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क्या नागमणि वाली गलती तो नहीं कर रहे उपेंद्र!

UB India News by UB India News
December 26, 2025
in पटना, बिहार
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बेटे को मंत्री बनाने पर बवाल !
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क्या बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाकर उपेंद्र कुशवाहा फंस गए हैं? इस सवाल पर से पर्दा तो कुछ महीने या साल बाद उठेगा।

लेकिन इतना तय है कि पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में सब ठीक नहीं है। विधायक कभी भी साथ छोड़ सकते हैं। इसका संकेत तब मिला जब कुशवाहा की लिट्टी-चोखा पार्टी छोड़कर उनके 3 विधायक माधव आनंद, रामेश्वर महतो और आलोक सिंह भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से मिले।

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तीनों विधायकों ने भास्कर से बातचीत में अपनी नाराजगी की बातों को स्वीकार भी किया। आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में जानेंगे, बेटे को मंत्री बनाने से उपेंद्र कुशवाहा को 3 बड़े नुकसान हैं…।

नुकसान-1ः हाथ से छिटक सकता है कुशवाहा समाज

उपेंद्र कुशवाहा कोइरी/कुशवाहा समाज से आते हैं। बिहार में कोइरी समाज की आबादी 4.2% है। इनका मगध, शाहाबाद, सीवान, भागलपुर-बांका, पूर्णिया, बेतिया-मोतिहारी एरिया की 40 से 45 सीटों पर प्रभाव है।

कोइरी समाज पर उपेंद्र कुशवाहा की पकड़ रही है। इसे आप आंकड़ों से समझिए…

  • 2020 विधानसभा चुनाव में कुशवाहा असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के साथ तीसरा मोर्चा बनाकर 99 सीटों पर चुनाव लड़े। तब उनकी पार्टी राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी (RLSP) को एक भी सीट नहीं मिली, लेकिन 1.8% वोट मिला।
  • 2025 में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी RLM 6 सीटों पर चुनाव लड़ी, जिसमें से 4 सीटें जीती है। उनके NDA में आने से भाजपा-JDU को काफी फायदा हुआ है।
  • 2020 में जिस मगध की 47 सीटों में से सिर्फ 18 सीटें NDA जीता था। 2025 में उसका आंकड़ा 40 सीट तक पहुंच गया है। मतलब 2020 से 22 ज्यादा।
  • वहीं, 2020 में शाहाबाद में सिर्फ 2 सीट जीतने वाला NDA 2025 में 19 सीट पर पहुंच गया है। मतलब 17 ज्यादा।
  • कुशवाहा समाज का असर सीवान और समस्तीपुर जिले की सीटों पर भी है। सीवान में 8 में से 7 सीटें और समस्तीपुर की 10 में से 7 सीटों पर NDA जीता है। जो 2020 से 7 सीटें ज्यादा है।

हालांकि, यह सब तब हुआ जब उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे को लॉंच नहीं किया था। अब वह बिना किसी सदन (विधानसभा/विधान परिषद) के सदस्य रहे अपने बेटे दीपक प्रकाश को पंचायती राज मंत्री बना दिया है।

  • पॉलिटिकल एनालिस्ट प्रो. प्रमोद रंजन कहते हैं, ‘उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे को राजनीति में लाकर लालू यादव और दिवंगत रामविलास पासवान बनने की कोशिश की है। बेटे, पत्नी सबको सेट करने लगे। जबकि, उनको समझना चाहिए कि उनकी पार्टी RJD, LJP(R) उतनी बड़ी नहीं है। छोटी पार्टी में परिवार को सेट करने पर बिखराव तो होगा ही।’
कुशवाहा की लिट्टी-चोखा पार्टी छोड़कर भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से मिले RLM के 3 विधायक।
कुशवाहा की लिट्टी-चोखा पार्टी छोड़कर भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से मिले RLM के 3 विधायक।

नागमणि वाली गलती कर रहे उपेंद्र, सम्राट को फायदा

प्रो. प्रमोद रंजन कहते हैं, ‘कोइरी राजनीतिक रूप से जागरूक समाज है। एक जमाने में नागमणि समाज के बड़े लीडर थे। लेकिन वह खुद स्थिर राजनीति नहीं कर सके। बार-बार गठबंधन और पार्टी बदलते थे। इसको देखते हुए समाज उनसे दूर हुआ।’

  • प्रो. प्रमोद रंजन कहते हैं, ‘नागमणि की इसी गलती का फायदा उपेंद्र कुशवाहा ने उठाया था। बीते 15 सालों से लगातार अपने समाज और राज्य की बातें करते थे। तब समाज ने उनको हाथों-हाथ लिया। लेकिन बीते 4-5 साल से उपेंद्र कुशवाहा भी नागमणि वाली गलती कर रहे हैं।’
  • प्रो. प्रमोद रंजन कहते हैं, ‘कुशवाहा लगातार पार्टी बदल रहे हैं। अब तो उन्होंने अपनी पत्नी और बेटे को सेट कर दिया है। उसका समाज के अंदर गलत मैसेज गया है। दूसरी तरफ समाज से आने वाले सम्राट चौधरी को भाजपा आगे बढ़ा रही है। कुशवाहा की गलती का फायदा सम्राट को हो रहा है।’

