पटना. लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने हाल में ही एक टेलिविजन चैनल से इंटरव्यू में एनडीए में शामिल होकर बिहार चुनाव लड़ने की कहानी बताई. इसी क्रम में उन्होंने कहा कि हमारे पास हमेशा विकल्प था कि हम बाहर भी रहते और गठबंधन में वापस नहीं जाते, लेकिन यह भी सत्य है कि मैं मेरे प्रधानमंत्री से अलग नहीं रह सकता. इस पर जब पत्रकार ने पूछा कि क्यों वह प्रधानमंत्री से अलग नहीं रह सकते हैं तो चिराग पासवान ने मुस्कुराते हुए कहा- “I love him a bit too much… मैं बहुत ज्यादा उनसे प्यार करता हूं.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति चिराग पासवान का यह भाव व्यक्त करने पर वह कहानी भी याद आ गई जब उनके पिता राम विलास पासवान ने एनडीए के साथ जाने पर जहर खाने की धमकी दी थी. चिराग पासवान ने हाल ही में एक न्यूज एजेंसी से बातचीत में इस बात का खुलासा किया था.
एनडीए में आने पर चिराग पासवान का खुलासा
जुलाई 2015 में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि जब उन्होंने एनडीए में जाने की बात कही थी तो उनके पिता ने जहर खाने की धमकी दी थी. चिराग ने बताया कि राहुल गांधी ने उन्हें इस फैसले में मदद की, क्योंकि उन्हीं के कारण इस मुद्दे पर दोबारा विचार करने का मौका मिला. चिराग पासवान ने वाकया बताते हुए कहा, मैं अभी भी उस पहले रिएक्शन को याद करता हूं जब मैंने एनडीए के साथ जाने की बात कही थी. उनकी प्रतिक्रिया थी कि- मैं जहर खा लूंगा, लेकिन भाजपा के साथ नहीं जाऊंगा.
पिता की तीखी प्रतिक्रिया पर चुप रहे चिराग
बात 2013 की है जब LJP नेतृत्व इस मुद्दे पर विचार कर रही थी कि यूपीए और कांग्रेस के साथ गठबंधन जारी रहे तो किन सियासी समीकरणों के तहत रहे. इसी दौरान चिराग पासवान ने अपने पिता को NDA के साथ जाने के लिए कहा, लेकिन रामविलास पासवान ने शुरू में काफी तीखा रिएक्शन दिया और कहा कि वे भाजपा के साथ नहीं जाएंगे. चिराग के अनुसार उस प्रतिक्रिया के बाद उन्हें लगभग तीन महीने तक इस विषय पर दोबारा बात करने की हिम्मत नहीं हुई, क्योंकि पिता की प्रतिक्रिया भावनात्मक और काफी तीखी थी.
चिराग पासवान ने इंटरव्यू में NDA में शामिल होने की कहानी, रामविलास पासवान की प्रतिक्रिया और राहुल गांधी की भूमिका का खुलासा किया.
LJP के NDA में जाने में राहुल गांधी का रोल
चिराग पासवान ने रामविलास पासवान का मन बदलने की कहानी भी साझा की और बताया कि उस दौर में राहुल गांधी की कार्यशैली ने भी मदद की. चिराग ने खुद बताया कि उनके पिता ने राहुल गांधी से मिलने का प्रयास किया, लेकिन राहुल गांधी से बैठक नहीं हो पाई. चिराग ने अपरोक्ष रूप से कहा कि राहुल गांधी ने मिलने का समय नहीं दिया, जिससे उन्हें एनडीए में जाने वाले विषय को फिर से उठाने का मौका मिला. बकौल चिराग पासवान, यही वो घटना थी जब गठबंधन की दिशा राजनीतिक रूप से तय हो रही थी, लेकिन राहुल गांधी ने उन्हें वह स्पेस दिया कि वह बाद में एनडीए में आने के मुद्दे को फिर से उठा सकें.
कैसे बदला रामविलास पासवान का फैसला?
इंटरव्यू में चिराग ने 2014 लोकसभा चुनाव से पहले NDA में शामिल होने के फैसले के पीछे की पारिवारिक तनातनी का जिक्र किया. चिराग ने बताया कि जब उन्होंने अपने पिता राम विलास पासवान (जो तब UPA सरकार में मंत्री थे) को NDA जॉइन करने का सुझाव दिया, तो राम विलास ने कड़ी आपत्ति जताई. चिराग ने उस दौर को याद करते हुए बताया, “मैं अभी भी उस पहले रिएक्शन को याद करता हूं जब मैंने एनडीए के साथ जाने की बात कही थी. उनकी प्रतिक्रिया थी कि- मैं जहर खा लूंगा, लेकिन भाजपा के साथ नहीं जाऊंगा. यह खुलासा सुनकर पत्रकार ने चिराग से पूछा कि उन्होंने कैसे अपने पिता को मनाया, जिस पर चिराग ने कहा कि यह सबसे कठिन काम था. उन्होंने जोर देकर कहा कि पिता की अनिच्छा के बावजूद, परिस्थितियां और राजनीतिक बदलावों ने अंततः फैसला बदल दिया. राम विलास पासवान ने छह प्रधानमंत्रियों के अधीन काम किया था, लेकिन 2014 में मोदी लहर को पहचानना पड़ा.
2014 लोकसभा चुनाव में एलजेपी एनडीए में आ गई. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रामविलास पासवान के बीच बेहद खास रिश्ता बन गया था.
मीटिंग नहीं होने से NDA की ओर झुकाव
चिराग ने इंटरव्यू में कांग्रेस और राहुल गांधी पर भी निशाना साधा. उन्होंने खुलासा किया कि नवंबर 2013 से फरवरी 2014 तक तीन महीनों तक वे और उनके पिता सोनिया गांधी से कई बार मिले, लेकिन राहुल गांधी से अपॉइंटमेंट नहीं मिला. चिराग ने आगे कहा- सोनिया जी कहती रहीं कि राहुल जी से मीटिंग फिक्स हो जाएगी, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ. चिराग का मानना है कि यह ‘स्नब’ (अनदेखी) ही थी जिसने उन्हें NDA की ओर धकेल दिया. चिराग पासवान ने इसे विडंबना बताते हुए कहा कि अगर मीटिंग हो जाती तो शायद UPA में रहना पड़ता, लेकिन इससे उन्हें पिता को NDA जॉइन करने के लिए मनाने का मौका मिला.
2014 में NDA में वापसी और बेहतर परिणाम
जब यूपीए से बात आगे नहीं बढ़ी तो रामविलास पासवान ने चिराग पासवान के प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की सहमति दे दी. इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए LJP ने NDA के साथ गठबंधन किया, जिसमें नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा प्रमुख पार्टी थी. पार्टी ने मोदी-NDA के साथ चुनाव लड़ा और पीएम मोदी के नेतृत्व वाले केंद्र की एनडीए सरकार में रामविलास पासवान केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हुए. जाहिर है चिराग पासवान के इस खुलासे ने बिहार और राष्ट्रीय राजनीति दोनों में नई चर्चा छेड़ दी है. रामविलास पासवान का भाजपा को लेकर इतना तीखा रुख और चिराग पासवान का बाद में एनडीए के साथ जाना-यह राजनीतिक रिश्तों, व्यक्तिगत भावनाओं और समय-समय पर बदलते समीकरणों का दिलचस्प पक्ष उजागर करता है.






