ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन लगातार 14वें दिन भी जारी हैं। जनता खामेनेई सरकार के खिलाफ बगावत पर उतर आई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई की गई तो अमेरिका हमला करने से पीछे नहीं हटेगा। अब न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान को निशाना बनाने के कई सैन्य विकल्पों के बारे में जानकारी दी गई है।
‘अमेरिका मदद के लिए तैयार है’
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप को बताए गए विकल्पों में तेहरान में चुनिंदा जगहों पर लक्षित हमले शामिल हैं जिसमें शासन के आंतरिक सुरक्षा तंत्र से जुड़े गैर-सैन्य बुनियादी ढांचे भी शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी लोगों के प्रति मजबूत समर्थन जताया है। ट्रुथ सोशल पर उन्होंने लिखा, “ईरान शायद पहले कभी नहीं की तरह स्वतंत्रता की ओर देख रहा है। USA मदद के लिए तैयार है!!!”।
‘ईरानी लोगों के लिए मदद रास्ते में है’
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी संभावित अमेरिकी कार्रवाई पर अटकलों को और हवा दी है। उन्होंने ईरानी लोगों के लिए पोस्ट कर कहा, “लंबा दुस्वप्न जल्द ही खत्म होने वाला है।” प्रदर्शनकारियों के साहस की सराहना करते हुए ग्राहम ने ट्रंप के बयान का हवाला देते हुए लिखा कि अयातुल्ला और उसके गुर्गों के सत्ता में रहते हुए ईरान कभी महान नहीं बन सकता। उन्होंने कहा, “ईरान को फिर से महान बनाओ और मदद रास्ते में है।”
पूरे देश में फैले प्रदर्शन
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन आंदोलन में बदल चुके हैं। इसकी शुरुआत बढ़ती महंगाई और आर्थिक संकट से हुई थी, लेकिन अब यह इस्लामिक रिपब्लिक के शासन को पूरी तरह खत्म करने की मांग तक पहुंच गई है, जो 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से देश पर काबिज है। प्रदर्शन पूरे ईरान में फैल चुके हैं, जिसमें 31 प्रांतों के 180 से अधिक शहर शामिल हैं।
ईरान में तेजी से बदल रही है स्थिति
ट्रंप प्रशासन के सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी अधिकारी ईरानी अधिकारियों पर राजनयिक, आर्थिक और संभावित सैन्य कार्रवाई के विकल्पों का मूल्यांकन कर रहे हैं, ताकि हिंसा को रोका जा सके। ट्रंप को दी गई ब्रीफिंग आकस्मिक योजनाओं का हिस्सा बताई जा रही है। ईरान में यह आंदोलन 2022 के महसा अमीनी आंदोलन के बाद सबसे बड़ा माना जा रहा है, और स्थिति तेजी से बदल रही है।
ईरान में सुरक्षा बलों ने की फायरिंग
थिंक टैंक Institute for the Study of War (ISW) और Critical Threats Project के अनुसार, 10 जनवरी को स्थानीय समय के अनुसार आधी रात तक 15 प्रांतों में कम से कम 60 विरोध प्रदर्शन दर्ज किए गए, जिनमें से 25 मध्यम आकार के और 8 बड़े पैमाने के थे। इंटरनेट और टेलीकॉम सेवाओं पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे हुए हैं। अधिकारियों ने इंटरनेट ब्लैकआउट के जरिए विरोध को दबाने की कोशिश की है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रदर्शनकारी Starlink जैसी सैटेलाइट सेवाओं का इस्तेमाल कर जानकारी साझा कर रहे हैं। सुरक्षा बलों द्वारा फायरिंग की कई भी घटनाएं सामने आई हैं।
भारत के लिए कितना बड़ा खतरा?
