केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की ओर से दायर उस याचिका का विरोध किया, जिसमें उनके और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामलों को किसी अन्य अदालत में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया था। राबड़ी देवी ने विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए मामलों को स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है।
जमीन के बदले नौकरी और आईआरटीसी घोटाले
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद की पत्नी राबड़ी देवी और उनके परिवार के खिलाफ दर्ज चार मामले जमीन के बदले नौकरी और आईआरटीसी घोटाले से जुड़े हैं। इन मामलों की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कर रहे हैं।
राबड़ी देवी की इस याचिका पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश भट्ट सुनवाई कर रहे हैं। सीबीआई का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता डीपी सिंह ने शनिवार को दलील दी।‘‘आप अदालत की प्रक्रिया को धराशायी नहीं कर सकते, आप रणनीति के तहत न्यायाधीश बदलने का अनुरोध नहीं कर सकते। आप न्यायाधीश को बदनाम कर सकते। ’’
इससे पहले, आईआरसीटीसी घोटाले के मामले में न्यायाधीश के समक्ष दायर विस्तृत जवाब में सीबीआई ने कहा था कि मामला स्थानांतरण आवेदन ‘‘आवेदक (राबड़ी देवी) की ओर अदालत को गुमराह करने का एक दुर्भावनापूर्ण प्रयास है और यह न केवल अदालत को बदनाम करने का प्रयास है, बल्कि विशेष न्यायाधीश (विशाल गोगने) को धमकाने का भी प्रयास है, ताकि न्याय के स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रशासन में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप किया जा सके’’।
15 दिसंबर को जारी रहेंगी सुनवाई
सीबीआई ने अपने जवाब में कहा कि राबड़ी देवी ने कथित पक्षपात का मुद्दा तभी उठाया, जब आरोपों पर कई महीनों तक व्यापक बहस सुनी गई, आरोप तय किए गए और मुकदमा साक्ष्य चरण में पहुंच गया। इस मामले में दलीलें 15 दिसंबर को जारी रहेंगी।







