानकारी थी, लेकिन वो इसे इग्नोर करती रही। अब रेप-मर्डर केस की जांच में CID की एंट्री हो गई है। रविवार सुबह CID की टीम शंभू गर्ल्स हॉस्टल पहुंची और जांच शुरू कर दी है।
थाना प्रभारी ने वरीय अधिकारियों को मिस लीड किया
यहां तक कि 3 दिन के बाद कार्रवाई शुरू की और वरीय अधिकारियों को भी मिस लीड किया। जिससे इन्वेस्टिगेशन में काफी परेशानी हुई। इधर, फॉरेंसिंक टीम ने शनिवार को SIT को अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी, जिसमें छात्रा के कपड़ों से स्पर्म मिलने की बात कही गई है। फॉरेंसिंक रिपोर्ट में भी रेप की पुष्टि हुई है। वहीं रेप की पुष्टि होने के बाद मृतका के परिजन दोपहर 3 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पहले ही जताई थी यौन हिंसा की आशंका
एसआईटी जांच में अस्पताल और पुलिस पर भी उठे हैं सवाल
पटना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
यह मामला अब मीडिया और जनता की नज़र में सिर्फ एक जांच केस नहीं रहा. जांच में हो रही देरी, गलत बयानों और शुरुआती जांच में आत्महत्या की थ्योरी देने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठ रहे हैं. परिवार ने आरोप लगाया है कि शुरुआत में पुलिस मामले को आत्महत्या या दुर्घटना का रूप देने की कोशिश में थी और यौन शोषण के एंगल को दबाने की कोशिश की गई. एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया था कि प्रारंभिक मेडिकल रिपोर्ट पर पुलिस ने यह दावा भी किया कि छात्रा नींद की गोलियां लेने और टाइफायड से पीड़ित होने के कारण गंभीर हालत में थी. लेकिन पोस्टमार्टम और FSL के परिणामों ने इस दावे को खोखला साबित कर दिया है.
बता दें कि इस घटना ने आम जनमानस में भारी आक्रोश पैदा किया है. छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और गृहणियों ने पुलिस कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की कड़ी मांग की है. हालांकि प्रशासन ने एक विशेष जांच टीम गठित कर दी है, लेकिन पुलिस की जवाबदेही, जवाब देने की देरी और ट्रांसपेरेंसी की कमी को लेकर जनता का भरोसा कम होता जा रहा है. इस बीच अब एसआईटी अब तीन मुख्य कड़ियों को जोड़ने पर काम कर रही है- FSL रिपोर्ट के सबूत, AIIMS की चिकित्सा समीक्षा और अस्पताल में होने वाली प्रक्रियाओं की सत्यता. जैसे ही AIIMS की फाइनल रिपोर्ट मिलेगी, एसआईटी संभावित आरोपियों के खिलाफ डीएनए मैचिंग समेत आगे की कार्रवाई का ऐलान कर सकती है.







