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बिहार की राजनीति में ‘भारत रत्न’ को लेकर सियासी घमासान , उपलब्धी है ‘राजनीतिक संन्यास’ का रास्ता ?…………….

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से नवाजने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। जदयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। हालांकि, इस मांग को केवल सम्मान की दृष्टि से नहीं, बल्कि सियासी नफे-नुकसान के चश्मे से भी देखा जा रहा है।

UB India News by UB India News
January 12, 2026
in जदयू, पटना, बिहार, संपादकीय
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बिहार की राजनीति में ‘भारत रत्न’ को लेकर सियासी घमासान , उपलब्धी है ‘राजनीतिक संन्यास’ का रास्ता ?…………….
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बिहार में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया. जेडीयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न से नवाजे जाने की मांग की थी, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र तक लिख दिया. हालांकि जेडीयू ने केसी त्यागी के बयान से किनारा किया था. मामले के तूल पकड़ने पर पक्ष-विपक्ष के नेताओं की रसाकसी तेज हो गई. केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि- ‘भारत रत्न नीतीश कुमार जी… ये शब्द सुनने में कितना अच्छा लगेगा ना. हमें पूर्ण विश्वास है कि अपने फ़ैसले से सबको चौंका देने वाले माननीय प्रधानमंत्री जी बिहार के माननीय मुख्यमंत्री @NitishKumar जी को भारत रत्न से नवाज़े जाने का फ़ैसला कर एक बार फिर से सबको चौकाएंगें.’ उधर, लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने कहा कि लालू यादव को भी भारत रत्न मिलना चाहिए.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर भारत रत्न देने की मांग कोई नया नहीं है। समाजवादी राजनीति के प्रणेता बन अभी तक राजनीति से विकास का जो रास्ता तय किया है उन कार्यों के लिए भारत रत्न सम्मान के वो हकदार हैं,इससे इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन वर्तमान परिप्रेक्ष्य में राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जिस सक्रिय राजनीति के साथ जगह-जगह धमक रहे हैं, उस खास खड़ी में भारत रत्न की मांग उनकी सक्रिय राजनीति को खत्म करने की गुहार या फिर अपना कुछ खास मकसद ज्यादा दिखता है। ऐसा नहीं कि यह मांग कोई पहली बार उठी हो इसके पहले भी कई बार भारत रत्न की मांग उठी है। यहां तक कि भाजपा नेता ने भी नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग की थी।

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मामले में प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री और लोजपा (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने भारत रत्न को लेकर नीतीश कुमार की दावेदारी का खुला समर्थन किया है. चिराग ने कहा कि पिछले दो दशकों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार को जो नेतृत्व दिया है, वह अनुकरणीय है. उन्होंने कई सराहनीय कार्य किए हैं. मेरा मानना है कि वह भारत रत्न के पूरी तरह योग्य हैं. उधर, तेज प्रताप यादव बोले- नीतीश जी और हमारे पिता (लालू जी) दोनों भाई-भाई की तरह हैं. अगर नीतीश जी को मिलता है, तो हमें खुशी होगी, लेकिन लालू जी का योगदान भी अतुलनीय है. दोनों को यह सम्मान मिलना चाहिए.

जदयू नेता त्यागी ने क्या कहा?

जनवरी 2026 में जदयू नेता केसी त्यागी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर भारत रत्न देने की मांग की है। तर्क यह दिया कि नीतीश कुमार को समाजवादी आंदोलन के अनमोल रत्न हैं। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में सामाजिक न्याय, सुशासन, महिला सशक्तीकरण और विकास को नई दिशा दी है। राष्ट्रीय राजनीति में भी एक अलग पहचान बनाई है। पहले भी देश में कई जीवित नेताओं को भारत रत्न से सम्मानित किया जा चुका है, इसलिए इस आधार पर नीतीश कुमार को नजर अंदाज करना उचित नहीं होगा।

जेडीयू के वरिष्ठ नेता और नीतीश कुमार के अच्छे दोस्त माने जाने वाले केसी त्यागी की यह मांग सामने आते ही पार्टी ने किनारा कर लिया. जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा- ‘हाल के दिनों में केसी त्यागी के कई बयान आए हैं. पार्टी का जो आधिकारिक स्टैंड है, जो हमारी नीतियां हैं, उससे ये बयान मेल नहीं खाते हैं. इसलिए उनके बयानों को निजी क्षमता में दिया गया बयान समझा जाना चाहिए. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दरअसल वह पार्टी में हैं भी या नहीं यह पार्टी के लोगों और कार्यकर्ताओं को भी नहीं पता है. इसलिए उनकी तरफ से दिए गए बयानों को उनकी निजी क्षमता से दिया गया बयान समझा जाना चाहिए.’
पहले RJD से भी उठ चुकी है मांग
गौरतलब है कि, ये पहला मौका नहीं है, जब राजद की ओर से भारत रत्न के लिए लालू यादव का नाम सामने आया है. बिहार चुनाव के दौरान आरजेडी ऑफिस के पास एक पोस्टर लगाया था, जिसमें लालू प्रसाद यादव को ‘भारत रत्न’ देने की मांग की गई थी. पोस्टर अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव रंजीत रजक की ओर से लगाया गया था. इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी भी भारत रत्न के लिए लालू यादव के नाम का प्रस्ताव रख चुकी हैं.
तो क्या निगाहे राज्यसभा पर है?