ईरान में सरकार के खिलाफ पिछले कुछ हफ्तों से लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। लोग ईरान की खराब अर्थव्यवस्था और गिरती मुद्रा से बहुत नाराज हैं। इन प्रदर्शनों में 70 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। शुरुआत में लोग खाने-पीने की चीजों के बढ़ते दामों और देश में बहुत ज्यादा महंगाई से परेशान थे। लेकिन अब लोग सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। वहीं माना जा रहा है कि अमेरिका ईरान पर हमला कर सकता है। ऐसा हुआ तो इसका असर भारत पर भी दिखाई देगा।
ईरान में ये प्रदर्शन 28 दिसंबर से शुरू हुए थे और अब पूरे देश में फैल गए हैं। द न्यूयॉर्क पोस्ट ने वॉल स्ट्रीट जर्नल के हवाले से बताया है कि ट्रंप प्रशासन ईरान पर हमले के लिए शुरुआती योजना पर काम कर रहा है। इसमें ईरान में कई जगहों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले करने का ऑप्शन भी शामिल है। ट्रंप प्रशासन इस बात पर भी विचार कर रहा है कि ईरान में किन-किन जगहों पर हमला किया जाए। भारत और ईरान के बीच व्यापारिक रिश्ते काफी मजबूत हैं। पहले ईरान में विरोध-प्रदर्शन और बाद में अमेरिका का हमला भारत के लिए कुछ मुश्किलें पैदा कर सकता है।
भारत के लिए ईरान क्यों महत्वपूर्ण
- भारत के लिए ईरान क्षेत्रीय जुड़ाव के कुछ सबसे महत्वपूर्ण रास्तों के केंद्र में है। इसलिए, तेहरान में स्थिरता सीधे तौर पर भारत के रणनीतिक और व्यावसायिक हितों से जुड़ी हुई है।
- भारत ने मध्य एशिया, रूस और यूरोप तक अपनी पहुंच को गहरा करने के लिए कई प्रोजेक्ट में भारी निवेश किया है। ईरान इन प्रोजेक्ट के लिए एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट हब का काम करता है।
- इनमें सबसे महत्वपूर्ण है ईरान के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित चाबहार बंदरगाह। यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधा रास्ता देता है।
INSTC भी अहम हिस्सा
ईरान में चाबहार बंदरगाह ही नहीं, बल्कि इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) भी भारत की क्षेत्रीय व्यापार रणनीति का एक अहम हिस्सा है। यह एक मल्टी-मॉडल (कई तरह के परिवहन का इस्तेमाल करने वाला) व्यापार नेटवर्क है जो ईरान के जरिए भारत को रूस और यूरोप से जोड़ता है। यह लंबे और महंगे समुद्री रास्तों पर भारत की निर्भरता को कम करता है। ऐसे में चाबहार बंदरगाह और INSTC, दोनों ही प्रोजेक्ट भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
भारत की ईरान में बड़ी तैयारी
- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चाबहार बंदरगाह की क्षमता को 1,00,000 TEUs (ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट्स) से बढ़ाकर 5,00,000 TEUs करने का काम चल रहा है।
- बंदरगाह को ईरानी रेलवे नेटवर्क से जोड़ने के लिए चाबहार और जाहेदान के बीच 700 किलोमीटर ट्रैक बिछाने का काम भी पूरा किया जा रहा है।
- इन दोनों प्रोजेक्ट के साल 2026 के मध्य तक पूरा होने की उम्मीद है।
दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध
वाणिज्य विभाग के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-ईरान द्विपक्षीय व्यापार लगभग 1.68 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। इसमें भारत ने 1.24 बिलियन डॉलर का निर्यात किया और 0.44 बिलियन डॉलर का आयात किया। ऐसे में भारत के लिए 0.80 बिलियन डॉलर का व्यापार अधिशेष (सरप्लस) रहा।
- हाल के वर्षों में भारत ईरान के 5 सबसे बड़े व्यापारिक भागीदारों में से एक रहा है।
- भारत से ईरान को मुख्य निर्यात वस्तुओं में चावल, चाय, चीनी, दवाएं, मानव निर्मित स्टेपल फाइबर, बिजली की मशीनरी और कृत्रिम आभूषण शामिल हैं।
- ईरान से भारत के मुख्य आयात में सूखे मेवे, अकार्बनिक/कार्बनिक रसायन, कांच के बने पदार्थ आदि शामिल हैं।
भारत पर क्या असर?
ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। चाबहार बंदरगाह और INSTC जैसी परियोजनाएं भारत को मध्य एशिया और यूरोप से जोड़ने में अहम भूमिका निभाती हैं। इन परियोजनाओं में भारत ने काफी निवेश किया है। अगर ईरान में अस्थिरता बढ़ती है तो इन परियोजनाओं के संचालन में बाधा आ सकती है। इससे भारत के व्यापार और लॉजिस्टिक्स पर बुरा असर पड़ सकता है। वहीं अगर ईरान पर अमेरिका हमला कर देता है तो भारत के लिए और भी मुश्किल हो सकती है।