नुकसान-2ः टूट सकती है कुशवाहा की पार्टी

4 में से 3 विधायकों माधव आनंद, रामेश्वर महतो और आलोक सिंह ने उपेंद्र कुशवाहा से बातचीत बंद कर दी है। 24 दिसंबर को आयोजित लिट्टी-चोखा पार्टी में भी नहीं गए। जबकि, उसी समय तीनों विधायक भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से पटना स्थित आवास पर मुलाकात की।

नितिन नबीन से मुलाकात की फोटो भी जारी की और दिल्ली रवाना हो गए। भास्कर से तीनों विधायकों ने साफ तौर पर पार्टी छोड़ने की बात तो नहीं कही, लेकिन दीपक प्रकाश को मंत्री बनाने से नाराजगी की बात स्वीकार की।

  • सीनियर जर्नलिस्ट अभिरंजन कुमार कहते हैं, ‘भाजपा गठबंधन धर्म का पालन करेगी। वह तीनों विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल नहीं कराएगी, लेकिन वह उनकी नाराजगी को सुनकर समाधान निकालने का प्रयास जरूर करेगी।’
  • अभिरंजन कुमार कहते हैं, ‘नितिन नबीन ने उनकी समस्या सुनी और समाधान का आश्वासन दिया। इतनी बड़ी जीत के बाद गठबंधन की पार्टी के विधायक को भाजपा अपने में शामिल कर गलत मैसेज नहीं देना चाहेगी।’
बाजपट्‌टी से रालोमो के विधायक रामेश्वर महतो ने 14 दिन पहले सोशल मीडिया पर बिना नाम लिए उपेंद्र कुशवाहा के परिवारवाद पर निशाना साधा था।
बाजपट्‌टी से रालोमो के विधायक रामेश्वर महतो ने 14 दिन पहले सोशल मीडिया पर बिना नाम लिए उपेंद्र कुशवाहा के परिवारवाद पर निशाना साधा था।

साथ छोड़ेंगे तो नहीं जाएगी विधायकी

तीनों विधायकों से बातचीत के बाद यह तय है कि वह अब कुशवाहा के साथ ज्यादा दिन नहीं रहेंगे। मतलब कुशवाहा की पार्टी RLM टूट सकती है।

  • देश में दल-बदल विरोधी कानून 1985 से लागू है। इसमें पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल होने वाले विधायक-सांसदों की सदस्यता रद्द करने का प्रावधान है।
  • 2003 में 91वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम के तहत यह प्रावधान किया गया कि अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य किसी पार्टी में शामिल होने या गुट बनाने के पक्ष में हो तो उनकी सदस्यता नहीं जाएगी।

इस नियम के मुताबिक, RLM के 3 विधायक अगर कोई पार्टी बनाते हैं या किसी पार्टी में विलय करते हैं तो उनकी सदस्यता नहीं जाएगी। क्योंकि कुल 4 विधायक ही हैं। इसमें से 3 मतलब दो-तिहाई।

अब तक 8 बड़े नेताओं ने दिया इस्तीफा

  • 27 नवंबर को पार्टी के 7 बड़े नेताओं ने उपेंद्र कुशवाहा के इस निर्णय का विरोध करते हुए इस्तीफा दे दिया।
  • इनमें बिहार राज्य पार्टी अध्यक्ष महेंद्र कुशवाहा और उपाध्यक्ष जितेंद्र नाथ शामिल थे। महेंद्र कुशवाहा ने कहा था- ‘उपेंद्र कुशवाहा अक्सर राजनीति में नैतिक मूल्यों की बातें करते हैं लेकिन जब मौका आया, तो उन्होंने सत्ता के लिए अपने परिवार को तरजीह दी।’
  • 25 दिसंबर को RLM के संस्थापक सदस्य और व्यवसायिक प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अनंत कुमार सहित पूरे व्यवसायिक प्रकोष्ठ ने इस्तीफा दे दिया। साथ ही जल्द JDU में शामिल होने का ऐलान किया है। अनंत कुमार ने कहा कि पार्टी अपने उद्देश्य से भटक गई है।

नुकसान-3ः जा सकती है राज्यसभा की सीट

2024 लोकसभा चुनाव हारने के बाद अगस्त 2024 में उपेंद्र कुशवाहा को NDA ने राज्यसभा भेज दिया था। उनका कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को खत्म हो रहा है।

पार्टी में नाराजगी को देखते हुए संभावना व्यक्त की जा रही है कि कुशवाहा को भाजपा इस बार अपने कोटे से राज्यसभा नहीं भेज सकती है। अंदरखाने चर्चा है कि नीतीश कुमार की नजर राज्यसभा की 3 सीटों पर है।

  • पॉलिटिकल एनालिस्ट अरुण पांडेय बताते हैं, ‘फिलहाल NDA की जिस मुद्दे पर किरकिरी हुई है, उसमें सबसे बड़ा मुद्दा परिवारवाद है। उपेंद्र कुशवाहा ने पहले अपनी पत्नी स्नेहलता को विधानसभा का टिकट दिया। इसके बाद अचानक अपने बेटे का नाम मंत्री पद के लिए आगे बढ़ा दिया। उनकी पत्नी विधायक थीं, लेकिन बेटा किसी भी सदन में नहीं था।’
  • अरुण पांडेय कहते हैं, ‘भाजपा के पिछले ट्रैक रिकार्ड को देखें तो लगता नहीं कि कुशवाहा को दोबारा अपने कोटे से राज्यसभा भेजे। ऐसा करेगी तो नेशनल लेवल पर आलोचना होगी।’
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