राजनीति में इंतजार का फल मीठा होता है। केसी त्यागी भी जदयू के उन इंतजार कर रहे नेताओं में शामिल हैं जिन्हें नीतीश कुमार का देखने का इंतजार है। राजनीतिक गलियारों में एक चर्चा यह चल रही है कि जब से राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि हरिवंश नारायण रिपीट नहीं होंगे। इसकी वजह इनका भाजपा कनेक्शन बताया जा रहा है। इस खबर के बाद राज्यसभा जाने को इच्छुक नेताओं की दौड़ राजधानी होने लगी है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि केसी त्यागी भी इस रेस में शामिल हो गए हैं। उन्होंने अपनी लॉयल्टी शो करते देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख डाला।

गिरिराज सिंह ने भी की थी मांग

लोकसभा चुनाव 2024 के पूर्व भाजपा के फायर ब्रांड नेता गिरिराज सिंह ने भी नीतीश कुमार को भारत रत्न मांग देने की मांग की थी। ये वही फायर ब्रांड नेता हैं जिनका नीतीश कुमार से अच्छा रिश्ता नहीं है। इस रिश्ता बिगड़ने की शुरुआत लाल कृष्ण आडवाणी बनाम नरेंद्र मोदी की लड़ाई में नरेंद्र मोदी का पक्ष लेने के कारण हुई थी। पर राजनीतिक गलियारों में इसे गिरिराज सिंह का हृदय परिवर्तन नहीं माना जा रहा था। तब कहा गया कि तात्कालिक फायदा तो लोकसभा में हो जाएगा। नीतीश कुमार के प्रभाव वाले वोट मिल जाएगा। और दूरगामी प्रभाव यह है कि भारत रत्न के बात नीतीश कुमार की सक्रिय राजनीति का अंत हो जाएगा।

क्या जीवित लोगों को मिल सकता है भारत रत्न?

जी हां, जीवित व्यक्तियों को भी भारत रत्न से सम्मानित किया जा सकता है. 1954 में जब इस पुरस्कार की शुरुआत हुई थी, तब मरणोपरांत (Posthumous) सम्मान देने का कोई प्रावधान ही नहीं था. 1954 के मूल नियमों के अनुसार, भारत रत्न केवल जीवित रहते हुए असाधारण सेवा के लिए दिया जाता था. मरणोपरांत सम्मान देने की व्यवस्था 1966 में जोड़ी गई और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री मरणोपरांत यह सम्मान पाने वाले पहले व्यक्ति बने.
अब तक कितने जीवित व्यक्तियों को भारत रत्न से सम्मानित किया जा चुका है?
आंकड़ों के अनुसार, अब तक कुल 53 हस्तियों को भारत रत्न से नवाजा गया है. इनमें से अधिकांश को यह सम्मान उनके जीवनकाल में ही मिला है. हालिया कुछ वर्षों के उदाहरण देखें तो 2024 में लालकृष्ण आडवाणी को उनके जीवनकाल में ही भारत रत्न से सम्मानित किया गया. उनसे पहले सचिन तेंदुलकर (सबसे कम उम्र में), अटल बिहारी वाजपेयी, लता मंगेशकर और अमर्त्य सेन जैसी विभूतियों को भी जीवित रहते हुए ही यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्राप्त हुआ.

नीतीश कुमार का मसला और राजनीतिक संदर्भ

जनवरी 2026 में जेडीयू ने औपचारिक रूप से नीतीश कुमार के लिए भारत रत्न की मांग उठाई है. तर्क दिया गया है कि कर्पूरी ठाकुर और चौधरी चरण सिंह जैसे समाजवादियों को सम्मान मिलने के बाद अब नीतीश कुमार ही उस विरासत के सबसे बड़े जीवित स्तंभ हैं. 10 बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने और राज्य की बुनियादी संरचना बदलने का श्रेय उन्हें दिया जा रहा है. हालांकि, भारत रत्न का चयन पूरी तरह से प्रधानमंत्री की सिफारिश पर निर्भर करता है, जो राष्ट्रपति को भेजी जाती है.

चयन प्रक्रिया और नियम

आपको इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि भारत रत्न के लिए कोई औपचारिक नामांकन प्रक्रिया नहीं होती. इसके लिए प्रधानमंत्री सीधे राष्ट्रपति को सिफारिश भेजते हैं. एक साल में अधिकतम 3 लोगों को ही यह सम्मान दिया जा सकता है (हालांकि 2024 में अपवाद स्वरूप 5 लोगों को दिया गया था). यह पुरस्कार कोई मौद्रिक अनुदान (पैसा) नहीं देता, बल्कि राष्ट्रपति के हस्ताक्षर सहित एक ‘सनद’ (प्रमाणपत्र) और पीपल के पत्ते के आकार का पदक दिया जाता है.

भारत रत्न पुरस्कार के साथ क्या सुविधाएं मिलती हैं? 

भारत रत्न प्राप्तकर्ता को भारत सरकार की ‘वॉरंट ऑफ प्रेसिडेंस’ में 7वां स्थान मिलता है. उन्हें जीवनभर एयर इंडिया और भारतीय रेलवे में मुफ्त यात्रा, टैक्स में छूट और जरूरत पड़ने पर ‘Z+’ श्रेणी की सुरक्षा जैसी सुविधाएं मिलती हैं. इसके अलावा, उन्हें राज्य अतिथि का दर्जा भी दिया जाता है.
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