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पीएम मोदी ने मन की बात में एंटीबायोटिक को लेकर क्यों चेताया………….

UB India News by UB India News
December 29, 2025
in केंद्रीय राजनीती, खास खबर
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पीएम मोदी ने मन की बात में एंटीबायोटिक को लेकर क्यों चेताया………….
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पीएम मोदी ने साल 2025 के आखिरी ‘मन की बात’ कार्यक्रम के दौरान एंटी बायोटिक के कम होते असर को लेकर चिंता जताई है। इस दौरान उन्होंने आईसीएमआर की रिपोर्ट का जिक्र किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई बीमारियों के खिलाफ एंटीबायोटिक कमजोर पड़ रही हैं।

पीएम मोदी ने जनता से की अपील

पीएम ने कहा कि मेडिसिन के लिए गाइडेंस और एंटीबायोटिक के लिए डॉक्टर की जरूरत है। अपनी मनमर्जी से दवाओं का इस्तेमाल न करें, इससे रोगाणुओं पर इसका असर कम हो जाता है। इस दौरान उन्होंने निमोनिया और यूटीआई जैसी बीमारियों का जिक्र किया और कहा कि इन बीमारियों पर एंटीबायोटिक का असर कम होता जा रहा है, जो बेहद चिंता की बात है। पीएम ने जनता से अनुरोध किया कि किसी भी तरह की दवाई डॉक्टर से बगैर पूछे न खाएँ। ये बेहद खतरनाक है।

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दरअसल ICMR रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि शरीर में प्रतिरोधक क्षमता में कमी का एक बड़ा कारण लोगों द्वारा बिना सोचे-समझे antibiotic दवाओं का सेवन है। एंटीबायोटिक दवाएँ ऐसी नहीं हैं, जिन्हें यूँ ही ले लिया जाए। इनका इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए। इसे कितने दिनों तक सेवन करना है, किन परिस्थितियों में खाना है और कितनी मात्रा लेनी है, ये डॉक्टर ही बता सकते हैं।

ICMR रिपोर्ट में कई संक्रमण को लेकर खुलासा

ICMR (Indian Council of Medical Research या भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ) ने हाल ही में एक report जारी किया है। इसमें बताया गया है कि भारत में रोगाणु लगातार एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी क्षमता विकसित कर रहे हैं। इसका असर ये हो रहा है कि ये दवाएँ इन रोगाणुओं को खत्म करने में सक्षम नहीं रहीं। इससे संक्रमण को रोकना मुश्किल होता जा रहा है। इससे मृत्यु का खतरा भी बढ़ रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि खून में होने वाले संक्रमण यानी ब्लडस्ट्रीम इंफेक्शन के लिए जिम्मेदार एक अहम रोगाणु क्लेबसिएला निमोनिया है। यह फेफड़ों को संक्रमित करके निमोनिया का कारण बन सकता है। इसके अलावा रक्त, त्वचा में घाव और मस्तिष्क की परत को संक्रमित करके मेनिन्जाइटिस से ग्रसित करता है। इसे रोकने के लिए इस्तेमाल होने वाले एंटीबायोटिक्स की क्षमता कमजोर साबित हो रही है। इससे बीमारी से निपटना मुश्किल होता जा रहा है। आईसीएमआर की रिपोर्ट के अनुसार, स्थिति इतनी चिंताजनक है कि निमोनिया संक्रमणों में से केवल 43% का ही 2021 में प्राथमिक एंटीबायोटिक दवाओं से इलाज किया जा सका, जबकि 2016 में यह आंकड़ा 65% था।

