बिहार विधानसभा के 18वें चुनाव के बाद पहला सत्र सोमवार से शुरू हो गया. सत्र के पहले दिन कई नवनिर्वाचित विधायकों ने शपथ ली, लेकिन जनता दल यूनाइटेड (JDU) की विधायक विभा देवी यादव की शपथ का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. शपथ को पढ़ते हुए उन्हें बेहद कठिनाई हो रही थी और जैसे-तेसे पड़ोस में बैठी विधायक की मदद से उन्हेंने अपनी शपथ पूरी की. विभा देवी जेल में बंद पूर्व विधायक राज बल्लभ यादव की पत्नी हैं. जब उनसे शपथ नहीं पढ़ी गई, तो JDU विधायक मनोरमा देवी ने उनकी मदद की, जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
दो बार विधायक रहने के बाद भी दिक्कत
विभा देवी यादव दो बार विधायक रह चुकी हैं, लेकिन सोमवार को शपथ ग्रहण के समय वह शपथ पढ़ने में संघर्ष करती नज़र आईं. वीडियो में देखा जा सकता है कि उन्होंने पास खड़ी JDU विधायक मनोरमा देवी से मदद मांगी, जबकि अन्य विधायक चुपचाप यह सीन देखते रहे. इस घटना ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है.
कौन हैं विभा देवी यादव?
59 साल की विभा देवी यादव ने 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर नवादा सीट से जीत हासिल की थी. 2025 के चुनावों से ठीक पहले, उन्होंने आरजेडी छोड़कर JDU का हाथ थाम लिया और नवादा सीट से टिकट पाकर फिर से चुनाव लड़ा.
उनके पास 31 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति (17.4 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 13.6 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति) है. यादव ने आरजेडी प्रत्याशी कौशल यादव को हराकर नवादा सीट बरकरार रखी है. उन्हें 43.39 फीसद वोट मिले, जबकि कौशल यादव को 29.69 फीसद. ध्यान देने वाली बात है कि उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में भी आरजेडी की टिकट पर नवादा से चुनाव लड़ा था, लेकिन तब वह लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के चंदन सिंह से हार गई
विधायकों द्वारा शपथ में गलतियां
ईश्वर की सतत लेती हूं और ऐ छुटकी पढ़ न, के कारण बाहुबली की पत्नी विभा देवी चर्चा में हैं। बिहार विधानसभा सत्र के पहले दिन वे शपथ पढ़ने में अटकी थीं। हालांकि, ऐसे विधायकों की संख्या कम नहीं है जो शपथ के दौरान अटके हों। 2015 में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव के साथ भी ऐसा हुआ था। वे अपेक्षित को उपेक्षित पढ़ गए थे। तत्कालीन राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने उन्हें दोबारा शपथ लेने को कहा था। इसके बाद महुआ से निर्वाचित तेज प्रताप ने दोबारा शपथ ली।
भागीरथी देवी ने कहा-चार बेर पढ़वाए हैं
ऐसे में एक नाम भागीरथी देवी का भी है। पश्चिम चंपारण के रामनगर विधानसभा से 2005 में दूसरी बार निर्वाचित हुई थीं। तब सदानंद सिंह आसन पर थे। बार-बार टोके जाने पर उन्होंने हल्के अंदाज में अपनी नाराजगी जताई।
उन्होंने शपथ पत्र पढ़ना शुरू किया। शुरू किया, मैं भागीरथी देवी, पश्चिम चंपारण… । इतना बोलते ही अध्यक्ष ने कहा, वह बोलने की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद अटकते हुए वे पढ़ने लगी। इसी क्रम में कहा, मैं शपथ लेती हूं, अध्यक्ष ने टोका, ईश्वर की शपथ लेती हूं। इसे उन्होंने दोहराया। इसके बाद उन्होंने शपथ पत्र रख दिया। अध्यक्ष ने कहा- अभी और है, मैं भारत की प्रभुता…। भागीरथी देवी ने कहा-बोले हैं सर, बोलनी ह त। इसके बाद मैं भारत की प्रभुता, अखंडता अक्षुण्ण रखूंगी। फिर आगे का हिस्सा पढ़ा। फिर कहा, चार बेर बोलबावल गइल है।
भागीरथी देवी रामनगर विधानसभा क्षेत्र से 2010, 15 एवं 20 में लगातार तीन बार निर्वाचित हुईं। इस बार पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। वे पूर्व में 2000 और 2005 और दो बार शिकारपुर की विधायक भी चुनी गई थीं। सदन में शपथ के दौरान विधायक विनय बिहारी और अशोक महतो की पत्नी अनिता देवी भी चर्चा में रहीं। ये दोनों शपथ पत्र से अलग पढ़ने लगे।