कमजोर पड़ने लगी हैं एंटीबायोटिक मेडिसिन

रिपोर्ट में एक और रोगाणु एसिनेटोबैक्टर बाउमानी के संक्रमण को लेकर कहा गया है कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि ये रोगाणु बहु-दवा प्रतिरोधी क्षमता प्राप्त कर चुका है। ये आईसीयू में जीवन रक्षक उपकरणों पर रखे गए रोगियों के फेफड़ों पर हमला करता है। इससे मरीज की हालत और खराब हो जाती है। UTI जैसी कई बीमारियों के खिलाफ antibiotic दवाएँ कमजोर साबित हो रही हैं। अस्पताल में होने वाला ये सबसे आम इंफेक्शन है।

ई. कोलाई (E coli) एक ऐसा रोगाणु है, जो दूषित भोजन के सेवन के बाद मनुष्यों और जानवरों की आंतों में आमतौर पर पाया जाता है। ये भारत में आम बीमारी है। इसके अलावा क्लेबसिएला न्यूमोनिया (K pneumoniae) स्यूडोमोनास एरुगिनोसा (Pseudomonas aeruginosa), एसिनेटोबैक्टर बाउमानी (Acinetobacter baumannii) और स्टैफिलोकोकस ऑरियस (Staphylococcus aureus) जैसे रोगाणु आते हैं, जिसका संक्रमण सबसे ज्यादा फैलता है।

इनके लिए इस्तेमाल होने वाले फ़्लोरोक्विनोलोन (Fluoroquinolones), थर्ड जनरेशन सेफलोस्पोरिन (third generation cephalosporins), कार्बापेनेम्स (carbapenems), और पिपेरासिलीन टैज़ोबैक्टम (piperacillin tazobactam) जैसे एंटीबायोटिक लगातार अपना असर कम करते जा रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि हेल्थकेयर से जुड़े ब्लडस्ट्रीम इन्फेक्शन (BSI) 72.1% मामलों के लिए जिम्मेदार हैं।

एसिनेटोबैक्टर बाउमानी, क्लेबसिएला न्यूमोनिया, और स्यूडोमोनास एरुगिनोसा वेंटिलेटर-एसोसिएटेड न्यूमोनिया (VAP) के लिए लगभग 80% कारण बनने वाले पैथोजन थे, इसलिए ज़्यादातर क्लिनिकल स्थितियों में वैनकोमाइसिन, टेकोप्लानिन, और लाइनज़ोलिड के इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है।

WHO ने भी जताई चिंता

ये सिर्फ भारत की स्थिति नहीं है। दुनियाभर में भी इसको लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है। WHO की रिपोर्ट में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के फैलाव और ट्रेंड का ग्लोबल एनालिसिस पेश किया गया है, जिसमें ब्लडस्ट्रीम इन्फेक्शन, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इन्फेक्शन और यूरोजेनिक गोनोरिया के 23 मिलियन से ज़्यादा बैक्टीरियोलॉजिकली कन्फर्म्ड मामलों को शामिल किया गया है। 2023 में 104 देशों और 2016 से 2023 के बीच 110 देशों ने डेटा रिपोर्ट किया था।

यही वजह है कि PM मोदी ने ‘मन की बात’ में एंटीबायोटिक के इस्तेमाल का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि अब बहुत से लोग मानते हैं कि सिर्फ एक गोली लेने से सभी हेल्थ प्रॉब्लम ठीक हो सकती हैं। यही वजह है कि इन एंटीबायोटिक्स से बीमारियाँ और इन्फेक्शन ज्यादा हो रहे हैं।

लोगों से ज्यादा जिम्मेदार बनने की अपील करते हुए PM ने कहा कि वे आग्रह करना चाहते हैं कि प्लीज अपनी मर्जी से दवाएँ लेने से बचें। एंटीबायोटिक्स के मामले में, इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि बगैर डॉक्टरी सलाह के इसका इस्तेमाल न करें। दवाओं के लिए गाइडेंस की ज़रूरत होती है और एंटीबायोटिक्स के लिए डॉक्टर की। यह आदत आपकी हेल्थ को दुरुस्त बनाने में बहुत मददगार साबित होगी।

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